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सेवानिवृत्त बीमा अधिकारी ने बनवाई स्कूल की बाउंड्रीवाल
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सेवानिवृत बीमाकर्मी कमलेश त्रिवेदी जिन्होंने बनवाई स्कूल की दीवार।
- फोटो : UNNAO
अचलगंज(उन्नाव)। कोरोनाकाल में प्रधानमंत्री द्वारा जन सहयोग के आह्वान से प्रेरित होकर गौरी त्रिभानपुर के एक बुजुर्ग ने अपनी नौकरी के मिले फंड से सात लाख रुपये देकर परिषदीय स्कूल की ढाई सौ मीटर बाउंड्रीवाल का निर्माण कराया।
विकासखंड सिकंदरपुर करन की ग्राम पंचायत गौरी त्रिभानपुर के मजरा त्रिभानपुर के मूल निवासी कमलेश त्रिवेदी लगभग 10 वर्ष पूर्व सहायक मंडल प्रबंधक भारतीय जीवन बीमा निगम के पद से सेवानिवृत्त होकर वर्तमान में आवास विकास में रह रहे हैं। सेवानिवृत्त के बाद भी वह गांव आते-जाते हैं। उन्होंने गांव के ही परिषदीय स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा पाई थी जिससे उनका लगाव स्कूल से बना रहा। हालांकि बाउंड्रीविहीन विद्यालय उनको खटकता रहा। इसी बीच प्रवासी मजदूरों द्वारा हसनगंज के एक स्कूल का रंगरोगन करने और प्रधानमंत्री द्वारा उनकी प्रशंसा किए जाने से प्रेरित होकर कमलेश त्रिवेदी ने भी अपने गांव के स्कूल के लिए कुछ करने की सोची।
ग्राम प्रधान सुनीता वर्मा से बात की तो उन्होंने विद्यालय के दो तरफ नाला होने से बाउंड्रीवाल बनाने के लिए भारी भरकम धनराशि की आवश्यकता बताई। बताया कि ग्राम पंचायत में बजट सीमित है। ग्राम प्रधान सुनीता देवी ने लगभग 100 मीटर बाउंड्रीवाल बनवाने की हामी भरी। जबकि विद्यालय की बाउंड्रीवाल लगभग 250 मीटर बननी थी वो भी नाले की वजह से उसकी ऊंचाई लगभग दस फीट थी। इसके लिए कमलेश ने अपने भविष्य के लिए बचा कर रखे फंड के पैसों से सात लाख रुपये प्रधान को दिए। कोरोनाकाल में बेरोजगारी का दंश झेल रहे मजदूरों को भी रोजगार मिला और लगभग दो महीने में 3 मीटर ऊंची व 250 मीटर लंबी बाउंड्रीवाल बन कर तैयार हो गई। जिसमें अभी तक नौ लाख पचास हजार खर्च हो चुके हैं। इसमें ढाई लाख रुपये ग्राम पंचायत द्वारा खर्च किए गए। अभी रंगरोगन होना शेष है जिसका वहन भी कमलेश त्रिवेदी द्वारा किया जाएगा। प्रधान शिक्षिका अंजली सक्सेना, शिक्षक प्रदीप भदौरिया व सहायक शिक्षक नागेंद्रनाथ ने भी अवकाश के दिनों में रात-दिन एक करके इस बाउंड्रीवाल के निर्माण में अपना सहयोग दिया।
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डेढ़ सौ बच्चों के लिए कर चुके हैं फर्नीचर की व्यवस्था
समाजसेवी कमलेश त्रिवेदी ने इसके पूर्व भी स्कूल के डेढ़ सौ बच्चों को टाट पट्टी से मुक्ति दिलाते हुए फ र्नीचर दे चुके हैं। इसके अलावा जब सरकार द्वारा स्वेटर नहीं दिए जाते थे तब भी प्रति वर्ष उनके लिए स्वेटर, पुस्तकें तथा अन्य उपयोगी वस्तुएं बच्चों को प्रदान किया करते थे। कमलेश द्वारा किए गए कार्य की क्षेत्र में प्रशंसा हो रही है।
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विकासखंड सिकंदरपुर करन की ग्राम पंचायत गौरी त्रिभानपुर के मजरा त्रिभानपुर के मूल निवासी कमलेश त्रिवेदी लगभग 10 वर्ष पूर्व सहायक मंडल प्रबंधक भारतीय जीवन बीमा निगम के पद से सेवानिवृत्त होकर वर्तमान में आवास विकास में रह रहे हैं। सेवानिवृत्त के बाद भी वह गांव आते-जाते हैं। उन्होंने गांव के ही परिषदीय स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा पाई थी जिससे उनका लगाव स्कूल से बना रहा। हालांकि बाउंड्रीविहीन विद्यालय उनको खटकता रहा। इसी बीच प्रवासी मजदूरों द्वारा हसनगंज के एक स्कूल का रंगरोगन करने और प्रधानमंत्री द्वारा उनकी प्रशंसा किए जाने से प्रेरित होकर कमलेश त्रिवेदी ने भी अपने गांव के स्कूल के लिए कुछ करने की सोची।
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ग्राम प्रधान सुनीता वर्मा से बात की तो उन्होंने विद्यालय के दो तरफ नाला होने से बाउंड्रीवाल बनाने के लिए भारी भरकम धनराशि की आवश्यकता बताई। बताया कि ग्राम पंचायत में बजट सीमित है। ग्राम प्रधान सुनीता देवी ने लगभग 100 मीटर बाउंड्रीवाल बनवाने की हामी भरी। जबकि विद्यालय की बाउंड्रीवाल लगभग 250 मीटर बननी थी वो भी नाले की वजह से उसकी ऊंचाई लगभग दस फीट थी। इसके लिए कमलेश ने अपने भविष्य के लिए बचा कर रखे फंड के पैसों से सात लाख रुपये प्रधान को दिए। कोरोनाकाल में बेरोजगारी का दंश झेल रहे मजदूरों को भी रोजगार मिला और लगभग दो महीने में 3 मीटर ऊंची व 250 मीटर लंबी बाउंड्रीवाल बन कर तैयार हो गई। जिसमें अभी तक नौ लाख पचास हजार खर्च हो चुके हैं। इसमें ढाई लाख रुपये ग्राम पंचायत द्वारा खर्च किए गए। अभी रंगरोगन होना शेष है जिसका वहन भी कमलेश त्रिवेदी द्वारा किया जाएगा। प्रधान शिक्षिका अंजली सक्सेना, शिक्षक प्रदीप भदौरिया व सहायक शिक्षक नागेंद्रनाथ ने भी अवकाश के दिनों में रात-दिन एक करके इस बाउंड्रीवाल के निर्माण में अपना सहयोग दिया।
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डेढ़ सौ बच्चों के लिए कर चुके हैं फर्नीचर की व्यवस्था
समाजसेवी कमलेश त्रिवेदी ने इसके पूर्व भी स्कूल के डेढ़ सौ बच्चों को टाट पट्टी से मुक्ति दिलाते हुए फ र्नीचर दे चुके हैं। इसके अलावा जब सरकार द्वारा स्वेटर नहीं दिए जाते थे तब भी प्रति वर्ष उनके लिए स्वेटर, पुस्तकें तथा अन्य उपयोगी वस्तुएं बच्चों को प्रदान किया करते थे। कमलेश द्वारा किए गए कार्य की क्षेत्र में प्रशंसा हो रही है।

गौरी त्रिभानपुर गांव के प्राथमिक विद्यालय में कमलेश द्वारा बनवाई गई बाउंड्रीवाल।- फोटो : UNNAO