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बकरों की बलि चढ़ाने की सूचना से हड़कंप
ब्यूरो/अमर उजाला, उन्नाव
Updated Tue, 23 Jun 2015 12:38 AM IST
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औरास। अष्टमी के मेला के दूसरे दिन मांस खाने की परंपरा के चलते बकरों की बलि दिए जाने से फैलने वाली गंदगी की परंपरा से परेशान ग्रामीणों की शिकायत पर सोमवार सुबह को पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी गांव पहुंच गए। भारी पुलिस और पीएसी बल को देख बलि चढ़ाने वाले सामने नहीं आए। हालांकि पुलिस का कहना है कि यहां सिर्फ एक दिन के लिए हटिया लगती है जिसमें मेला आने वाले लोग मीट खरीदकर ले जाते हैं। पुलिस ने बलि चढ़ाए जाने जैसी परंपरा से इनकार किया।
हसनगंज तहसील के बयारी गांव में अषाढ़ की अष्टमी को परंपरागत रूप से भैरो मंदिर में पूजा अर्चना होती है और मेला लगता है। नवमी को बयारी गांव से करीब दो किमी दूर हसनपुर गांव में यहीं के रहने वाले कौशलेंद्र का बड़ा अहाता है जिसमें गांव के लोग बकरे की बलि चढ़ाते हैं और मीट बांटते हैं।
एक ही दिन सैकड़ों बकरों के काटे जाने से होने वाली गंदगी से परेशान ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से इसकी शिकायत की। शिकायत मिलने के बाद एसडीएम उदयभान सिंह, सीओ और कई थानों की फोर्स के साथ सुबह हसनपुर गांव पहुंच गए। भारी पुलिस बल देख बकरा काटने वाले दुबक गए।
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पूरे दिन पुलिस तैनात रही। लोगों ने बताया कि भैरो बाबा को यहां आसपास गांव के लोग बहरू बाबा के नाम से जानते हैं। वार्षिक मेला में गांव के लोगों के अलावा उनके नाते रिश्तेदार भी आते हैं। मेला के अगले दिन चूल्हे पर तवा न चढ़ाने की परंपरा है। लोग हांडी में मीट पकाकर खाते हैं।
बकरे काटने के पीछे कोई धार्मिक प्रयोजन नहीं
उन्नाव। हसनगंज एसडीएम उदयभान सिंह ने बताया कि बकरे काटने के पीछे कोई धार्मिक प्रयोजन नहीं है। मेला में काफी लोग आते हैं इसलिए आसपास गांव के मीट बेचने वाले यहां मीट बेचते हैं। खुले में मवेशी काटने और गंदगी फैलने से लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता सिर्फ इसलिए बकरे काटने से रोका गया है।
शांतिभंग की आशंका में 19 पाबंद
उन्नाव। औरास थानाध्यक्ष रणजीत सिंह भदौरिया ने बताया कि यहां सोमवार को न तो कोई बकरा काटा गया और न ही कोई बकरे लेकर आया। इसलिए किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकी। जो लोग बकरे काटते थे ग्रामीणों से उनके नाम प्रकाश में आए हैं। 19 लोगों को शांतिभंग की धारा में पाबंद किया गया है।
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हसनगंज तहसील के बयारी गांव में अषाढ़ की अष्टमी को परंपरागत रूप से भैरो मंदिर में पूजा अर्चना होती है और मेला लगता है। नवमी को बयारी गांव से करीब दो किमी दूर हसनपुर गांव में यहीं के रहने वाले कौशलेंद्र का बड़ा अहाता है जिसमें गांव के लोग बकरे की बलि चढ़ाते हैं और मीट बांटते हैं।
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एक ही दिन सैकड़ों बकरों के काटे जाने से होने वाली गंदगी से परेशान ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से इसकी शिकायत की। शिकायत मिलने के बाद एसडीएम उदयभान सिंह, सीओ और कई थानों की फोर्स के साथ सुबह हसनपुर गांव पहुंच गए। भारी पुलिस बल देख बकरा काटने वाले दुबक गए।
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पूरे दिन पुलिस तैनात रही। लोगों ने बताया कि भैरो बाबा को यहां आसपास गांव के लोग बहरू बाबा के नाम से जानते हैं। वार्षिक मेला में गांव के लोगों के अलावा उनके नाते रिश्तेदार भी आते हैं। मेला के अगले दिन चूल्हे पर तवा न चढ़ाने की परंपरा है। लोग हांडी में मीट पकाकर खाते हैं।
बकरे काटने के पीछे कोई धार्मिक प्रयोजन नहीं
उन्नाव। हसनगंज एसडीएम उदयभान सिंह ने बताया कि बकरे काटने के पीछे कोई धार्मिक प्रयोजन नहीं है। मेला में काफी लोग आते हैं इसलिए आसपास गांव के मीट बेचने वाले यहां मीट बेचते हैं। खुले में मवेशी काटने और गंदगी फैलने से लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता सिर्फ इसलिए बकरे काटने से रोका गया है।
शांतिभंग की आशंका में 19 पाबंद
उन्नाव। औरास थानाध्यक्ष रणजीत सिंह भदौरिया ने बताया कि यहां सोमवार को न तो कोई बकरा काटा गया और न ही कोई बकरे लेकर आया। इसलिए किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकी। जो लोग बकरे काटते थे ग्रामीणों से उनके नाम प्रकाश में आए हैं। 19 लोगों को शांतिभंग की धारा में पाबंद किया गया है।