फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Unnao News ›   mothers day

जिगर के टुकड़े पर सब न्योछावर करती ‘मां’

Sun, 10 May 2015 12:47 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, उन्नाव
ब्यूरो/अमर उजाला, उन्नाव Updated Sun, 10 May 2015 12:47 AM IST
विज्ञापन
mothers day
उन्नाव। मां अपने आप में इतना पवित्र शब्द है कि कान में पड़ते ही हर व्यक्ति का सिर सम्मान में झुक जाता है। मां का ऋण कोई नहीं उतार सकता है। नौ माह कोख में रखती है। इस दौरान दर्द, परेशानी सभी झेलती है। अपने बच्चों के सुख की खातिर रात-रात भर जागती है। खुद गीले में लेटती है लेकिन अपने जिगर के टुकड़े को सूखे में सुलाती है। यह केवल एक मां ही कर सकती है। इसलिए इस दुनिया में मां का उपकार कोई भी नहीं उतार सकता है। आज मातृ दिवस है। मां के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन। ये ऐसी माताएं हैं जिन्होंने अपने बच्चों के लिए त्याग की मिसाल पेश की।
विज्ञापन


बेटी को बचाने के लिए मां ने दी किडनी

आज के समय में जहां एक ओर बच्चे मां-बाप को बोझ समझने लगे हैं। वहीं दूसरी ओर मां आज भी अपने बच्चों की सलामती के लिए खुद की जान की परवाह नहीं करती है। ऐसे ही एक मां है शुक्लागंज मिश्रा कालोनी की रहने वाली सरला शुक्ला। पिछले दिनों उनकी बेटी आकांक्षा शुक्ला की दोनों किडनी फेल हो गई थीं। डॉक्टरों को दिखाया तो उन्होंने किडनी ट्रांसप्लांट की बात कही। अपनी एक किडनी मां देने को तैयार हो गई। आकांक्षा का अहमदाबाद में इलाज चल रहा है। संभवता: इसी महीने किडनी ट्रांसप्लांट हो सकती है। कमला शुक्ला कहती हैं कि बच्चों से बढ़कर उनके लिए इस संसार में कुछ भी नहीं है। बच्चे सलामत रहे और खुश रहे फिर चाहें इसके लिए उन्हें कोई भी त्याग क्यों न करना पड़े। उनका कहना है कि बेटी ठीकठाक होकर घर आ जाए उनके लिए इससे बड़ी खुशी कुछ नहीं होगी। कमला के इस त्याग को अमर उजाला नमन करता है।
विज्ञापन


बच्चे के इलाज के लिए सब कुछ बेच दिया
बांगरमऊ के भुड्डा गांव निवासी हेमाना के पति हर नारायण राजपूत की काफी पहले मौत हो गई थी। हेमाना के तीन लड़के हैं। सबसे बड़े पुत्र दिनेश राजपूत (18) पर ही घर की सारी जिम्मेदारी थी। 2 जुलाई 14 को दुर्घटना में दिनेश की कमर व पैरों की हड्डी टूट गई। बेटे के इलाज में हेमाना की खेती बिक गई। बर्तन, जानवर, बैल सभी इलाज के लिए बिक गए। बेटे के इलाज के लिए जनप्रतिनिधिओं, अफसरों व समाजसेवियों की चौखट पर गई। आखिर में महाबौधि चैरिटेबिल ट्रस्ट के रामनाथ कनौजिया का उसे साथ मिला। उनकी सहायता से मुख्यमंत्री राहत कोष से 2 लाख की सहायता मिली। डीएम ने भी अपने वेतन से 5 हजार रुपये की मदद की। ईश्वर भी दयालु हुआ तब कहीं जाकर दिनेश का इलाज नई दिल्ली स्थित एम्स में शुरू हो पाया। हेमाना का कहना है कि बेटे के इलाज के लिए चाहे जहां भी मदद मांगनी पड़े जो भी काम करना करना पड़े वह पीछे नहीं हटेंगी। बेटे को ठीक कराकर ही दम लूंगी।
विज्ञापन
विज्ञापन


दोहरी जिम्मेदारी निभा रही हैं डीएम
जिले की मुखिया सौम्या अग्रवाल दोहरी जिम्मेदारी निभा रही हैं। एक ओर पूरे जनपद के विकास व निर्माण कार्यों पर डीएम पैनी नजर रखती हैं तो दूसरी ओर मां का भी दायित्व पूरी लगन के साथ निभाती हैं। उनका कहना है कि उनको बड़ा अफसर बनाना मां निहारिका अग्रवाल का सपना था। रात-रात भर उनके साथ जागती थीं। इस दौरान पिता ज्ञानचन्द्र अग्रवाल ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी। मां-बाप के ऋण से कोई उऋण नहीं हो सकता है। इसमें मां का स्थान तो पिता से भी ऊंचा है। सौम्या खुद ढाई साल के बेटे आदित्य की मां हैं। एक साथ दो बड़ी जिम्मेदारी कैसे उठाती हैं इस सवाल का हंसकर जवाब देती हैं कि दुगुना काम करना पड़ता है। एक ओर मां का रोल तो दूसरी ओर प्रशासनिक अफसर की जिम्मेदारी है। पुरुषों की अपेक्षा महिला अधिकारियों को ज्यादा काम करना पड़ता है। दिनभर का काम निपटाकर जब शाम को घर पहुंचती हूं तो बेटे का चेहरा देखते ही सारी थकावट दूर हो जाती है।


मां ने कभी घर का काम नहीं करने दिया
सीडीओ संदीप कौर आज जिस मुकाम पर है इसकी सफलता का श्रेय वह मां अमरजीत कौर देती हैं। संदीप कौर ने कहा कि मुझे आईएएस देखने के लिए मां ने बड़ा त्याग किया। मुझे घर का कोई काम नहीं करने देती थीं। जब वह आईएएस बनी तो सबसे ज्यादा खुशी मां को ही हुई। आज संदीप कौर खुद एक वर्षीय बेटे निहाल की मां हैं। वह कहती हैं कि मां अपने बच्चे के लिए कितने कष्ट सहती है इसका उन्हें तब पता चला जब वह खुद एक बच्चे की मां बनी। एक प्रशासनिक अफसर होने के नाते उन्हें पारिवारिक व सामाजिक दोनों तरह की जिम्मेदारी उठानी पड़ रही हैं। मूलरूप से पंजाब की रहने वाली संदीप कौर कहती हैं कि बेटा अभी एक साल का ही है। सुबह 9 बजे घर छोड़ना पड़ता है। दिनभर आफिस का काम निपटाना पड़ता है। शाम को ही बच्चे से मिलना हो पाता है। कई घंटे बच्चे से दूर रहना कष्ट तो देता है लेकिन फुर्सत मिलते से फोन पर बात कर लेती हूं। संदीप कौर कहती हैं कि मां को प्यार करो क्योंकि धरती पर मां से ज्यादा हितैषी व प्रेम करने वाली और कोई नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed