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Unnao News: जिला अस्पताल में लिवर और किडनी की जांच ठप
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उन्नाव। जिला अस्पताल की पैथोलॉजी में लगी सेलेक्ट्रा मशीन में सोमवार सुबह अचानक तकनीकी खराब आ गई थी। इससे जांच बंद हो गई। इससे किडनी, लिवर और लिपिड प्रोफाइल (खून में कोलेस्ट्रॉल की जांच) के लिए सैंपल देने पहुंचे मरीजों को स्वास्थ्य कर्मियों ने अगले दिन आने की बात कही।
जिला अस्पताल की ओपीडी में इस समय रोजाना औसतन 1500 मरीज पहुंच रहे हैं। इसमें 200 से अधिक पेट संबंधित बीमारियों से पीड़ित होते हैं। ऐसे मरीजों को डॉक्टर केएफटी (किडनी फंक्शन टेस्ट ) और एलएफटी (लिवर फंक्शन टेस्ट ) की जांच लिख रहे हैं। सोमवार सुबह अचानक मशीन में तकनीकी खराबी आ गई और जांच बंद हो गई। ओपीडी में डॉक्टर को दिखाने के बाद जांच के लिए पहुंचे 78 मरीजों के सैंपल नहीं लिए गए। स्वास्थ्य कर्मियों ने उन्हें अगले दिन आकर देखने की बात कही। इससे मरीजों को मायूस होकर लौटना पड़ा। वही गंभीर मरीजों ने निजी पैथोलॉजी में जांच कराई।
मरीजों की बात
कोरारी कला के अनिल ने बताया कि बेटे अंश को कई दिन से बुखार और पेट में दर्द हो रहा है। सोमवार को डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने खून की जांच कराने की सलाह दी। इसके बाद पैथोलॉजी में एक जांच के लिए सैंपल ले लिया गया है। वहीं अन्य जांच के लिए स्वास्थ्य कर्मियों ने अगले दिन आने की बात कही।
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अजाद नगर के गोकुल प्रसाद ने बताया कि 20 दिन से बुखार आ रहा है। जिला अस्पताल में डॉक्टर ने खून की जांच लिखी है। पैथोलॉजी में केवल सीबीसी और मलेरिया जांच के लिए सैंपल लिया गया है। लिवर की जांच नहीं हो पाई है। पैथोलॉजी में तैनात स्वास्थ्य कर्मियों ने अगले दिन फिर दोबारा बुलाया है।
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बोले जिम्मेदार
मशीन की मरम्मत के लिए इंजीनियर के सूचना दे दी गई। उम्मीद है मंगलवार से सेलेक्ट्रा मशीन का संचालन शुरू हो जाएगा।
- डॉ. आरए मिर्जा, सीएमएस
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छह घंटे में जिला अस्पताल पहुंचे 2471 मरीज
उन्नाव। मौसम में बदलाव से डायरिया, बुखार, पेट दर्द के मरीज बढ़े हैं। सोमवार को जिला अस्पताल में सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक 2471 मरीज पहुंचे। इससे ओपीडी गैलरी में भी खचाखच भीड़ रही। मरीजों को पैर रखने की भी जगह नहीं मिली। मरीजों की संख्या अधिक होने से लोगों को घंटों कतार में लगना पड़ा। फिजीशियन डॉ. अमित तिवारी ने बताया कि ज्यादातर मरीज संक्रामक रोगों से पीड़ित मरीज पहुंच रहे हैं। सभी को दवा और रोगों से बचाव की सलाह दी गई। वहीं, पर्चा काउंटर पर सोमवार नौ बजे के बाद महिला और पुरुष दो लंबी-लंबी कतार लग गई। इसी बीच पहले पंजीकरण कराने की होड़ में मरीजों में धक्का-मुक्की होने लगी। मामला बढ़ता देखा स्वास्थ्यकर्मियों ने मरीजों को समझाया। इसके बाद दोबारा पर्चा बनना शुरू हुए। (संवाद)
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जिला अस्पताल की ओपीडी में इस समय रोजाना औसतन 1500 मरीज पहुंच रहे हैं। इसमें 200 से अधिक पेट संबंधित बीमारियों से पीड़ित होते हैं। ऐसे मरीजों को डॉक्टर केएफटी (किडनी फंक्शन टेस्ट ) और एलएफटी (लिवर फंक्शन टेस्ट ) की जांच लिख रहे हैं। सोमवार सुबह अचानक मशीन में तकनीकी खराबी आ गई और जांच बंद हो गई। ओपीडी में डॉक्टर को दिखाने के बाद जांच के लिए पहुंचे 78 मरीजों के सैंपल नहीं लिए गए। स्वास्थ्य कर्मियों ने उन्हें अगले दिन आकर देखने की बात कही। इससे मरीजों को मायूस होकर लौटना पड़ा। वही गंभीर मरीजों ने निजी पैथोलॉजी में जांच कराई।
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मरीजों की बात
कोरारी कला के अनिल ने बताया कि बेटे अंश को कई दिन से बुखार और पेट में दर्द हो रहा है। सोमवार को डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने खून की जांच कराने की सलाह दी। इसके बाद पैथोलॉजी में एक जांच के लिए सैंपल ले लिया गया है। वहीं अन्य जांच के लिए स्वास्थ्य कर्मियों ने अगले दिन आने की बात कही।
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अजाद नगर के गोकुल प्रसाद ने बताया कि 20 दिन से बुखार आ रहा है। जिला अस्पताल में डॉक्टर ने खून की जांच लिखी है। पैथोलॉजी में केवल सीबीसी और मलेरिया जांच के लिए सैंपल लिया गया है। लिवर की जांच नहीं हो पाई है। पैथोलॉजी में तैनात स्वास्थ्य कर्मियों ने अगले दिन फिर दोबारा बुलाया है।
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बोले जिम्मेदार
मशीन की मरम्मत के लिए इंजीनियर के सूचना दे दी गई। उम्मीद है मंगलवार से सेलेक्ट्रा मशीन का संचालन शुरू हो जाएगा।
- डॉ. आरए मिर्जा, सीएमएस
छह घंटे में जिला अस्पताल पहुंचे 2471 मरीज
उन्नाव। मौसम में बदलाव से डायरिया, बुखार, पेट दर्द के मरीज बढ़े हैं। सोमवार को जिला अस्पताल में सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक 2471 मरीज पहुंचे। इससे ओपीडी गैलरी में भी खचाखच भीड़ रही। मरीजों को पैर रखने की भी जगह नहीं मिली। मरीजों की संख्या अधिक होने से लोगों को घंटों कतार में लगना पड़ा। फिजीशियन डॉ. अमित तिवारी ने बताया कि ज्यादातर मरीज संक्रामक रोगों से पीड़ित मरीज पहुंच रहे हैं। सभी को दवा और रोगों से बचाव की सलाह दी गई। वहीं, पर्चा काउंटर पर सोमवार नौ बजे के बाद महिला और पुरुष दो लंबी-लंबी कतार लग गई। इसी बीच पहले पंजीकरण कराने की होड़ में मरीजों में धक्का-मुक्की होने लगी। मामला बढ़ता देखा स्वास्थ्यकर्मियों ने मरीजों को समझाया। इसके बाद दोबारा पर्चा बनना शुरू हुए। (संवाद)