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जिले में सिर्फ 44 फीसदी बारिश, सूखे के हालात
ब्यूरो/अमर उजाला, उन्नाव
Updated Sat, 26 Sep 2015 11:30 PM IST
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उन्नाव। तीन माह में औसत बारिश न होने से इस बार भी जनपद में सूखे के हालात बन गए हैं। इस साल भी सिर्फ 44.4 फीसदी बारिश हुई है। जून और अगस्त में औसत का आधा पानी भी नहीं बरसा। इससे किसानों को तगड़े नुकसान की आशंका है।
हर वर्ष 15 से 20 जून के बीच मानसून आने की संभावना रहती है। इस वर्ष अगस्त भी बीत गया लेकिन मानसून पूरी तरह से दस्तक नहीं दे पाया। अमूमन जून में 67.5 मिमी वर्षा अच्छी मानी जाती है। इस बार जून में लगभग 34.5 मिमी ही बारिश हुई। वहीं, जुलाई में सामान्य वर्षा नहीं हुई।
जानकारों की मानें तो जुलाई में सामान्य वर्षा 262.8 मिलीमीटर (एमएम) होनी चाहिए लेकिन इस वर्ष मात्र 202.5 एमएम हुई है। अगस्त में स्थिति और ज्यादा खराब हो गई। इस माह औसत बारिश 246.3 मिमी होनी चाहिए लेकिन बारिश 67.7 एमएम तक ही सिमट कर रह गई। सामान्य वर्षा न होने से जिले में फिर एक बार सूखा पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
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इंद्रदेव की कृपा न होने से जिन किसानों ने पूर्व में धान, मक्का, बाजरा, उड़द आदि फसलों की बुआई कर दी थी उनकी फसल पानी न मिलने से पीली पड़ने लगी है। इस समय खरीफ फसलें पानी मांग रही हैं, लेकिन प्रकृति किसानों को रुलाने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ रही है।
खरीफ फसलों का रकबा - कुल रकबा-184291 हेक्टेअर
धान-99792 हेक्टेअर, मक्का-28395 हेक्टेअर, ज्वार-3343 हेक्टेअर, बाजरा-1128 हेक्टेअर, उर्द-29534 हेक्टेअर, मूंग-4946 हेक्टेअर, मूंगफली-1963 हेक्टेअर, अरहर-2268 हेक्टेअर, तिल-12920 हेक्टेअर,
प्रकृति की लगातार मार झेल रहा अन्नदाता
पिछले खरीफ सीजन में भी औसत बारिश न होने से जनपद में सूखा पड़ा था। इस पर जिला प्रशासन की रिपोर्ट के आधार पर शासन ने जनपद को सामान्य सूखाग्रस्त घोषित किया था। उस समय जिला प्रशासन ने करीब 45 करोड़ रुपये के नुकसान का आकलन बनाकर शासन को रिपोर्ट भेजी थी। इधर, रबी सीजन के दौरान ओलावृष्टि व बारिश ने किसानों को रुलाया था। पिछले साल से अन्नदाता लगातार प्रकृति की मार से कराह रहा है।
शासन ने भी माना जिले में नहीं हुई सामान्य वर्षा
कृषि विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी से लेकर अब तक जनपद में 836.5 मिलीमीटर वर्षा होनी चाहिए लेकिन आठ माह में मात्र 369.3 मिमी ही बारिश हुई। इसी आधार पर ही शासन ने भी माना कि जनपद में मात्र 40 से 60 प्रतिशत के बीच वर्षा हुई। इसके चलते जिले को सामान्य से कम वर्षा वाले शहरों में शामिल कर लिया गया। मुख्य सचिव आलोक रंजन की ओर से जिलाधिकारी को भेजे गए पत्र में निर्देश दिए गए हैं कि किसानों की फसलों को सूखे से बचाने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं।
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हर वर्ष 15 से 20 जून के बीच मानसून आने की संभावना रहती है। इस वर्ष अगस्त भी बीत गया लेकिन मानसून पूरी तरह से दस्तक नहीं दे पाया। अमूमन जून में 67.5 मिमी वर्षा अच्छी मानी जाती है। इस बार जून में लगभग 34.5 मिमी ही बारिश हुई। वहीं, जुलाई में सामान्य वर्षा नहीं हुई।
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जानकारों की मानें तो जुलाई में सामान्य वर्षा 262.8 मिलीमीटर (एमएम) होनी चाहिए लेकिन इस वर्ष मात्र 202.5 एमएम हुई है। अगस्त में स्थिति और ज्यादा खराब हो गई। इस माह औसत बारिश 246.3 मिमी होनी चाहिए लेकिन बारिश 67.7 एमएम तक ही सिमट कर रह गई। सामान्य वर्षा न होने से जिले में फिर एक बार सूखा पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
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इंद्रदेव की कृपा न होने से जिन किसानों ने पूर्व में धान, मक्का, बाजरा, उड़द आदि फसलों की बुआई कर दी थी उनकी फसल पानी न मिलने से पीली पड़ने लगी है। इस समय खरीफ फसलें पानी मांग रही हैं, लेकिन प्रकृति किसानों को रुलाने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ रही है।
खरीफ फसलों का रकबा - कुल रकबा-184291 हेक्टेअर
धान-99792 हेक्टेअर, मक्का-28395 हेक्टेअर, ज्वार-3343 हेक्टेअर, बाजरा-1128 हेक्टेअर, उर्द-29534 हेक्टेअर, मूंग-4946 हेक्टेअर, मूंगफली-1963 हेक्टेअर, अरहर-2268 हेक्टेअर, तिल-12920 हेक्टेअर,
प्रकृति की लगातार मार झेल रहा अन्नदाता
पिछले खरीफ सीजन में भी औसत बारिश न होने से जनपद में सूखा पड़ा था। इस पर जिला प्रशासन की रिपोर्ट के आधार पर शासन ने जनपद को सामान्य सूखाग्रस्त घोषित किया था। उस समय जिला प्रशासन ने करीब 45 करोड़ रुपये के नुकसान का आकलन बनाकर शासन को रिपोर्ट भेजी थी। इधर, रबी सीजन के दौरान ओलावृष्टि व बारिश ने किसानों को रुलाया था। पिछले साल से अन्नदाता लगातार प्रकृति की मार से कराह रहा है।
शासन ने भी माना जिले में नहीं हुई सामान्य वर्षा
कृषि विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी से लेकर अब तक जनपद में 836.5 मिलीमीटर वर्षा होनी चाहिए लेकिन आठ माह में मात्र 369.3 मिमी ही बारिश हुई। इसी आधार पर ही शासन ने भी माना कि जनपद में मात्र 40 से 60 प्रतिशत के बीच वर्षा हुई। इसके चलते जिले को सामान्य से कम वर्षा वाले शहरों में शामिल कर लिया गया। मुख्य सचिव आलोक रंजन की ओर से जिलाधिकारी को भेजे गए पत्र में निर्देश दिए गए हैं कि किसानों की फसलों को सूखे से बचाने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं।