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आडियो क्लिप, ट्वीट और पुराने शिकायती पत्रों से खुलेगी कुंडली
unnao
Updated Thu, 26 Apr 2018 11:41 PM IST
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उन्नाव। विधायक प्रकरण में न्याय के लिए पीड़ित परिवार ने बीते आठ माह में हरसंभव कोशिश की। माखी पुलिस से लेकर एसपी, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री कार्यालय तक 70 से अधिक शिकायतें दर्ज कराईं। न्याय के लिए सोशल मीडिया का भी सहारा लिया। चार माह के अंदर मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री को 107 ट्वीट किए, न्याय नहीं मिला। जांच आगे बढ़ने पर दुष्कर्म पीड़िता के चाचा ने सीबीआई को 222 पेज के वह शिकायती पत्र सौंपे, जो उन्होंने अधिकारियों को दिए थे।
दुष्कर्म पीड़िता के चाचा ने भतीजी को न्याय दिलाने के लिए हर संभव कोशिश की। आरोपी विधायक पर कार्रवाई के लिए पुलिस अधिकारियों को कई बार शिकायती पत्र दिए। कार्रवाई नहीं हुई। पीड़िता के चाचा के अनुसार जून 2017 में भतीजी के साथ हुई दरिंदगी के बाद माखी पुलिस, सीओ व एसपी को शिकायती पत्र दिए। सुनवाई न होने पर मुख्यमंत्री से शिकायत की। शासन के पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई। शिकायतों पर सुनवाई नहीं हुई। न्याय के लिए सोशल मीडिया का भी सहारा लिया। 19 फवरी से 3 अप्रैल के बीच में साक्ष्य सहित 107 ट्वीट किए। शासन ने ट्वीट भी नजरअंदाज कर दिए थे। सीबीआई की जांच आगे बढ़ते ही चाचा ने जून 2017 से अब तक विभिन्न पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को दिए गए शिकायती प्रार्थनापत्रों के अलावा कई अहम काल डिटेल सीबीआई के हवाले की हैं। बताया जा रहा है कि चाचा ने सीबीआई को शिकायती पत्रों के 222 पेज सौंपे हैं।
इनसेट
पीड़िता ने छह माह पूर्व लगाई थी सुरक्षा की गुहार
उन्नाव। भाजपा विधायक पर आरोप लगाने वाली किशोरी ने छह माह पूर्व खुद को व परिजनों को जान का खतरा जताते हुए प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था। पत्र का संज्ञान लेते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय ने मुख्यमंत्री कार्यालय और तत्कालीन जिलाधिकारी को उचित कार्रवाई के निर्देश दिए थे। पीड़ित परिवार को समय से सुरक्षा नहीं दिलाई गई थी। चाचा ने सीबीआई को दिए गए पत्रों में इसका भी जिक्र किया है।
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इनसेट
आज से खत्म हो रही रिमांड
सीबीआई ने विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया था। विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की रिमांड आज दोपहर 12 बजे से पूरी हो रही है। इसके अलावा दुष्कर्म मामले की सह आरोपी शशि सिंह की रिमांड भी आज शाम 4 बजे पूरी हो जाएगी। विधायक व शशि सिंह पर पाक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया है। ऐसे में माना जा रहा है कि मामले की सुनवाई के लिए सीबीआई दोनों को उन्नाव जेल में भी शिफ्ट कर सकती है। पाक्सो एक्ट की सुनवाई जिला न्यायालय में ही होगी।
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सीबीआई की जांच शुरू होते ही उखड़ने लगे पुराने मामले
एफआईआर दर्ज करने की तैयारी में आधा दर्जन से अधिक लोग
अमर उजाला ब्यूरो
उन्नाव। भाजपा विधायक और उनके भाई के खिलाफ सीबीआई जांच शुरू होते ही गांव और आसपास के गांवों के सताए हुए लोग सामने आने लगे हैं। कई लोगों ने एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी शुरू कर दी है।
सीबीआई जांच शुरू होते ही विधायक और उनके गुर्गों की दबंगई के शिकार हुए लोग अपना मुंह खोलने की हिम्मत जुटाने लगे हैं। करीब छह महीने पहले ट्रैक्टर से कुचलकर युवक की मौत की घटना में विधायक के लोगों ने मृतक के भाई पर रिपोर्ट दर्ज न कराने का दबाव बनाया था। वह नहीं माना तो उसके साथ मारपीट कर जेल भिजवा दिया गया। पीड़ित रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट, पूर्व में दिए गए शिकायती पत्रों का संकलन कर रहा है। इसी तरह जमीन पर कब्जे का विरोध करने पर एक गरीब से मारपीट की गई। मारपीट की एक घटना में एससी बिरादरी के एक युवक की संदिग्ध हालात में मौत हो गई। पुलिस ने आत्महत्या का मामला दर्ज कर निपटा दिया था। ऐसे ही करीब दर्जन भर लोग अब रिपोर्ट दर्ज कराने की तैयारी में हैं।
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माखी पुलिस थाना नहीं, डाकखाना कहो भाई
किशोरी के चाचा ने बताया कि माखी पुलिस थाना केवल कहने भर को थाना है। यहां विधायक व उनके गुर्गों के लिए डाकखाना की तरह काम होता है। पीड़ित किशोरी के चाचा ने बताया कि दिल्ली में रहते हुए उस पर आधा दर्जन झूठे मुकदमे दर्ज कर दिए गए। वांछित अपराधी घोषित कर गिरफ्तारी के प्रयास शुरू किए गए। जिस समय मुकदमे दर्ज हुए, वह उत्तर प्रदेश में ही नहीं था। गिरफ्तारी में न्यायालय से रोक (स्टे) लेने के बाद भी दरोगा दिल्ली पहुंच गया। वहां उसने मारपीट की। किशोरी के चाचा का आरोप है कि माखी थाने में वही होता है जो माननीय या उनके लोग चाहते हैं। मारपीट कर सताए व्यक्ति को ही तमंचा, मादक पदार्थ, कच्ची शराब या शांतिभंग के आरोप में मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया जाता है।
