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कमाई का फेर, अस्पताल में अंधेर
अमर उजाला, उन्नाव
Updated Thu, 07 Jan 2016 12:39 AM IST
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इसे कमाई का फेर कहें या अफसरों की ढिलमंगई, स्थिति जो भी हो। लेकिन यह सच है कि जिलेवासियों को समुचित स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। सबसे बड़ा खेल पैथोलॉजी में चल रहा है। सरकारी आदेश होने के बाद भी 150 जाचें मुफ्त में नहीं मिल पा रही हैं। बार-बार निर्देश देने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग के अफसर पैथोलॉजी से जुड़ी महंगी जांचें जिला अस्पताल में कराने की व्यवस्था नहीं कर रहे हैं। ऐसे में मरीजों को अपने खर्चे पर महंगी जांचें करानी पड़ रही है।
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सरकार की ओर से उप्र हेल्थ सिस्टम स्ट्रेथिनिंग योजना के तहत जिला अस्पताल में 150 जांचें मुफ्त करने का आदेश दिया गया है। यह भी व्यवस्था है कि जो जाचें संसाधनों के अभाव में जिला अस्पताल में नहीं हो सकती उनके लिए निजी पैथोलॉजी से अनुबंध किया जाए। इसके लिए स्वास्थ्य निदेशालय ने जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को निर्देश दिया है। इसके बाद भी जिला पुरुष अस्पताल में यह व्यवस्था नहीं हो सकी है। ऐसे में जिन जांचों के जिला अस्पताल में संसाधन नहीं हैं, उनके लिए मरीजों को टरका दिया जाता है। हालांकि महिला अस्पताल के लिए अनुबंध हो गया है। ऐसे में वहां सभी जांचों के सेंपल लिए जा रहे हैं।
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केस 1
बारा-सगवर थानाक्षेत्र के रायपुर गांव निवासी प्रभात काफी दिनों से बीमार चल रहे हैं। बुधवार को वह जिला अस्पताल पहुंचे। उन्होंने बताया कि मुफ्त जांच कराए जाने की सूचना पर वह आए थे, लेकिन डाक्टरों ने बताया कि महंगी जांच बाहर से करानी पड़ेगी। वह पैथोलॉजी पर गए तो वहां 1200 रुपये मांगे जा रहे हैं, जिसे देना उसके बस की बात नहीं है।
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केस 2
सफीपुर के पंकज के बेटे राजन को लीवर संबंधी समस्या है। वह कुछ दिनों तक कस्बे में स्थित चिकित्सक के यहां इलाज कराते रहे। बुधवार को जिला अस्पताल आए तो चिकित्सक ने पैथोलाजी जांच कराने को कहा। सरकारी पैथोलॉजी गए तो वहां से निजी पर भेज दिया गया, जहां 800 की रसीद कराने को कहा गया। इतना पैसा पंकज के पास नहीं है। इस वजह से बिना इलाज कराए लौट गए।
पुरुष अस्पताल में होती हैं ये जांचें
पैथोलॉजिस्ट डॉ. अरुण कुमार सचान ने बताया कि पुरुष पैथालॉजी में एबी, टीएलसी, डीएलसी, ईएसआर, एमपी, फाइलेरिया, नाइन बीपी, ब्लड शुगर, शीरम क्रेटनिन, ब्लड यूरिया, यूरिक एसिड, एसओ, सीआरपी, आरए, एचबीएसएजी, बिडॉल, यूरिन, सीमेन व स्टूल की जांचें की जा रही हैं।
इन जांचों के लिए जाना पड़ता बाहर
लीवर दिल संबंधी जांचों में एसबीपीटी, एसजीओटी, शीरम क्लोस्टॉल, ट्राई ग्लेसराइड उपकरण न हो पाने से नहीं हो पा रही हैं। इस बीमारी से पीड़ित मरीजों को निजी पैथालॉजी का ही सहारा लेना पड़ रहा है और यह सब हजार रुपये से अधिक की जांचें हैं।
महिला अस्पताल हो रही हैं ये जांचें
हेमाटोलॉजी के तहत ब्लडग्रुप आरएच टाइप, रैपिड टेस्ट फॉर मलेरिया, बोन मैरो सेमर एक्जॉमिनेशन विद आयरन स्टेन, आरएच एंटीबॉडी टायर। इसके अलावा एबीएआईसी, लिपेस, एमिलेस, एलडीएल, कैल्सियम टोटल सीरम, कैल्सियम लोनिक, सीरम फास्फोरस, यूरिक एसिड, एचबी एलक्ट्रोफॉरेसिस, सीरम मैगिभनसम, गामा जीटी व अन्य। अन्य जांचों में सीआरपी, डेंगू सेरोलॉजी व एक अन्य। यूरिन माइक्रोएल्बोमिन, यूरिन प्रेगभनेंसी टेस्ट व दो अन्य। माइक्रोबायोलॉजी की सात जांचे, हारमोंस की बीस जांचें, सेंसर मार्करर्स संबंधी सात जांचे इसके अलावा अन्य पचीस और जांचे शामिल हैं।
मरीज पर्चे के साथ लाएं आईडी
पैथालॉजी के डायरेक्टर प्रवीन तोमर के मुताबिक डाक्टरों की रुचि न लेने के कारण सैंपल देने आने वाले मरीजों की संख्या काफी कम है। इसके अलावा बिजली की समस्या भी है। जिला अस्पताल में आपूर्ति ठप हो जाने के बाद जेनरेटर नहीं चलाया जाता। इससे अंधेरा हो जाता है और काम करने में दिक्कते आती हैं। उन्होंने बताया कि मुफ्त जांचो का लाभ लेने के लिए मरीज को जिला अस्पताल के पर्चे के साथ अपनी आईडी लाना अनिवार्य है।
कोट
मेरी जानकारी में ऐसा नहीं है। यदि दिक्कत है तो पैथालॉजी प्रभारी हमसे आकर मिलें । समस्या का समाधान कराया जाएगा। डॉ. सरोज श्रीवास्तव, सीएमएस महिला अस्पताल ।
कोट
मुफ्त जांचों के लिए अभी महिला अस्पताल में ही निजी पैथोलॉजी से अनुबंध का आदेश आया है। पुरुष अस्पताल के लिए मेरे पास अभी आदेश नहीं आया है। फिर भी देखवाते हैं। दूसरी जगह व्यवस्था है तो यहां भी कराया जाएगा। -- डॉ. एसपी चौधरी, सीएमएस पुरुष अस्पताल ।