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मानक दरकिनार, जहरीला हो रहा लोन नदी का पानी

Mon, 08 Jul 2019 12:48 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 08 Jul 2019 12:48 AM IST
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Standard Bypassing, Poisonous Lone River Water
नाले का रूप ले चुकी लोन नदी। - फोटो : UNNAO
उन्नाव। भूगर्भ में जहर और खेतों को बंजर कर रहे लोन नदी के पानी में प्रदूषण की मुख्य वजह फैक्ट्रियों, औद्योगिक क्षेत्रों और शहर के नालों का गैर शुद्धीकृत पानी है। इसी का नतीजा है कि लोन नदी अब गंदे नाले का रूप ले चुकी है।
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पिछले कई वर्षों से अनदेखी और प्रदूषित पानी छोड़ने से लोन नदी अब गंदा नाला बन चुकी है। दो साल पहले लोन नदी की सफाई और पटरियों की मरम्मत के लिए शासन से 24 लाख रुपये जारी हुए। सफाई का काम खानापूरी तक ही सीमित रहा। शहर से लेकर रायबरेली जिले की सीमा में डलमऊ के पास गंगा में मिलने वाली लोन नदी का पानी गंगा जल को भी प्रदूषित कर रहा है।
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जिले के दहीचौकी औद्योगिक क्षेत्र में छोटी-बड़ी 125 फैक्टरियां हैं। यह ऐसी फैक्टरियां हैं जिनमें किसी न किसी रूप में प्रतिदिन हजारों लीटर पानी का इस्तेमाल और उत्प्रवाह होता है। फैक्ट्रियों से निकलने वाले पानी को साफ करने के लिए दहीचौकी में सीईटीपी (कामन इंफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) भी लगा है, लेकिन सिर्फ 14 टेनरियां और एक डॉगच्यू बनाने वाली फैक्टरी ही इस सीईटीपी से जुड़ी है। अन्य फैक्ट्रियों और स्लाटर हाउसों का पानी नालों के जरिए सीधे गिराया जाता है। शहर के कई नाले भी इसी लोन नदी में गिरते हैं।
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दिन में ईटीपी चलाने का हो रहा दिखावा
फैक्टरी संचालकों का दावा है कि उन्होंने अपनी फैक्टरियों में निजी ईटीपी (इंफ्लुएंट प्लांट) लगा रखे हैं। जिनसे पानी को शुद्ध करने के बाद ही पानी को लोन नदी में बहाया जाता है, लेकिन सूत्रों का दावा है कि ईटीपी संचालन में बिजली, कर्मचारियों व अन्य रासायनों पर प्रतिदिन औसतन 10 हजार रुपये खर्च आता है। दावा है कि निजी ईटीपी केवल दिन में ही चलाए जाते हैं। रात के समय बिना साफ किए ही नालों के माध्यम से लोन नदी में बहा दिया जाता है।

होगी जांच गड़बड़ी मिली तो कार्रवाई
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी विमल कुमार ने बताया कि फैक्टरियों का प्रदूषित पानी लोन नदी या गंगा नदी में न जाए इसपर लगातार नजर रखी जाती है। समय समय पर फैक्टरियों में लगे निजी ईटीपी के संचालन की भी जांच की जाती है। जब भी गड़बड़ी मिलती है कार्रवाई की जाती है। फैक्टरियों में लगे ईटीपी और लोन नदी में बहाए जा रहे पानी की जांच कराई जाएगी। गड़बड़ी मिली तो कार्रवाई की जाएगी।
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