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उम्रकैद की सजा काट रहे वृद्ध की मौत
ब्यूरो/अमर उजाला, उन्नाव
Updated Wed, 21 Jan 2015 12:26 AM IST
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उन्नाव। हत्या के मामले में सात महीने से जेल में बंद वृद्ध की मंगलवार तड़के हालत बिगड़ गई। जेल अधिकारियों ने उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
सुबह साढ़े पांच बजे मौत हुई और 12 घंटे बाद शाम साढ़े पांच बजे तक पोस्टमार्टम कराने के कागज पुलिस लाइन से पोस्टमार्टम हाउस नहीं पहुंच पाए। नतीजतन कैदी के शव का पोस्टमार्टम नहीं हो सका।
गंगाघाट थानाक्षेत्र के शंकरपुर सरांय में वर्ष 2003 में मारपीट के दौरान एक युवक की हत्या कर दी गई थी। मुकदमे का ट्रायल विशेष न्यायाधीश एससीएसटी कोर्ट द्वितीय में चल रहा था।
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न्यायालय के निर्देश पर 27 जून 2014 को पुलिस ने शंकरपुर सरांय गांव निवासी राजू (95) पुत्र पूरन रैदास, और उसके तीन बेटे शिवकुमार, रामकुमार और देशराज को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। हत्या का दोष सिद्ध होने पर 30 जून 2014 को न्यायाधीश ने राजू और उसके तीनों पुत्रों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
एक साल से जेल में बेटों के साथ उम्रकैद की सजा काट रहे वृद्ध राजू की सोमवार देर रात तबियत बिगड़ गई। उसे सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। जेल अधीक्षक आरएन पांडेय ने उसे जेल अस्पताल में भर्ती कराया। आराम न मिलने पर मंगलवार तड़के पांच बजे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां इलाज के दौरान 5.31 बजे उसकी मौत हो गई। मृत्यु की सूचना के बाद जेल अधिकारियों ने जिला प्रशासन और मृतक के परिजनों को सूचना दी। सूचना मिलने पर नायब तहसीलदार रेणुका दीक्षित ने पंचायतनामा भरा।
हालांकि डॉक्टरों का पैनल, वीडियोग्राफी की व्यवस्था नहीं हो पाई और पुलिस लाइन से पोस्टमार्टम संबंधी प्रपत्र शाम पांच बजे तक नहीं पहुंच पाए। इसके चलते कैदी के शव का पोस्टमार्टम नहीं हो पाया। हालांकि, अब अधिकारी प्राथमिकता के आधार पर बुधवार को पोस्टमार्टम कराने और शव को परिजनों को सौंपने की बात कह रहे हैं।
एक बेटे का कानपुर में चल रहा इलाज
उन्नाव। आजीवन कारावास की सजा काट रहे राजू के तीन बेटे हैं और वह तीनों भी इसी हत्या के मामले में पिता के साथ आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। एक बेटा भी कई दिनों से बीमार है खून की कमी के चलते हालत बिगड़ने पर जेल अधिकारियों ने उसे सोमवार को कानपुर हैलट में भर्ती कराया था। उसका अभी इलाज चल रहा है।
पिता के अंतिम संस्कार के लिए बेटों ने मांगी पैरोल
उन्नाव। जेल अधीक्षक आरएन पांडेय ने बताया कि उम्रकैद की सजा काट रहे तीनों बेटों ने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए पैरोल मांगी है। उनके प्रार्थनापत्र को जिलाधिकारी कार्यालय भेज दिया गया है। अनुमति मिलने पर बेटों को पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए जेल से भेजा जाएगा।
जेल से रिहा करने पर चल रहा था विचार
उन्नाव। नब्बे साल से अधिक उम्र होने के कारण जेल अधीक्षक ने उसे जेल से रिहा करने का प्रस्ताव रखा था। इसपर विचार किया गया मगर जेल में काफी कम समय से होने के कारण डीएम की अध्यक्षता वाली बोर्ड कोई फैसला नहीं कर सकी थी।
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सुबह साढ़े पांच बजे मौत हुई और 12 घंटे बाद शाम साढ़े पांच बजे तक पोस्टमार्टम कराने के कागज पुलिस लाइन से पोस्टमार्टम हाउस नहीं पहुंच पाए। नतीजतन कैदी के शव का पोस्टमार्टम नहीं हो सका।
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गंगाघाट थानाक्षेत्र के शंकरपुर सरांय में वर्ष 2003 में मारपीट के दौरान एक युवक की हत्या कर दी गई थी। मुकदमे का ट्रायल विशेष न्यायाधीश एससीएसटी कोर्ट द्वितीय में चल रहा था।
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न्यायालय के निर्देश पर 27 जून 2014 को पुलिस ने शंकरपुर सरांय गांव निवासी राजू (95) पुत्र पूरन रैदास, और उसके तीन बेटे शिवकुमार, रामकुमार और देशराज को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। हत्या का दोष सिद्ध होने पर 30 जून 2014 को न्यायाधीश ने राजू और उसके तीनों पुत्रों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
एक साल से जेल में बेटों के साथ उम्रकैद की सजा काट रहे वृद्ध राजू की सोमवार देर रात तबियत बिगड़ गई। उसे सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। जेल अधीक्षक आरएन पांडेय ने उसे जेल अस्पताल में भर्ती कराया। आराम न मिलने पर मंगलवार तड़के पांच बजे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां इलाज के दौरान 5.31 बजे उसकी मौत हो गई। मृत्यु की सूचना के बाद जेल अधिकारियों ने जिला प्रशासन और मृतक के परिजनों को सूचना दी। सूचना मिलने पर नायब तहसीलदार रेणुका दीक्षित ने पंचायतनामा भरा।
हालांकि डॉक्टरों का पैनल, वीडियोग्राफी की व्यवस्था नहीं हो पाई और पुलिस लाइन से पोस्टमार्टम संबंधी प्रपत्र शाम पांच बजे तक नहीं पहुंच पाए। इसके चलते कैदी के शव का पोस्टमार्टम नहीं हो पाया। हालांकि, अब अधिकारी प्राथमिकता के आधार पर बुधवार को पोस्टमार्टम कराने और शव को परिजनों को सौंपने की बात कह रहे हैं।
एक बेटे का कानपुर में चल रहा इलाज
उन्नाव। आजीवन कारावास की सजा काट रहे राजू के तीन बेटे हैं और वह तीनों भी इसी हत्या के मामले में पिता के साथ आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। एक बेटा भी कई दिनों से बीमार है खून की कमी के चलते हालत बिगड़ने पर जेल अधिकारियों ने उसे सोमवार को कानपुर हैलट में भर्ती कराया था। उसका अभी इलाज चल रहा है।
पिता के अंतिम संस्कार के लिए बेटों ने मांगी पैरोल
उन्नाव। जेल अधीक्षक आरएन पांडेय ने बताया कि उम्रकैद की सजा काट रहे तीनों बेटों ने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए पैरोल मांगी है। उनके प्रार्थनापत्र को जिलाधिकारी कार्यालय भेज दिया गया है। अनुमति मिलने पर बेटों को पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए जेल से भेजा जाएगा।
जेल से रिहा करने पर चल रहा था विचार
उन्नाव। नब्बे साल से अधिक उम्र होने के कारण जेल अधीक्षक ने उसे जेल से रिहा करने का प्रस्ताव रखा था। इसपर विचार किया गया मगर जेल में काफी कम समय से होने के कारण डीएम की अध्यक्षता वाली बोर्ड कोई फैसला नहीं कर सकी थी।