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न नींद से जागी पुलिस, न बेटियों को मिला न्याय

Tue, 10 Dec 2019 12:00 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 10 Dec 2019 12:00 AM IST
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Police did not wake up from sleep, nor daughters got justice
उन्नाव। बिहार थाना क्षेत्र में जलाकर मारी गई दुष्कर्म पीड़िता के मामले ने जिले की कानून व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया। पुलिस की लापरवाही का यह पहला मामला नहीं है। जिले की कई और ऐसी घटनाएं हैं, जो पुलिस की उदासीनता से फाइलों में दबी हैं। शहर का खुशी हत्याकांड और अगवा की गई सफीपुर की रागिनी का अब तक सुराग न लगना इसकी नजीर है। महिलाओं से जुड़े कई और ऐसे मामले हैं, जिनमें परिजन न्याय न मिलने पर थक हारकर घर में बैठ चुके हैं।
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केस-1
दो साल बाद भी किशोरी की हत्या से नहीं उठा पर्दा
शहर के मोहल्ला एबीनगर में किराए का कमरा लेकर रह रहे अजगैन थाना क्षेत्र के बिचपरी गांव निवासी अनिल कुमार कुशवाहा की 13 वर्षीय बेटी खुशी की 29 सितंबर 2017 को उसके घर में ही हत्या कर शव छत की दीवार में लगी खूंटी में लटका दिया गया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला घोंटकर हत्या की पुष्टि के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। करीब एक साल तक जांच में जुटी पुलिस को कोई सुराग नहीं लगा। शक के आधार पर छह लोगों का लाई डिटेक्टर भी हुआ पर इससे भी पुलिस को कामयाबी हासिल नहीं हुई। थक हारकर पुलिस ने पतारसी और सुरागकशी जारी रखते हुए विवेचना में अंतिम रिपोर्ट लगा दी। दो साल से अधिक का समय बीतने के बाद भी खुशी की हत्या का सच बाहर नहीं आ सका। परिवार आज भी बेटी के हत्यारों को सामने लाने के लिए पुलिस के चक्कर लगाने को मजबूर है।
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केस-2
अगवा युवती का तीन साल बाद भी सुराग नहीं
सफीपुर कोतवाली क्षेत्र के उमर अटवा गांव निवासी हरिश्चंद्र की 22 वषीय पुत्री रागिनी उर्फ हेमलता 21 सितंबर 2016 को अपनी मां की दवा लेने घर से जिला अस्पताल के लिए निकली थी। शाम को घर नहीं पहुंची। रात भर खोजबीन के बाद उसका पता न चलने पर परिजनों ने माखी के मेथीटीकुर गांव निवासी सोनू उर्फ अनिल सिंह पर अगवा करने की तहरीर दी। 23 सितंबर को पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की। नामजद आरोपी को 28 सितंबर को पकड़ा और बिना युवती की बरामदगी के 7 अक्टूबर को जेल भेज दिया। 29 अक्टूबर को कोर्ट से आरोपी को जमानत मिल गई। जमानत पर आने के बाद आरोपी ने अपनी फेसबुक आईडी पर लापता रागिनी की फोटो पोस्ट की। परिजन तत्कालीन एसपी नेहा पांडेय से मिले, जिस पर 10 दिसंबर को आरोपी सोनू को फिर से हिरासत में लिया गया। पूछताछ में उसने जिला अस्पताल के बाहर से रागिनी को एक अन्य साथी प्रीतम की मदद से कार से अगवा करने और अचलगंज के बाबाखेड़ा के पास गला घोंटकर हत्या के बाद शव अजगैन थाना क्षेत्र के मुर्तजानगर नहर में फेंकने की बात स्वीकार की। पुलिस ने उसकी निशानदेही पर शव की तलाश की पर शव न मिलने पर 15 दिसंबर को शांतिभंग में फिर से सोनू का चालान कर दिया, जिस पर उसे जमानत मिल गई। मामला लखनऊ के उच्चाधिकारियों तक पहुंचा तो पुलिस ने फिर से जनवरी 2017 में सोनू और उसके साथी प्रीतम को गिरफ्तार कर अपहरण की धारा में जेल भेज दिया। अब आरोपी जमानत पर फिर से बाहर हैं। अब तक रागिनी का कोई सुराग नहीं लग सका है। उसका शव न मिलने से पुलिस ने हत्या की धारा भी नहीं बढ़ाई है। रागिनी के परिजन अब भी पुलिस के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
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एसपी ने कहा घटनाओं का लिया जाएगा संज्ञान
एसपी विक्रांतवीर ने बताया कि दोनों घटनाएं जानकारी में नहीं हैं। सदर कोतवाल से मामले की जानकारी लेकर जांच करा परिवार को न्याय दिलाया जाएगा।
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