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शाहीनबाग मध्यस्थता समिति के सदस्य वजाहत का उन्नाव से नाता
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दिल्ली के शाहीन बाग नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन करते स्थानीय कोगो को सम्बोधित करते ?
- फोटो : NOIDA
हसनगंज(उन्नाव)। दिल्ली के शाहीनबाग में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को लेकर हो रहे धरना-प्रदर्शन को हल कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित मध्यस्थता समिति में शामिल वजाहत हबीबउल्लाह का उन्नाव से भी नाता है। उनकी ननिहाल हसनगंज तहसील के न्योतनी कस्बे में है। वजाहत के टीम में शामिल होने पर ममेरे भाई ने खुशी जताई है। उन्हें यकीन है कि मसला हल हो जाएगा।
15 दिसंबर से दिल्ली के शाहीनबाग में सीएए को लेकर धरना-प्रदर्शन चल रहा है। मसले का हल निकालने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने तीन सदस्यीय मध्यस्थता समिति बनाई है। समिति में शामिल पूर्व आईएएस वजाहत हबीबुल्लाह का उन्नाव से गहरा रिश्ता है। उनकी ननिहाल (मां हामिदा हबीबउल्लाह का मायका) न्योतनी नगर पंचायत के इंदिरानगर मोहल्ले में है। घर पर मौजूद उनके ममेरे भाई सारे आलम ने कहा कि भाईजान (वजाहत अबीबउल्लाह) का नाम मध्यस्थता कमेटी में शामिल होना फख्र की बात है। उन्हें विश्वास है कि भाई जान की बातचीत से मसले का हल जरूर निकलेगा।
सारे आलम ने बताया कि बचपन में वह अपनी मां हामिदा के साथ और इसके बाद परिवार के मांगलिक कार्यक्रम में आते रहे हैं। बताया कि दो साल पहले गोंडा में छोटे भाई हसन शहीद के मीना शाह इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में उनसे मुलाकात हुई थी। तब उन्होंने अपने ननिहाल न्योतनी की खैरियत पूछी थी। आज भी न्योतनी में उनकी मां के नाम चार बीघा जमीन है। मां हामिदा का 2018 में इंतकाल हो गया था। ममेरे भाई ने बताया कि वजाहत हबीबउल्लाह का पैतृक निवास बाराबंकी जिले के सईदनपुर में है। वहां उनकी काफी जमीन और जायदाद है।
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वजाहत हबीबउल्लाह 1968 बैच के आईएएस थे जो अगस्त 2005 में रिटायर हुए थे। वह देश के मुख्य सूचना आयुक्त और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष भी रहे हैं। उनका हंसमुख और मिलनसार स्वभाव सभी को आकर्षित करता है।
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15 दिसंबर से दिल्ली के शाहीनबाग में सीएए को लेकर धरना-प्रदर्शन चल रहा है। मसले का हल निकालने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने तीन सदस्यीय मध्यस्थता समिति बनाई है। समिति में शामिल पूर्व आईएएस वजाहत हबीबुल्लाह का उन्नाव से गहरा रिश्ता है। उनकी ननिहाल (मां हामिदा हबीबउल्लाह का मायका) न्योतनी नगर पंचायत के इंदिरानगर मोहल्ले में है। घर पर मौजूद उनके ममेरे भाई सारे आलम ने कहा कि भाईजान (वजाहत अबीबउल्लाह) का नाम मध्यस्थता कमेटी में शामिल होना फख्र की बात है। उन्हें विश्वास है कि भाई जान की बातचीत से मसले का हल जरूर निकलेगा।
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सारे आलम ने बताया कि बचपन में वह अपनी मां हामिदा के साथ और इसके बाद परिवार के मांगलिक कार्यक्रम में आते रहे हैं। बताया कि दो साल पहले गोंडा में छोटे भाई हसन शहीद के मीना शाह इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में उनसे मुलाकात हुई थी। तब उन्होंने अपने ननिहाल न्योतनी की खैरियत पूछी थी। आज भी न्योतनी में उनकी मां के नाम चार बीघा जमीन है। मां हामिदा का 2018 में इंतकाल हो गया था। ममेरे भाई ने बताया कि वजाहत हबीबउल्लाह का पैतृक निवास बाराबंकी जिले के सईदनपुर में है। वहां उनकी काफी जमीन और जायदाद है।
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वजाहत हबीबउल्लाह 1968 बैच के आईएएस थे जो अगस्त 2005 में रिटायर हुए थे। वह देश के मुख्य सूचना आयुक्त और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष भी रहे हैं। उनका हंसमुख और मिलनसार स्वभाव सभी को आकर्षित करता है।