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गांवों में स्वच्छता की हकीकत परखेगा नार्स
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उन्नाव। जिले में स्वच्छता के तहत मिले धन की हकीकत परखने की तैयारी केंद्र सरकार ने ही है। इसके लिए बाकायदा एक संस्था नेशनल एनुअल रुरल सैनिटेशन सर्वे (नार्स) को नामित किया है। नार्स संस्था जनपद को स्वच्छ रखने के लिए मिले बजट का सत्यापन करेगी। गांवों में बनाए गए शौचालयों समेत साफ-सफाई आदि बिंदुओं पर संस्था सर्वे करेगी।
केंद्र सरकार ने स्वच्छता के लिए स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण, शहरी) योजना चला रखी है। इसके जरिए जिलों में शौचालय निर्माण कराया जाता है। जनपद में ही अकेले 2 लाख से अधिक शौचालय बनाए जा चुके हैं। 12 हजार रुपये प्रत्येक शौचालय की दर से भुगतान किया गया है। इस हिसाब से अरबों रुपये जनपद को मिल चुके हैं। इसके बाद भी स्वच्छता पर प्रशभनचिन्ह उठते रहे हैं। कई जगहों पर शौचालय व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है। लोग आज भी खुले में ही शौच जाकर वातावरण को प्रदूषित कर रहे हैं। अब स्वच्छता आदि के लिए दी गई धनराशि का कितना सदुपयोग हुआ है, इसकी हकीकत परखने के लिए नार्स संस्था को लगाया गया है। संस्था स्वच्छ भारत मिशन में कराए गए कामों का सर्वेक्षण करेगी। सर्वे टीम मुख्य रूप से यह देखेगी कि जिन परिवारों को शौचालय का लाभ दिया गया है वह लोग उसका शत-प्रतिशत प्रयोग कर रहे हैं। परिवारों के प्रत्येक सदस्यों के लिए इज्जत घर की सुलभता हो गई है या नहीं। आंगनबाड़ी केंद्र और विद्यालयों में बालक एवं बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय है। पंचायत भवन एवं अन्य सार्वजनिक भवनों में सामुदायिक शौचालय की व्यवस्था है। ऐसे परिवार जो बेसलाइन सर्वे वर्ष 2012 में छूट गए थे उनके पास व्यक्तिगत इज्जत घर की सुविधा है या नहीं। गांवों में कहीं खुले में शौच तो नहीं किया जा रहा है। सार्वजनिक स्थानों पर जलजमाव एवं कूड़ा करकट एकत्र तो नहीं है।
यह भी देखेगी संस्था
संस्था यह भी देखेगी कि प्रदेश के अन्य जिलों की अपेक्षा जनपद साफ है या नहीं। जिले के गांवों का हाल क्या है। गांवों में घर-घर शौचालय है या नहीं। यदि लोग खुले में शौचा जा रहे हैं तो उनको दिए गए शौचालयों की क्या स्थिति है।
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केंद्र सरकार ने स्वच्छता के लिए स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण, शहरी) योजना चला रखी है। इसके जरिए जिलों में शौचालय निर्माण कराया जाता है। जनपद में ही अकेले 2 लाख से अधिक शौचालय बनाए जा चुके हैं। 12 हजार रुपये प्रत्येक शौचालय की दर से भुगतान किया गया है। इस हिसाब से अरबों रुपये जनपद को मिल चुके हैं। इसके बाद भी स्वच्छता पर प्रशभनचिन्ह उठते रहे हैं। कई जगहों पर शौचालय व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है। लोग आज भी खुले में ही शौच जाकर वातावरण को प्रदूषित कर रहे हैं। अब स्वच्छता आदि के लिए दी गई धनराशि का कितना सदुपयोग हुआ है, इसकी हकीकत परखने के लिए नार्स संस्था को लगाया गया है। संस्था स्वच्छ भारत मिशन में कराए गए कामों का सर्वेक्षण करेगी। सर्वे टीम मुख्य रूप से यह देखेगी कि जिन परिवारों को शौचालय का लाभ दिया गया है वह लोग उसका शत-प्रतिशत प्रयोग कर रहे हैं। परिवारों के प्रत्येक सदस्यों के लिए इज्जत घर की सुलभता हो गई है या नहीं। आंगनबाड़ी केंद्र और विद्यालयों में बालक एवं बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय है। पंचायत भवन एवं अन्य सार्वजनिक भवनों में सामुदायिक शौचालय की व्यवस्था है। ऐसे परिवार जो बेसलाइन सर्वे वर्ष 2012 में छूट गए थे उनके पास व्यक्तिगत इज्जत घर की सुविधा है या नहीं। गांवों में कहीं खुले में शौच तो नहीं किया जा रहा है। सार्वजनिक स्थानों पर जलजमाव एवं कूड़ा करकट एकत्र तो नहीं है।
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यह भी देखेगी संस्था
संस्था यह भी देखेगी कि प्रदेश के अन्य जिलों की अपेक्षा जनपद साफ है या नहीं। जिले के गांवों का हाल क्या है। गांवों में घर-घर शौचालय है या नहीं। यदि लोग खुले में शौचा जा रहे हैं तो उनको दिए गए शौचालयों की क्या स्थिति है।
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