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उन्नाव में 51 हजार बच्चे लड़ रहे कुपोषण से ‘जंग’
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आंगनबड़ी केंद्र में नवजात बच्चे की तौल करतीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता।
- फोटो : UNNAO
उन्नाव। जनपद में 51 हजार बच्चे कुपोषण से जंग लड़ रहे हैं। इनमें कुपोषित बच्चों की संख्या 46 हजार से अधिक और अतिकुपोषित 58 सौ से अधिक हैं। जिला प्रशासन इन बच्चों को कुपोषण श्रेणी से बाहर लाने की कवायद में जुटा हुआ है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने पूरे जिले में 0 से 5 साल तक के 280357 बच्चों का वजन किया था। साथ ही ऊंचाई की डिटेल लेकर ग्रोथ चार्ट तैयार किया। ग्रोथ चार्ट के अनुसार, 164 गांवों में लाल श्रेणी यानी अतिकुपोषित बच्चे 5860 पाए गए।
जानकारों की मानें तो जो बच्चे लाल श्रेणी में आते हैं, उन्हें सबसे पहले इलाज की आवश्यकता बताई जाती है। वहीं कुपोषित बच्चों की संख्या 46086 पाई गई। अतिकुपोषित बच्चों की संख्या सबसे ज्यादा सुमेरपुर ब्लॉक में है। सूची के अनुसार, इस ब्लॉक में अतिकुपोषित बच्चों की संख्या 750 है। असोहा में सबसे कम मात्र 97 अतिकुपोषित बच्चे मिले हैं।
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मातृ एवं शिशु कुपोषण से होती है मौतें
पांच वर्ष से कम उम्र के आधे से अधिक बच्चों की मौत का एक प्रमुख कारण मातृ एवं शिशु कुपोषण है। कुपोषण के कारण बच्चों की असमय मौत हो जाती है। जो कुपोषण से प्रभावित बच्चे जीवित रहते हैं उनकी भी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। जिससे वह अक्सर बीमार रहते हैं और उनका विकास नहीं हो पाता है। कुपोषण दूर करने के लिए राज्य पोषण मिशन कार्यक्रम चलाया जा रहा है।
कुपोषण दूर करने के किए जा रहे हैं उपाय
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने वजन के आधार पर सर्वे किया था उसमें अतिकुपोषित बच्चों की संख्या 5 हजार से ज्यादा पाई गई है। जिन गांवों में कुपोषित बच्चे अधिक पाए गए हैं वहां पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। महिलाओं का टीकाकरण व उन्हें आयरन की गोली के साथ पोषाहार देने में भी प्राथमिकता दी जा रही है।
दुर्गेश प्रताप सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी उन्नाव।
ब्लॉकवार अतिकुपोषित व कुपोषित बच्चों की संख्या
ब्लॉक अतिकुपोषित कुपोषित
सफीपुर 425 2303
सिकंदरपुर करन 518 3227
हिलौली 657 2849
नवाबगंज 485 3273
गंजमुरादाबाद 271 2426
असोहा 97 3457
बांगरमऊ 355 2396
सिकंदरपुर सरोसी 269 1447
बिछिया 119 1468
औरास 298 2544
उन्नाव शहर 403 2340
मियागंज 158 3841
हसनगंज 461 2355
बीघापुर 128 2812
सुमेरपुर 750 3730
फतेहपुर चौरासी 165 2706
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आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने पूरे जिले में 0 से 5 साल तक के 280357 बच्चों का वजन किया था। साथ ही ऊंचाई की डिटेल लेकर ग्रोथ चार्ट तैयार किया। ग्रोथ चार्ट के अनुसार, 164 गांवों में लाल श्रेणी यानी अतिकुपोषित बच्चे 5860 पाए गए।
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जानकारों की मानें तो जो बच्चे लाल श्रेणी में आते हैं, उन्हें सबसे पहले इलाज की आवश्यकता बताई जाती है। वहीं कुपोषित बच्चों की संख्या 46086 पाई गई। अतिकुपोषित बच्चों की संख्या सबसे ज्यादा सुमेरपुर ब्लॉक में है। सूची के अनुसार, इस ब्लॉक में अतिकुपोषित बच्चों की संख्या 750 है। असोहा में सबसे कम मात्र 97 अतिकुपोषित बच्चे मिले हैं।
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मातृ एवं शिशु कुपोषण से होती है मौतें
पांच वर्ष से कम उम्र के आधे से अधिक बच्चों की मौत का एक प्रमुख कारण मातृ एवं शिशु कुपोषण है। कुपोषण के कारण बच्चों की असमय मौत हो जाती है। जो कुपोषण से प्रभावित बच्चे जीवित रहते हैं उनकी भी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। जिससे वह अक्सर बीमार रहते हैं और उनका विकास नहीं हो पाता है। कुपोषण दूर करने के लिए राज्य पोषण मिशन कार्यक्रम चलाया जा रहा है।
कुपोषण दूर करने के किए जा रहे हैं उपाय
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने वजन के आधार पर सर्वे किया था उसमें अतिकुपोषित बच्चों की संख्या 5 हजार से ज्यादा पाई गई है। जिन गांवों में कुपोषित बच्चे अधिक पाए गए हैं वहां पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। महिलाओं का टीकाकरण व उन्हें आयरन की गोली के साथ पोषाहार देने में भी प्राथमिकता दी जा रही है।
दुर्गेश प्रताप सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी उन्नाव।
ब्लॉकवार अतिकुपोषित व कुपोषित बच्चों की संख्या
ब्लॉक अतिकुपोषित कुपोषित
सफीपुर 425 2303
सिकंदरपुर करन 518 3227
हिलौली 657 2849
नवाबगंज 485 3273
गंजमुरादाबाद 271 2426
असोहा 97 3457
बांगरमऊ 355 2396
सिकंदरपुर सरोसी 269 1447
बिछिया 119 1468
औरास 298 2544
उन्नाव शहर 403 2340
मियागंज 158 3841
हसनगंज 461 2355
बीघापुर 128 2812
सुमेरपुर 750 3730
फतेहपुर चौरासी 165 2706