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ओडीओपी: जरी-जरदोजी को मिलेंगी नई ऊंचाईयां
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मियागंज कस्बे में अपने घर में कढ़ाई करती हस्तशिल्पी।
- फोटो : UNNAO
उन्नाव। केंद्र सरकार की एक जनपद एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना में चयनित किए गए जनपद के जरी-जरदोजी (साड़ियों में कढ़ाई) को जल्द ही नई ऊंचाइयां मिलेंगी। इसके लिए केंद्र सरकार ने जनपद में एक और कॉमन फैसिलिटी सेंटर (सीएफसी) के निर्माण को हरी झंडी दे दी है। मियागंज में इस सेंटर का निर्माण कराया जाएगा।
जरदोजी को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चमकाने के लिए केंद्र के साथ प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन ने कमर कस रखी है। इसी कड़ी में अब मियागंज में एक और फैसिलिटी सेंटर निर्माण को मंजूरी मिल गई है। इसके लिए 3.15 करोड़ रुपये भी स्वीकृत हो चुके हैं। सरकार ने पहली किस्त के रूप में 60 लाख रुपये भी जारी कर दिए हैं। हालांकि मामला जमीन को लेकर फंसा हुआ है। मियागंज की संस्था जरी-जरदोजी सद्भाव फाउंडेशन जमीन का बैनामा नहीं करा सकी है। वैसे सीएफसी निर्माण के बाद जरी-जरदोजी कारीगरों को काफी सहूलियतें मिल सकेंगी। सेंटर में एक ही छत के नीचे कच्चा माल, ट्रेनिंग, मशीनरी कटिंग, पैकेजिंग, लैबलिंग, बारकोडिंग एवं मार्केटिंग की सुविधा उपलब्ध होगी। मौजूदा समय में कारीगरों को कच्चा माल समेत अन्य वस्तुओं के लिए उन्नाव, कानपुर या लखनऊ की दौड़ लगानी पड़ती है। जिससे समय पर काम पूरा नहीं हो पाता है। इसको देखते हुए ही मियागंज में नए सेंटर निर्माण का खाका तैयार किया गया है।
वर्तमान समय में सदर, कुरसठ, बारीथाना, मियागंज, आसीवन, हैदराबाद, मोहान, हसनगंज, सफ ीपुर आदि स्थानों में लगभग 10 से 15000 कारीगर कई पीढ़ियों से जरी-जरदोजी (साड़ियों में कढ़ाई का कार्य) का काम करते आ रहे हैं। यहां पर बने जरी परिधानों की कानपुर, लखनऊ, दिल्ली, मुंबई, जयपुर, कोलकाता के साथ अरब देशों में भारी मांग है। वैसे मियागंज, हसनगंज, औरास समेत अन्य ब्लॉकों में जरी-जरदोजी का काम बड़े पैमाने पर होता है।
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वर्ष 2017 से शहर के सिविल लाइन में सीएफसी निर्माण का काम शुरू हुआ था। वर्तमान समय में 85 फीसदी काम पूरा हो चुका है। केंद्र सरकार ने 15 प्रतिशत काम पूरा कराने के लिए 15 लाख रुपये और जारी कर दिए हैं। डीएम ने जुलाई में इसका काम पूरा करने के निर्देश दिए हैं। 39 वर्ग मीटर में स्थापित होने वाले इस सेंटर में डिजाइनिंग, पैकिंग, फिनीशिंग और मार्केटिंग का प्रशिक्षण देने के साथ ही कारीगरों द्वारा तैयार किए गए परिधानों को ऑनलाइन बिक्री की भी सुविधा देने की व्यवस्था होगी। यही नहीं दुनिया के किसी भी देश से उनकी मांग या उनकी ओर से दिए गए डिजाइन के कपड़े तैयार कर ऑनलाइन ट्रांजक्शन और बिक्री भी की जाएगी।
