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Unnao News: श्री रत्नेश्वर नीलकंठ महादेव मंदिर में स्थापित हैं रत्नों की प्रतिमाएं
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फतेहपुर चौरासी। नगर पंचायत ऊगू के पकरिया चांदी में स्थित श्री रत्नेश नीलकंठ महादेव मंदिर की अलग पहचान है। इस मंदिर में पत्थर के नहीं नीलम और शुद्ध स्फटिक के दुर्लभ शिवलिंग स्थापित हैं। इसके साथ ही मंदिर में कीमती पन्ना की पंचमुखी गणेश प्रतिभा भी है। ऐसी मान्यता है कि भक्तों की हर मनोकामना भगवान शंकर अवश्य पूरी करते हैं।
फतेहपुर चौरासी ब्लाक के ऊगू कस्बे के पकरिया चांदी में आईएएस अधिकारी रहे स्व. रमारतन शुक्ल ने वर्ष 2006 में इस मंदिर का निर्माण कराया था। उन्होंने यहां पर 30 किलो वजनी कच्चे नीलम (रत्न पत्थर) का एक शिवलिंग स्थापित कराया था। इसके कुछ दिनों बाद 32 किलो वजन के स्फटिक के शिवलिंग की स्थापना कराई थी। मंदिर में पन्ना रत्न की पंचमुखी गणेश की प्रतिमा भी स्थापित कराई गई।
ऐसा कहा जाता है कि पांच रत्ती का नीलम 24 घंटे में व्यक्ति का भाग्य बदल देता है। ऐसे ही 30 किलो वजनी शिवलिंग को स्पर्श करने वालों की किस्मत हर हाल में बदलती है। मंदिर की देखरेख करने वाले पुजारी लवकुश तिवारी का कहना है कि वर्ष 2012 के एक आकलन के अनुसार, देश में स्फटिक के केवल पांच शिवलिंग हैं। इनमें हरिद्वार, दिल्ली, रामेश्वरम, जम्मू के साथ जनपद भी शामिल है। वहीं नीलम का शिवलिंग व पन्ना रत्न के पंचमुखी गणेश प्रतिमा अकेली है। ऐसी दुर्लभ प्रतिमाओं के पूजन का अवसर मिलना सौभाग्य की बात है। पुजारी का दावा है कि जो कोई भी यहां एकाग्र मन से इस मंदिर में पूजन करता है उस पर महादेव की कृपा अवश्य होती है।
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सावन में उमड़ता है आस्था का सैलाब
वैसे तो यहां पर रोजाना शिवलिंग के दर्शन करने वालों की भीड़ होती है लेकिन सावन में यहां पर आस्था का जनसैलाब उमड़ता है। आसपास के क्षेत्रों के अलावा जनपद व नजदीक के दूसरे जिलों से भी लोग यहां आकर शिवलिंग व भगवान गणेश के दर्शन करते हैं।
ऐसे पहुंच सकते हैं मंदिर
उन्नाव जिला मुख्यालय से मंदिर की दूरी 33 किलोमीटर है। सडक़ व रेल मार्ग से भी पहुंचा जा सकता है। ट्रेन से आने पर ऊगू स्टेशन उतरकर एक किलोमीटर दूर आसानी से पहुंच सकते हैं। वहीं, रोडवेज बस के जरिए उन्नाव-हरदोई मार्ग पर हुलासीकुआं या माथर पर उतरकर वहां से ऑटो या ई-रिक्शा आदि साधनों से मंदिर पहुंचा जा सकता है।
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फतेहपुर चौरासी ब्लाक के ऊगू कस्बे के पकरिया चांदी में आईएएस अधिकारी रहे स्व. रमारतन शुक्ल ने वर्ष 2006 में इस मंदिर का निर्माण कराया था। उन्होंने यहां पर 30 किलो वजनी कच्चे नीलम (रत्न पत्थर) का एक शिवलिंग स्थापित कराया था। इसके कुछ दिनों बाद 32 किलो वजन के स्फटिक के शिवलिंग की स्थापना कराई थी। मंदिर में पन्ना रत्न की पंचमुखी गणेश की प्रतिमा भी स्थापित कराई गई।
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ऐसा कहा जाता है कि पांच रत्ती का नीलम 24 घंटे में व्यक्ति का भाग्य बदल देता है। ऐसे ही 30 किलो वजनी शिवलिंग को स्पर्श करने वालों की किस्मत हर हाल में बदलती है। मंदिर की देखरेख करने वाले पुजारी लवकुश तिवारी का कहना है कि वर्ष 2012 के एक आकलन के अनुसार, देश में स्फटिक के केवल पांच शिवलिंग हैं। इनमें हरिद्वार, दिल्ली, रामेश्वरम, जम्मू के साथ जनपद भी शामिल है। वहीं नीलम का शिवलिंग व पन्ना रत्न के पंचमुखी गणेश प्रतिमा अकेली है। ऐसी दुर्लभ प्रतिमाओं के पूजन का अवसर मिलना सौभाग्य की बात है। पुजारी का दावा है कि जो कोई भी यहां एकाग्र मन से इस मंदिर में पूजन करता है उस पर महादेव की कृपा अवश्य होती है।
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सावन में उमड़ता है आस्था का सैलाब
वैसे तो यहां पर रोजाना शिवलिंग के दर्शन करने वालों की भीड़ होती है लेकिन सावन में यहां पर आस्था का जनसैलाब उमड़ता है। आसपास के क्षेत्रों के अलावा जनपद व नजदीक के दूसरे जिलों से भी लोग यहां आकर शिवलिंग व भगवान गणेश के दर्शन करते हैं।
ऐसे पहुंच सकते हैं मंदिर
उन्नाव जिला मुख्यालय से मंदिर की दूरी 33 किलोमीटर है। सडक़ व रेल मार्ग से भी पहुंचा जा सकता है। ट्रेन से आने पर ऊगू स्टेशन उतरकर एक किलोमीटर दूर आसानी से पहुंच सकते हैं। वहीं, रोडवेज बस के जरिए उन्नाव-हरदोई मार्ग पर हुलासीकुआं या माथर पर उतरकर वहां से ऑटो या ई-रिक्शा आदि साधनों से मंदिर पहुंचा जा सकता है।