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Unnao News: कलमा, नमाज, रोजा, जकात और हज इस्लाम की बुनियाद
Sat, 30 Mar 2024 12:27 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उन्नाव
संवाद न्यूज एजेंसी, उन्नाव
Updated Sat, 30 Mar 2024 12:27 AM IST
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फोटो-16
- रमजान माह के तीसरे जुमे पर हाफिज तौसीफ रजा ने जकात के मसले बयान किए
संवाद न्यूज एजेंसी
उन्नाव। माहे रमजान के तीसरे जुमे पर मदीना मस्जिद में हाफिज तौसीफ रजा ने जकात के मसले बयान किए। उन्होंने अपनी आय से होने वाली बचत पर जकात के इस्लाम में फर्ज किए जाने की जानकारी दी।
रोजेदारों को खिताब करते हुए बताया कि इस्लाम की बुनियाद पांच चीजों पर है। कलमा, नमाज, रोजा, जकात और हज। कुरान में भी अल्लाह ने कई जगह हुक्म दिया है कि नमाज कायम करो और जकात अदा करो। जिसके पास साढ़े सात तोला सोना या साढ़े बावन तोला चांदी हो, इसके बराबर कीमत की संपत्ति और रुपया होने पर उसे साहिबे निसाब माना जाता है।
हर साहिबे निसाब मुसलमान को अपनी कुल बचत का जिसपर एक साल पूरा गुजर गया हो, ढाई फीसदी के हिसाब से जकात निकालना ही फर्ज है। बताया कि जिस तरह जिस्म धोने से साफ हो जाता है वैसे ही जकात देने से संपत्ति और रकम भी पाक साफ हो जाती है। जकात गरीब, यतीम बेवाओं का हक है। बताया कि मुसलमान को जकात अदा करने में देरी नहीं करनी चाहिए।
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इंसेट
रमजान के शेष बचे वक्त में न हो कोई लापरवाही
सफीपुर। रमजान माह के तीसरे जुमे की नमाज के मौके पर रोजेदारों को संबोधित कर मौलाना इफ्तिखार हुसैन रिजवी ने कहा कि जो वक्त बचा है, उसमें कोई लापरवाही न होने पाए। मोहल्ला सैय्यदवाड़ा मस्जिद पर जुमे की नमाज में मौजूद रोजेदारों से मौलाना ने कहा कि 18 रोजे खत्म हो रहे हैं। इन दिनों की इबादतों के कुबूल होने की दुआ करें। बहुत खुशी की बात है कि लोग 18 दिनों की इबादतों को अंजाम देकर सवाब के हकदार हुए। मौलाना ने सभी रोजेदारों को नेक अमल अंजाम देते रहने की ताकीद के साथ अमन चैन व सभी के सुकून की दुआ कराई।
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- रमजान माह के तीसरे जुमे पर हाफिज तौसीफ रजा ने जकात के मसले बयान किए
संवाद न्यूज एजेंसी
उन्नाव। माहे रमजान के तीसरे जुमे पर मदीना मस्जिद में हाफिज तौसीफ रजा ने जकात के मसले बयान किए। उन्होंने अपनी आय से होने वाली बचत पर जकात के इस्लाम में फर्ज किए जाने की जानकारी दी।
रोजेदारों को खिताब करते हुए बताया कि इस्लाम की बुनियाद पांच चीजों पर है। कलमा, नमाज, रोजा, जकात और हज। कुरान में भी अल्लाह ने कई जगह हुक्म दिया है कि नमाज कायम करो और जकात अदा करो। जिसके पास साढ़े सात तोला सोना या साढ़े बावन तोला चांदी हो, इसके बराबर कीमत की संपत्ति और रुपया होने पर उसे साहिबे निसाब माना जाता है।
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हर साहिबे निसाब मुसलमान को अपनी कुल बचत का जिसपर एक साल पूरा गुजर गया हो, ढाई फीसदी के हिसाब से जकात निकालना ही फर्ज है। बताया कि जिस तरह जिस्म धोने से साफ हो जाता है वैसे ही जकात देने से संपत्ति और रकम भी पाक साफ हो जाती है। जकात गरीब, यतीम बेवाओं का हक है। बताया कि मुसलमान को जकात अदा करने में देरी नहीं करनी चाहिए।
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रमजान के शेष बचे वक्त में न हो कोई लापरवाही
सफीपुर। रमजान माह के तीसरे जुमे की नमाज के मौके पर रोजेदारों को संबोधित कर मौलाना इफ्तिखार हुसैन रिजवी ने कहा कि जो वक्त बचा है, उसमें कोई लापरवाही न होने पाए। मोहल्ला सैय्यदवाड़ा मस्जिद पर जुमे की नमाज में मौजूद रोजेदारों से मौलाना ने कहा कि 18 रोजे खत्म हो रहे हैं। इन दिनों की इबादतों के कुबूल होने की दुआ करें। बहुत खुशी की बात है कि लोग 18 दिनों की इबादतों को अंजाम देकर सवाब के हकदार हुए। मौलाना ने सभी रोजेदारों को नेक अमल अंजाम देते रहने की ताकीद के साथ अमन चैन व सभी के सुकून की दुआ कराई।