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सीएचसी में सुविधा नहीं
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सीएचसी में बंद पड़ा ऑपरेशन थियेटर। संवाद
- फोटो : UNNAO
सफीपुर। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को सीएचसी का दर्जा मिले 17 साल बीत गए लेकिन व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ। न तो विशेषज्ञ डॉक्टर हैं और न ही मरीजों के लिए एक्सरे व अल्ट्रासाउंड की सुविधा है। इसके कारण मरीज प्राइवेट पैथोलॉजी से जांच करा रहे हैं।
तहसील क्षेत्र की 2.47 लाख आबादी के लिए 2005 में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को उच्चीकृत कर 30 बेड के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा दिया गया था। क्षेत्र के लोगों को उम्मीद थी कि अब स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा और उन्हें अच्छे डॉक्टर उपलब्ध होंगे। इसी उम्मीद में 17 साल गुजर गए। अच्छे डॉक्टर तो दूर मरीजों को दवाएं भी उपलब्ध नहीं हैं।
सीएचसी में हड्डी रोग विशेषज्ञ, सर्जन, रेडियोलॉजिस्ट, ईएनटी विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। सीएचसी में आठ डॉक्टरों में पांच ही काम कर रहे हैं। गर्भवतियों की जांच के लिए अल्ट्रासाउंड मशीन लगवाई गई थी लेकिन इसे चलाने वाला नहीं है। 2019 से मशीन बंद पड़ी है। सीएचसी की ओपीडी में रोजाना 110 मरीज आते हैं। एक माह में 70 से 80 मरीज जिला अस्पताल रेफर किए जाते हैं। कान में दर्द होने पर दी जाने वाली ड्रॉप, एंटी रैबीज इंजेक्शन व खांसी का सिरप नहीं है।
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सीएचसी अधीक्षक डॉ. राजेश कुमार वर्मा ने बताया कि डॉक्टरों की तैनाती के लिए कई बार सीएमओ को पत्र लिखा गया। लेकिन अब तक कोई हल नहीं निकला।
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तहसील क्षेत्र की 2.47 लाख आबादी के लिए 2005 में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को उच्चीकृत कर 30 बेड के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा दिया गया था। क्षेत्र के लोगों को उम्मीद थी कि अब स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा और उन्हें अच्छे डॉक्टर उपलब्ध होंगे। इसी उम्मीद में 17 साल गुजर गए। अच्छे डॉक्टर तो दूर मरीजों को दवाएं भी उपलब्ध नहीं हैं।
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सीएचसी में हड्डी रोग विशेषज्ञ, सर्जन, रेडियोलॉजिस्ट, ईएनटी विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। सीएचसी में आठ डॉक्टरों में पांच ही काम कर रहे हैं। गर्भवतियों की जांच के लिए अल्ट्रासाउंड मशीन लगवाई गई थी लेकिन इसे चलाने वाला नहीं है। 2019 से मशीन बंद पड़ी है। सीएचसी की ओपीडी में रोजाना 110 मरीज आते हैं। एक माह में 70 से 80 मरीज जिला अस्पताल रेफर किए जाते हैं। कान में दर्द होने पर दी जाने वाली ड्रॉप, एंटी रैबीज इंजेक्शन व खांसी का सिरप नहीं है।
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सीएचसी अधीक्षक डॉ. राजेश कुमार वर्मा ने बताया कि डॉक्टरों की तैनाती के लिए कई बार सीएमओ को पत्र लिखा गया। लेकिन अब तक कोई हल नहीं निकला।