मियागंज में सीएफसी निर्माण के लिए बजट जारी हो गया है। हालांकि संस्था अभी जमीन फाइनल नहीं कर सकी है। जिसके चलते निर्माण शुरू नहीं कराया जा सका है। उम्मीद है अगले माह काम शुरू हो जाएगा।
-रोचना श्रीवास्तव, सहायक उपायुक्त उद्योग।
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जरदोजी को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चमकाने के लिए केंद्र के साथ प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन ने कमर कस रखी है। इसी कड़ी में अब मियागंज में एक और फैसिलिटी सेंटर निर्माण को मंजूरी मिल गई है। इसके लिए 3.15 करोड़ रुपये भी स्वीकृत हो चुके हैं। सरकार ने पहली किस्त के रूप में 60 लाख रुपये भी जारी कर दिए हैं। हालांकि मामला जमीन को लेकर फंसा हुआ है। मियागंज की संस्था जरी-जरदोजी सद्भाव फाउंडेशन जमीन का बैनामा नहीं करा सकी है। वैसे सीएफसी निर्माण के बाद जरी-जरदोजी कारीगरों को काफी सहूलियतें मिल सकेंगी। सेंटर में एक ही छत के नीचे कच्चा माल, ट्रेनिंग, मशीनरी कटिंग, पैकेजिंग, लैबलिंग, बारकोडिंग एवं मार्केटिंग की सुविधा उपलब्ध होगी। मौजूदा समय में कारीगरों को कच्चा माल समेत अन्य वस्तुओं के लिए उन्नाव, कानपुर या लखनऊ की दौड़ लगानी पड़ती है। जिससे समय पर काम पूरा नहीं हो पाता है। इसको देखते हुए ही मियागंज में नए सेंटर निर्माण का खाका तैयार किया गया है।
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वर्तमान समय में सदर, कुरसठ, बारीथाना, मियागंज, आसीवन, हैदराबाद, मोहान, हसनगंज, सफ ीपुर आदि स्थानों में लगभग 10 से 15000 कारीगर कई पीढ़ियों से जरी-जरदोजी (साड़ियों में कढ़ाई का कार्य) का काम करते आ रहे हैं। यहां पर बने जरी परिधानों की कानपुर, लखनऊ, दिल्ली, मुंबई, जयपुर, कोलकाता के साथ अरब देशों में भारी मांग है। वैसे मियागंज, हसनगंज, औरास समेत अन्य ब्लॉकों में जरी-जरदोजी का काम बड़े पैमाने पर होता है।
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वर्ष 2017 से शहर के सिविल लाइन में सीएफसी निर्माण का काम शुरू हुआ था। वर्तमान समय में 85 फीसदी काम पूरा हो चुका है। केंद्र सरकार ने 15 प्रतिशत काम पूरा कराने के लिए 15 लाख रुपये और जारी कर दिए हैं। डीएम ने जुलाई में इसका काम पूरा करने के निर्देश दिए हैं। 39 वर्ग मीटर में स्थापित होने वाले इस सेंटर में डिजाइनिंग, पैकिंग, फिनीशिंग और मार्केटिंग का प्रशिक्षण देने के साथ ही कारीगरों द्वारा तैयार किए गए परिधानों को ऑनलाइन बिक्री की भी सुविधा देने की व्यवस्था होगी। यही नहीं दुनिया के किसी भी देश से उनकी मांग या उनकी ओर से दिए गए डिजाइन के कपड़े तैयार कर ऑनलाइन ट्रांजक्शन और बिक्री भी की जाएगी।
मियागंज में सीएफसी निर्माण के लिए बजट जारी हो गया है। हालांकि संस्था अभी जमीन फाइनल नहीं कर सकी है। जिसके चलते निर्माण शुरू नहीं कराया जा सका है। उम्मीद है अगले माह काम शुरू हो जाएगा।
-रोचना श्रीवास्तव, सहायक उपायुक्त उद्योग।