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मीटर के नाम पर वसूली का खेल
ब्यूरो/अमर उजाला, उन्नाव
Updated Fri, 27 Mar 2015 11:51 PM IST
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उन्नाव। जिले के ग्रामीण और शहरी इलाकों में घरों में मीटर लगवाने और सीलिंग सर्टिफिकेट देने के नाम पर भी वसूली की जा रही है। मीटर लगाने और सीलिंग सर्टिफिकेट देने पहुंचने वाले लोग विभागीय फीस बताकर 500 रुपये तक वसूल रहे हैं।
जो पैसा नहीं देता है उसके घर न तो मीटर लगाया जाता है और ना ही सीलिंग दी जाती है। जिले के ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में यह गोरखधंधा चल रहा है, लेकिन विभागीय अधिकारी अवैध वसूली करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।
नए कनेक्शन की रसीद कटने के बाद घरों, दुकानों व फैक्ट्रियों में मीटर लगाया जाता है। मीटर लगाने का काम प्राइवेट कर्मियों के जिम्मे होता है। इसका फायदा उठाकर यह प्राइवेट कर्मी उपभोक्ताओं से मीटर लगाने के नाम पर अवैध वसूली कर रहे हैं।
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नया मीटर लगाने के बाद तीन सौ रुपये और सीलिंग सर्टिफिकेट देने पर प्रति उपभोक्ता से दो सौ रुपये वसूल रहे हैं। प्राइवेट कर्मी इसे सरकारी फीस बताते हैं। जब उपभोक्ता इसकी रसीद मांगते हैं तो दूसरे दिन आकर देने की बात कहकर निकल जाते हैं। यदि कोई उपभोक्ता पैसा देने से मना कर देता है तो न तो उसके घर में मीटर लग पाता है और ना ही उसे सीलिंग सर्टिफिकेट दी जाती है।
विभागीय कर्मचारियों से तगड़ी सेटिंग होने के कारण यह लोग उपभोक्ताओं का कनेक्शन भी कटवा देते हैं। जिससे लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
कनेक्शन और रीडिंग के नाम पर भी होती है वसूली
उन्नाव। बिजली कनेक्शन से लेकर रीडिंग कम-ज्यादा करने के नाम पर भी अवैध वसूली की जाती है। एक किलोवाट के कनेक्शन के लिए 3 हजार से 35 सौ रुपये तक वसूले जा रहे हैं जबकि रसीद दो हजार रुपये से भी कम की कटती है। बिजली कर्मचारियों व फ्रेंचाइजी की सांठगांठ से वसूली का धंधा जोरों के साथ चल रहा है।
वर्जन
मीटर लगवाने और सीलिंग सर्टिफिकेट के लिए कोई शुल्क नहीं पड़ता है। यदि कोई इसके लिए वसूली करता है तो उपभोक्ता ऐसे कर्मियों को पकड़कर उनके नंबर पर सूचना देें। अवैध वसूली करने वाले ऐसे लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। - राम बुझारत, अधिशाषी अभियंता विद्युत वितरण खंड प्रथम।
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जो पैसा नहीं देता है उसके घर न तो मीटर लगाया जाता है और ना ही सीलिंग दी जाती है। जिले के ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में यह गोरखधंधा चल रहा है, लेकिन विभागीय अधिकारी अवैध वसूली करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।
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नए कनेक्शन की रसीद कटने के बाद घरों, दुकानों व फैक्ट्रियों में मीटर लगाया जाता है। मीटर लगाने का काम प्राइवेट कर्मियों के जिम्मे होता है। इसका फायदा उठाकर यह प्राइवेट कर्मी उपभोक्ताओं से मीटर लगाने के नाम पर अवैध वसूली कर रहे हैं।
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नया मीटर लगाने के बाद तीन सौ रुपये और सीलिंग सर्टिफिकेट देने पर प्रति उपभोक्ता से दो सौ रुपये वसूल रहे हैं। प्राइवेट कर्मी इसे सरकारी फीस बताते हैं। जब उपभोक्ता इसकी रसीद मांगते हैं तो दूसरे दिन आकर देने की बात कहकर निकल जाते हैं। यदि कोई उपभोक्ता पैसा देने से मना कर देता है तो न तो उसके घर में मीटर लग पाता है और ना ही उसे सीलिंग सर्टिफिकेट दी जाती है।
विभागीय कर्मचारियों से तगड़ी सेटिंग होने के कारण यह लोग उपभोक्ताओं का कनेक्शन भी कटवा देते हैं। जिससे लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
कनेक्शन और रीडिंग के नाम पर भी होती है वसूली
उन्नाव। बिजली कनेक्शन से लेकर रीडिंग कम-ज्यादा करने के नाम पर भी अवैध वसूली की जाती है। एक किलोवाट के कनेक्शन के लिए 3 हजार से 35 सौ रुपये तक वसूले जा रहे हैं जबकि रसीद दो हजार रुपये से भी कम की कटती है। बिजली कर्मचारियों व फ्रेंचाइजी की सांठगांठ से वसूली का धंधा जोरों के साथ चल रहा है।
वर्जन
मीटर लगवाने और सीलिंग सर्टिफिकेट के लिए कोई शुल्क नहीं पड़ता है। यदि कोई इसके लिए वसूली करता है तो उपभोक्ता ऐसे कर्मियों को पकड़कर उनके नंबर पर सूचना देें। अवैध वसूली करने वाले ऐसे लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। - राम बुझारत, अधिशाषी अभियंता विद्युत वितरण खंड प्रथम।