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युवाओं में जोश, योगिता, सपना, कोमल ने पहली बार डाला वोट
अमर उजाला ब्यूरो, उन्नाव
Updated Fri, 11 Dec 2015 01:06 AM IST
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चौथे और अंतिम चरण के चुनाव में भी युवाओं में जुनून दिखा। बड़ी संख्या में नवयुवक, युवतियों ने घर से निकलकर वोट डाले। इनमें पहली बार वोट डालने वालों के चेहरों पर अलग ही खुशी नजर आई।
गुरुवार को चौथे चरण के चुनाव में विकासखंड क्षेत्र के युवाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। पहली बार वोटिंग लिस्ट में शामिल युवक, युवतियां मतदान शुरू होने से पहले ही बूथ पर पहुंच गए। जैसे ही सुबह 7 बजे बूथ खुला, उन्होंने अंदर जाकर वोट डाला। बाहर निकलने पर इनके चेहरों पर अलग ही खुशी नजर आईं।
पहली बार वोट डालने वालों में शामिल पंडितखेड़ा की योगिता, सपना व कोमल का कहना है कि वोट डालना हर भारतीय का अधिकार है। इसलिए सभी को वोट जरूर डालना चाहिए। सभी युवतियां बुजुर्ग ज्ञानप्रकाश अवस्थी के साथ बूथ पर पहुंची। हाथ की उंगलियों पर लगाई गई स्याही को देखकर खिलखिला उठीं।
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पहली बार वोट डाला है क्या? इस सवाल पर उंगली पर लगी स्याही को दिखाते हुए तीनों ने कहा कि अभी तक जब बड़ों को वोट डालते देखती थीं तो सोचती थी कि उन्हें कब यह अधिकार मिलेगा। आज पहली बार वोट डाला तो पता चला कि लोकतंत्र में वोट का कितना महत्व है।
उन्होंने उन लोगों को करारा जवाब दिया है जो वोट डालने के लिए घर से बाहर नहीं निकलते हैं। उनका कहना है कि वोट जरूर दें। क्योंकि हमारा वोट ही हमारी ताकत है। वोट ही सही आदमी का चुनाव कर सकता है। सही आदमी प्रधान बनेगा तो गांव का विकास होगा।
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किसी ने साड़ी बांटी तो किसी ने शराब - मतदाताओं को लुभाने के लिए रातभर जोर आजमाइश चली। अंतिम चरण में भी प्रधान और सदस्य पद के प्रत्याशियों ने बुधवार रात मतदाताओं को अपने पक्ष में लाने के लिए हर जतन किया।
किसी ने साड़ी बांटी तो किसी ने शराब। इतना ही नहीं चुनाव प्रचार समाप्त होने के बाद भी प्रत्याशियों ने गांवों में जुलूस निकाले और नारेबाजी भी करते रहे।
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आधी आबादी ने भी दिखाई ताकत- उन्नाव। पहले तीन चरणों के चुनाव की ही तरह चौथे और अंतिम चरण में भी आधी आबादी ने मतदान में अपनी ताकत दिखाई। इस दौरान बूथों पर भारी संख्या में महिलाएं अपने मताधिकार का प्रयोग करने जोश के साथ पहुंची।
इसी का परिणाम रहा कि कुछ बूथों पर पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं की कतारें ज्यादा लंबी दिखीं। बुजुर्ग महिलाओं के साथ नवविवाहिताओं ने भी घूंघट की ओट में मतदान किया।
मतदान के लिए ही उन्होंने सुबह जल्दी घर का कामकाज निपटा लिया। कई केंद्रों पर लंबी लाइन के कारण उन्हें काफी देर तक इंतजार करना पड़ा। घंटों लाइन में लगने के बाद भी महिलाएं मतदान करके ही बूथ से बाहर निकलीं।
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गैर जिलों में रहने वाले लोग डालने पहुंचे वोट - उन्नाव। अपनों को जिताने के लिए लोग शहर से ही नहीं, कानपुर, लखनऊ, हरदोई, दिल्ली, मुंबई आदि जगहों से वोट डालने आए। इन लोगों का कहना था कि वह भी चाहते हैं उनके गांव का विकास हो, ऐसे में सही प्रतिनिधि चुनने में गांववालों की मदद करना अपना फर्ज समझते हैं।
बाहर रहने वाले मतदाताओं को कुछ प्रत्याशी अपने निजी साधनों से लेकर गांव पहुंचे और अपने पक्ष में मतदान कराया।
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होमगार्डों पर सुरक्षा छोड़ किया आराम- उन्नाव। चार ब्लाकों में 26 दंगा आशंकित बूथों पर सुरक्षा के कड़े इंतेजाम रहे। यहां पर सीनियर पुलिस अधिकारी लगातार गश्त करके वोटिंग पर नजर रखे रहे। बूथों पर असलहों के साथ पुलिसकर्मी सुरक्षा व्यवस्था संभाले रहे।
