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Unnao News: उफनाई कल्याणी से 400 बीघा फसल जलमग्न, सड़ने के कगार पर पहुंची
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छोट्टापुरवा में भरे बाढ़ के पानी से निकलते बच्चे। संवाद
गंजमुरादाबाद। करीब 10 दिनों से उफनाई कल्याणी नदी के बाढ़ का दायरा बढ़ता जा रहा है। बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं। करीब 400 बीघा फसलें जलमग्न हो गई हैं। किसान तहसील प्रशासन से बर्बाद फसलों का सर्वे करने की मांग कर रहे हैं।
कल्याणी नदी 10 दिन से उफान पर है। इससे गंजमुरादाबाद विकासखंड के बेहटाकच्छ, शिवलालपुरवा, कुशराजपुर, भिलोई, बाजीपुरवा, इच्छापुरवा, लोनारी, देवरिया, कछियनपुरवा, पकरियापुरवा, तकिया, छोट्टापुरवा, लहरापुर, चिंगरपुरवा और ककरियापुरवा सहित 19 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। करीब 400 बीघा में बोई धान, मक्का, ज्वार, बाजरा और हरी सब्जियां जलमग्न होकर सड़ने की कगार पर हैं। हैंडपंप जलमग्न हो जाने से ग्रामीणों के सामने पीने के पानी का संकट है।
लोनारी, कुशराजपुर और छोट्टापुरवा के स्कूल जलमग्न होने से कक्षाएं सुरक्षित स्थानों पर लगाई जा रही हैं। बाढ़ के कारण बेहटाकच्छ से रामपुर मार्ग के बंद हो जाने से हरदोई जिले से संपर्क टूट गया है। इसके अलावा देवरिया से कछियनपुरवा, लहरापुर से चिंगरपुरवा और लहरापुर से ककरियापुरवा मार्ग पर आवागमन बंद है। इन गांवों के किनारे बाढ़ के साथ भारी पैमाने में जलकुंभी आ गई है, जो बच्चों और मवेशियों के लिए खतरनाक साबित हो सकती हैं।
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इंसेट-1
घुटनों तक भरा बाढ़ प्रभावित गांवों में पानी
बाढ़ प्रभावित गांवों में घुटनों तक पानी भरा है। इससे ग्रामीणों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया है। तहसीलदार अखिलेश कुमार मौर्य के निर्देश के बाद भी बुधवार को लेखपाल और काननूगो बाढ़ प्रभावित फसलों का सर्वे करने नहीं पहुंचे। किसान तहसील प्रशासन से जल्द सर्वे करने की मांग कर रहे हैं। एसडीएम बृजमोहन शुक्ला ने बताया कि बाढ़ से फसलें जलमग्न हैं। जन जीवन पर भी बाढ़ का असर दिखाई देने लगा है। हालात चिंताजनक लेकिन नियंत्रण में हैं। जल्द ही सर्वे कर रिपोर्ट के आधार पर मुआवजे की कार्रवाई की जाएगी।
इंसेट-2
बाढ़ के पानी में पकड़ रहे मछली
आपदा में भी लोग अवसर ढूंढ लेते हैं। बाढ़ प्रभावित गांवों के लोग भरे बाढ़ के पानी में मछली पकड़ने की होड़ लगाए हुए हैं। सड़कों के किनारे पुलियों में जाल डालकर सैकड़ों लोग मछली पकड़ कर बाजारों और बस्तियों में बेचकर कमाई कर रहे हैं।
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कल्याणी नदी 10 दिन से उफान पर है। इससे गंजमुरादाबाद विकासखंड के बेहटाकच्छ, शिवलालपुरवा, कुशराजपुर, भिलोई, बाजीपुरवा, इच्छापुरवा, लोनारी, देवरिया, कछियनपुरवा, पकरियापुरवा, तकिया, छोट्टापुरवा, लहरापुर, चिंगरपुरवा और ककरियापुरवा सहित 19 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। करीब 400 बीघा में बोई धान, मक्का, ज्वार, बाजरा और हरी सब्जियां जलमग्न होकर सड़ने की कगार पर हैं। हैंडपंप जलमग्न हो जाने से ग्रामीणों के सामने पीने के पानी का संकट है।
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लोनारी, कुशराजपुर और छोट्टापुरवा के स्कूल जलमग्न होने से कक्षाएं सुरक्षित स्थानों पर लगाई जा रही हैं। बाढ़ के कारण बेहटाकच्छ से रामपुर मार्ग के बंद हो जाने से हरदोई जिले से संपर्क टूट गया है। इसके अलावा देवरिया से कछियनपुरवा, लहरापुर से चिंगरपुरवा और लहरापुर से ककरियापुरवा मार्ग पर आवागमन बंद है। इन गांवों के किनारे बाढ़ के साथ भारी पैमाने में जलकुंभी आ गई है, जो बच्चों और मवेशियों के लिए खतरनाक साबित हो सकती हैं।
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घुटनों तक भरा बाढ़ प्रभावित गांवों में पानी
बाढ़ प्रभावित गांवों में घुटनों तक पानी भरा है। इससे ग्रामीणों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया है। तहसीलदार अखिलेश कुमार मौर्य के निर्देश के बाद भी बुधवार को लेखपाल और काननूगो बाढ़ प्रभावित फसलों का सर्वे करने नहीं पहुंचे। किसान तहसील प्रशासन से जल्द सर्वे करने की मांग कर रहे हैं। एसडीएम बृजमोहन शुक्ला ने बताया कि बाढ़ से फसलें जलमग्न हैं। जन जीवन पर भी बाढ़ का असर दिखाई देने लगा है। हालात चिंताजनक लेकिन नियंत्रण में हैं। जल्द ही सर्वे कर रिपोर्ट के आधार पर मुआवजे की कार्रवाई की जाएगी।
इंसेट-2
बाढ़ के पानी में पकड़ रहे मछली
आपदा में भी लोग अवसर ढूंढ लेते हैं। बाढ़ प्रभावित गांवों के लोग भरे बाढ़ के पानी में मछली पकड़ने की होड़ लगाए हुए हैं। सड़कों के किनारे पुलियों में जाल डालकर सैकड़ों लोग मछली पकड़ कर बाजारों और बस्तियों में बेचकर कमाई कर रहे हैं।

छोट्टापुरवा में भरे बाढ़ के पानी से निकलते बच्चे। संवाद