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दुष्कर्म पीड़िता के चाचा ने भतीजी को न्याय दिलाने के लिए हर संभव कोशिश की। आरोपी विधायक पर कार्रवाई के लिए पुलिस अधिकारियों को कई बार शिकायती पत्र दिए। कार्रवाई नहीं हुई। पीड़िता के चाचा के अनुसार जून 2017 में भतीजी के साथ हुई दरिंदगी के बाद माखी पुलिस, सीओ व एसपी को शिकायती पत्र दिए। सुनवाई न होने पर मुख्यमंत्री से शिकायत की। शासन के पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई। शिकायतों पर सुनवाई नहीं हुई। न्याय के लिए सोशल मीडिया का भी सहारा लिया। 19 फवरी से 3 अप्रैल के बीच में साक्ष्य सहित 107 ट्वीट किए। शासन ने ट्वीट भी नजरअंदाज कर दिए थे। सीबीआई की जांच आगे बढ़ते ही चाचा ने जून 2017 से अब तक विभिन्न पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को दिए गए शिकायती प्रार्थनापत्रों के अलावा कई अहम काल डिटेल सीबीआई के हवाले की हैं। बताया जा रहा है कि चाचा ने सीबीआई को शिकायती पत्रों के 222 पेज सौंपे हैं।
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पीड़िता ने छह माह पूर्व लगाई थी सुरक्षा की गुहार
उन्नाव। भाजपा विधायक पर आरोप लगाने वाली किशोरी ने छह माह पूर्व खुद को व परिजनों को जान का खतरा जताते हुए प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था। पत्र का संज्ञान लेते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय ने मुख्यमंत्री कार्यालय और तत्कालीन जिलाधिकारी को उचित कार्रवाई के निर्देश दिए थे। पीड़ित परिवार को समय से सुरक्षा नहीं दिलाई गई थी। चाचा ने सीबीआई को दिए गए पत्रों में इसका भी जिक्र किया है।
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आज से खत्म हो रही रिमांड
सीबीआई ने विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया था। विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की रिमांड आज दोपहर 12 बजे से पूरी हो रही है। इसके अलावा दुष्कर्म मामले की सह आरोपी शशि सिंह की रिमांड भी आज शाम 4 बजे पूरी हो जाएगी। विधायक व शशि सिंह पर पाक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया है। ऐसे में माना जा रहा है कि मामले की सुनवाई के लिए सीबीआई दोनों को उन्नाव जेल में भी शिफ्ट कर सकती है। पाक्सो एक्ट की सुनवाई जिला न्यायालय में ही होगी।
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सीबीआई की जांच शुरू होते ही उखड़ने लगे पुराने मामले
एफआईआर दर्ज करने की तैयारी में आधा दर्जन से अधिक लोग
अमर उजाला ब्यूरो
उन्नाव। भाजपा विधायक और उनके भाई के खिलाफ सीबीआई जांच शुरू होते ही गांव और आसपास के गांवों के सताए हुए लोग सामने आने लगे हैं। कई लोगों ने एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी शुरू कर दी है।
सीबीआई जांच शुरू होते ही विधायक और उनके गुर्गों की दबंगई के शिकार हुए लोग अपना मुंह खोलने की हिम्मत जुटाने लगे हैं। करीब छह महीने पहले ट्रैक्टर से कुचलकर युवक की मौत की घटना में विधायक के लोगों ने मृतक के भाई पर रिपोर्ट दर्ज न कराने का दबाव बनाया था। वह नहीं माना तो उसके साथ मारपीट कर जेल भिजवा दिया गया। पीड़ित रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट, पूर्व में दिए गए शिकायती पत्रों का संकलन कर रहा है। इसी तरह जमीन पर कब्जे का विरोध करने पर एक गरीब से मारपीट की गई। मारपीट की एक घटना में एससी बिरादरी के एक युवक की संदिग्ध हालात में मौत हो गई। पुलिस ने आत्महत्या का मामला दर्ज कर निपटा दिया था। ऐसे ही करीब दर्जन भर लोग अब रिपोर्ट दर्ज कराने की तैयारी में हैं।
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माखी पुलिस थाना नहीं, डाकखाना कहो भाई
किशोरी के चाचा ने बताया कि माखी पुलिस थाना केवल कहने भर को थाना है। यहां विधायक व उनके गुर्गों के लिए डाकखाना की तरह काम होता है। पीड़ित किशोरी के चाचा ने बताया कि दिल्ली में रहते हुए उस पर आधा दर्जन झूठे मुकदमे दर्ज कर दिए गए। वांछित अपराधी घोषित कर गिरफ्तारी के प्रयास शुरू किए गए। जिस समय मुकदमे दर्ज हुए, वह उत्तर प्रदेश में ही नहीं था। गिरफ्तारी में न्यायालय से रोक (स्टे) लेने के बाद भी दरोगा दिल्ली पहुंच गया। वहां उसने मारपीट की। किशोरी के चाचा का आरोप है कि माखी थाने में वही होता है जो माननीय या उनके लोग चाहते हैं। मारपीट कर सताए व्यक्ति को ही तमंचा, मादक पदार्थ, कच्ची शराब या शांतिभंग के आरोप में मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया जाता है।