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बहन के निकाह की मन्नत हुई पूरी, कराई कथा

Mon, 24 Feb 2020 12:51 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 24 Feb 2020 12:51 AM IST
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फीपुर के ओसिया गांव में कथा के समापन पर भंडारे में भक्तों को प्रसाद देते सलीमुद्दीन। - फोटो : UNNAO
सफ ीपुर। विकासखंड के गांव ओसिया निवासी सलीमुद्दीन ने मजहबी बंदिशों को तोड़ते हुए गांव के हिंदू मंदिर में बहन के निकाह की मन्नत मांगी थी। मन्नत पूरी हुई तो उन्होंने इसे भगवान का आशीर्वाद माना। इसके बाद उन्होंने मंदिर परिसर में कथा कराई। साथ ही भंडारे का आयोजन कर प्रसाद भी वितरित किया। उनकी हर तरफ खूब चर्चा हो रही है।
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सफीपुर के ओसिया गांव निवासी सलीमुद्दीन मुस्लिम हैं, लेकिन हिंदू धर्म के प्रति भी उनमें श्रद्धा है। फेरी लगाकर गांव-गांव चूड़ी बेचकर परिवार का पोषण करने वाले मुस्लिम समुदाय के सलीमुद्दीन तीन भाई हैं। उनके एक बहन नगीना है। काफी समय से वह बहन नगीना के निकाह के लिए परेशान थे। एक दिन गांव के ही जंगलेश्वर बाबा मंदिर से गुजरने के दौरान उन्होंने बहन की शादी के लिए मन्नत मांगी। कहा कि बहन का निकाह हो गया तो वह परिसर में कथा और भंडारा करेंगे। सलीमुद्दीन के अनुसार कुछ समय बाद उनकी बहन का निकाह हो गया। इस पर उन्होंने भगवान का आशीर्वाद मानकर कथा कराने की सोची। कथावाचक कृष्ण कुमार शुक्ला से मंदिर परिसर में रामनामी ओढ़कर कथा सुनी। इसके बाद वहीं पर भंडारे का आयोजन कर लोगों को प्रसाद वितरित किया।
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धार्मिक कार्यक्रमों में भी भाग लेते हैं
सलीमुद्दीन की मंदिर पर आस्था पूर्व से ही है। मंदिर में होने वाले धार्मिक कार्यक्रमों में भी वह बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं। संगीतमय कथा में मंजीरा बजाकर सुर देने का कार्य भी करते हैं। सलीमुद्दीन के भाई निजामुद्दीन और असलम को उनकी गतिविधियों से कोई एतराज नहीं है।
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नाम बदल जाने से ईश्वर नहीं बदल जाता
इस्लाम धर्म को मानने वाले सलीमुद्दीन का कहना है कि हम नमाज पढ़ते हैं। अल्लाह की इबादत करते हैं। नाम बदल जाने से ईश्वर बदल नहीं जाता। उसको दिल से याद करना हमारी जिम्मेदारी है। उनका कहना है कि मस्जिद में अल्लाह तो मंदिर में भी ईश्वर हैं। अल्लाह व ईश्वर में कोई अंतर नहीं माना जा सकता। बस हम उस पर विश्वास करें और बिना किसी भेदभाव के उसका सम्मान करें।
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