कुछ संवेदनशीलबूथों पर तो होमगार्डों को सुरक्षा की जिम्मेदारी देकर पुलिस जवान आराम फरमाते रहे। कुछ बूथों के पास बस्ता लगाने वाले प्रत्याशी समर्थकों को पुलिस ने खदेड़ दिया। दंगा आशंकित बूथों पर वरिष्ठ प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी नजरें जमाए रहे।
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गुरुवार को चौथे चरण के चुनाव में विकासखंड क्षेत्र के युवाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। पहली बार वोटिंग लिस्ट में शामिल युवक, युवतियां मतदान शुरू होने से पहले ही बूथ पर पहुंच गए। जैसे ही सुबह 7 बजे बूथ खुला, उन्होंने अंदर जाकर वोट डाला। बाहर निकलने पर इनके चेहरों पर अलग ही खुशी नजर आईं।
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पहली बार वोट डालने वालों में शामिल पंडितखेड़ा की योगिता, सपना व कोमल का कहना है कि वोट डालना हर भारतीय का अधिकार है। इसलिए सभी को वोट जरूर डालना चाहिए। सभी युवतियां बुजुर्ग ज्ञानप्रकाश अवस्थी के साथ बूथ पर पहुंची। हाथ की उंगलियों पर लगाई गई स्याही को देखकर खिलखिला उठीं।
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पहली बार वोट डाला है क्या? इस सवाल पर उंगली पर लगी स्याही को दिखाते हुए तीनों ने कहा कि अभी तक जब बड़ों को वोट डालते देखती थीं तो सोचती थी कि उन्हें कब यह अधिकार मिलेगा। आज पहली बार वोट डाला तो पता चला कि लोकतंत्र में वोट का कितना महत्व है।
उन्होंने उन लोगों को करारा जवाब दिया है जो वोट डालने के लिए घर से बाहर नहीं निकलते हैं। उनका कहना है कि वोट जरूर दें। क्योंकि हमारा वोट ही हमारी ताकत है। वोट ही सही आदमी का चुनाव कर सकता है। सही आदमी प्रधान बनेगा तो गांव का विकास होगा।
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किसी ने साड़ी बांटी तो किसी ने शराब - मतदाताओं को लुभाने के लिए रातभर जोर आजमाइश चली। अंतिम चरण में भी प्रधान और सदस्य पद के प्रत्याशियों ने बुधवार रात मतदाताओं को अपने पक्ष में लाने के लिए हर जतन किया।
किसी ने साड़ी बांटी तो किसी ने शराब। इतना ही नहीं चुनाव प्रचार समाप्त होने के बाद भी प्रत्याशियों ने गांवों में जुलूस निकाले और नारेबाजी भी करते रहे।
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आधी आबादी ने भी दिखाई ताकत- उन्नाव। पहले तीन चरणों के चुनाव की ही तरह चौथे और अंतिम चरण में भी आधी आबादी ने मतदान में अपनी ताकत दिखाई। इस दौरान बूथों पर भारी संख्या में महिलाएं अपने मताधिकार का प्रयोग करने जोश के साथ पहुंची।
इसी का परिणाम रहा कि कुछ बूथों पर पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं की कतारें ज्यादा लंबी दिखीं। बुजुर्ग महिलाओं के साथ नवविवाहिताओं ने भी घूंघट की ओट में मतदान किया।
मतदान के लिए ही उन्होंने सुबह जल्दी घर का कामकाज निपटा लिया। कई केंद्रों पर लंबी लाइन के कारण उन्हें काफी देर तक इंतजार करना पड़ा। घंटों लाइन में लगने के बाद भी महिलाएं मतदान करके ही बूथ से बाहर निकलीं।
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गैर जिलों में रहने वाले लोग डालने पहुंचे वोट - उन्नाव। अपनों को जिताने के लिए लोग शहर से ही नहीं, कानपुर, लखनऊ, हरदोई, दिल्ली, मुंबई आदि जगहों से वोट डालने आए। इन लोगों का कहना था कि वह भी चाहते हैं उनके गांव का विकास हो, ऐसे में सही प्रतिनिधि चुनने में गांववालों की मदद करना अपना फर्ज समझते हैं।
बाहर रहने वाले मतदाताओं को कुछ प्रत्याशी अपने निजी साधनों से लेकर गांव पहुंचे और अपने पक्ष में मतदान कराया।
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होमगार्डों पर सुरक्षा छोड़ किया आराम- उन्नाव। चार ब्लाकों में 26 दंगा आशंकित बूथों पर सुरक्षा के कड़े इंतेजाम रहे। यहां पर सीनियर पुलिस अधिकारी लगातार गश्त करके वोटिंग पर नजर रखे रहे। बूथों पर असलहों के साथ पुलिसकर्मी सुरक्षा व्यवस्था संभाले रहे।
कुछ संवेदनशीलबूथों पर तो होमगार्डों को सुरक्षा की जिम्मेदारी देकर पुलिस जवान आराम फरमाते रहे। कुछ बूथों के पास बस्ता लगाने वाले प्रत्याशी समर्थकों को पुलिस ने खदेड़ दिया। दंगा आशंकित बूथों पर वरिष्ठ प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी नजरें जमाए रहे।