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सजे शिवालय, गूंजेंगे भोले के जयकारे
ब्यूरो अमर उजाला, उन्नाव
Updated Mon, 25 Jul 2016 12:12 AM IST
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शिव मंदिर
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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श्रावण मास के पहले सोमवार पर शहर व ग्रामीण इलाकों में शिव मंदिरों में तैयारियां शुरू हो गई हैं। शिवालयों में रंग-रोगन के साथ विभिन्न प्रकार की झांकियों की सजावट की जा रही है। शिव भक्तों ने बाबा भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए मंदिरों को भगवान शिव को प्रिय लगने वाले फूलों से सजाना शुरू कर दिया है। सावन के पहले सोमवार को देखते हुए फलों व फूलों के दामों में भी दोगुना तक की वृद्धि हो गई है।
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सावन महीने में सोमवार का अलग ही महत्व है। मान्यता हैं कि भगवान भोलेनाथ को फल व फूल अति प्रिय पसंद हैं। शिवभक्तों ने शिवालयों में विभिन्न प्रकार के फूलों से शिव मूर्तियों व शिवलिंगों को सजाना शुरू कर दिया है। इसके अलावा शहर के सभी शिवमंदिरों के आस-पास भांग, धतूरा, फल, फूल, बेलपत्र आदि की दुकानें भी सज गई हैं। सोमवार को देखते हुए इन सभी वस्तुओं की मांग भी अचानक बढ़ गई है। फूलों व फलों के दामों में भी काफी वृद्धि हो गई है। 10 रुपये में बिकने वाली फूलों की डलिया की कीमत बढ़कर 15 से 20 रुपये तक हो गई है। फूल विक्रेता दीनदयाल ने कहा कि आमदिनों में जो डलिया 10 रुपये में बिकती है, उसकी कीमत लगभग दोगुनी हो गई है। कहा कि सावन में इसमें धतूरा और बेलपत्र आदि बढ़ जाने से भी इसकी कीमत बढ़ जाती है।
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भोले को सफेद फूल हैं अति प्रिय
उन्नाव। छोटा चौराहा स्थित श्री महावीर मंदिर के पुजारी पं. रमेश चंद्र तिवारी ने बताया कि भगवान शिव को वैसे तो सभी प्रकार के फूल प्रिय हैं लेकिन सफेद रंग के फूलों से भोलेनाथ अधिक प्रेम करते हैं। इसलिये शिवभक्त अधिकतर शिवालयों को सफेद फूलों से ही सजाते हैं।
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सोमवार को रुद्राभिषेक की भी है मान्यता
उन्नाव। भगवान भोलेनाथ दैहिक, दैविक और भौतिक दुखों का नाश करने वाले हैं। उन्हें रुद्र के नाम से भी जाना जाता है। भोले के पुजारी मानते हैं कि भगवान शिव यानी रुद्र का अभिषेक करने से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। इसीलिए शिवभक्त सावन के सोमवार को रुद्राभिषेक करते हैं। इसमें भोलेनाथ का मिट्टी का शिवलिंग तैयार किया जाता है और फिर मंत्रोच्चारण करते हुए इसका फल, फूल, बेलपत्र आदि से अभिषेक किया जाता है। इसके पश्चात भक्त शिव के सबसे प्रिय पंचामृत व ठंडाई का प्रसाद बांटकर प्रभु से सारे कष्टों को दूर करने की प्रार्थना करते हैं।