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नवजात की मौत पर हंगामा
अमर उजाला ब्यूरो, उन्नाव
Updated Sun, 05 Feb 2017 12:24 AM IST
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kins of deceased
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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पुरवा कोतवाली के गोपालखेड़ा निवासी मन्नो देवी (22) पत्नी अनुज को शुक्रवार दोपहर प्रसव पीड़ा होने पर आशा उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंची। दोपहर 1.30 बजे मन्नो ने एक नवजात को जन्म दिया। जन्म के कुछ देर बाद ही बच्चे की हालत बिगड़ने लगी। सांस लेने में दिक्कत होने पर महिला अस्पताल की डाक्टर रामपति ने उसे एसएनसीयू (सिक न्यू बॉर्न केयर यूनिट) भेज दिया। एसएनसीयू में बच्चे को मशीन पर रखा गया। तब तक वह ठीक था। एक घंटे तक एसएनसीयू में रखने के बाद बच्चे को वापस परिजनों को दे दिया गया। मन्नो देवी की सास तारदेवी बच्चे को लेकर जीने से नीचे ही उतर रहीं थीं तब तक बच्चे की तबीयत बिगड़ गई। वह बच्चे को लेकर डाक्टर के पास पहुंची तो डाक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। नवजात की मौत पर परिजनों ने हंगामा काटना शुरू कर दिया। अस्पताल प्रशासन ने जैसे-तैसे हंगामा शांत कराया और नवजात को घर भेज दिया गया।
पिता बनने की दिल में ही रह गई चाह
प्रसूता मन्नो देवी का पति अनुज दिल्ली में प्राइवेट नौकरी करता है। पुत्र होने की जानकारी मिलते ही वह खुशी से झूम उठा, लेकिन खुशी से पहले ही गमों का पहाड़ टूट पड़ा। घर पहुंचने से पहले ही ईश्वर ने पिता बनने का सुख अनुज से छीन लिया। अनुज जब अस्पताल पहुंचा तो गम के चलते कुछ भी बता पाने में असमर्थ दिख रहा था।
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समय से पहले ही करा दी छुट्टी
प्रसूता मन्नो को लेकर आई आशा नीलम ने नवजात की मौत के बाद समय से पहले ही उसकी छुट्टी करा दी। मन्नो की छुट्टी नियमानुसार रविवार को होनी थी। लेकिन आशा ने स्टाफ के साथ मिलकर शनिवार को ही उसकी छुट्टी करा दी और प्राइवेट एंबुलेंस से घर भेजवा दिया।
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पहले भी दम तोड़ चुके हैं नवजात
एसएनसीयू में इलाज के अभाव में नवजात की मौत का यह पहला मामला नहीं है। इसके पहले भी नवजात की मौत हो चुकी है। 17 नवंबर को गंगाघाट थानाक्षेत्र के गांव कटहा दलनारायणपुर निवासी सरोजनी पत्नी विनोद के नवजात को सांस लेने में दिक्कत होने पर एसएनसीयू में मशीन पर रखा गया था। लेकिन रात में डाक्टर के न होने से नवजात ने दम तोड़ दिया था। इस मामले की जांच अभी तक पूरी नहीं हो पाई है। सितंबर महीने पुरवा की एक दुष्कर्म पीड़ित किशोरी के नवजात बच्ची को डाक्टर के न होने के कारण भर्ती नहीं किया गया था। इलाज के अभाव में नवजात ने अस्तपल गेट पर ही दम तोड़ दिया था।
क्या बोले जिम्मेदार
सीएमएस डॉ सरोज श्रीवास्तव का कहना है कि बच्चा बदलने के आरोप गलत हैं। ऐसी कोई संभावना नहीं रहती। हर बच्चे पर टैगिंग कर दी जाती है। प्रसव कराने वाली जिला महिला अस्पताल की डा. रामपति का कहना था कि बच्चे की मौत परिजनों के लेने के बाद दबने से हुई है। मशीन से हटाने के बाद जब बच्चे को परिजनों को दिया गया था वह स्वस्थ था।