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बुखार के साथ फूली सांस, आठ की मौत
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उन्नाव। तेज बुखार और सांस लेने में परेशानी पर जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती आठ मरीजों की हालत बिगड़ गई। कुछ समय के अंतराल में इन सभी की मौत हो गई।
जिले के अलग-अलग स्थानों के रामशंकर (45), उमर (50), राधेश्याम (50), नीरू सोनी (31), रमेश सोनकर (50), राजकिशोर तिवारी (49), राजपाल यादव (56) व नदीम खान (36) को बुखार के साथ सांस लेने में तकलीफ होने पर परिजनों ने जिला अस्पताल की इमरजेंसी में दो मई की रात में भर्ती कराया था। सभी को ऑक्सीजन लगाया गया था। देर रात सभी की हालत बिगड़ गई। डॉक्टरों ने रेफर करने की प्रक्रिया शुरू की। मरीजों के परिजन उन्हें इलाज के लिए कानपुर हैलट ले जाने की तैयारी कर रहे थे। रविवार रात 11 बजे से सोमवार सुबह 11 के बीच एक के बाद एक सभी आठ मरीजों की मौत हो गई। मालूम हो कि जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में एक महीने में 98 लोगों की मौत हो चुकी है। प्रभारी सीएमएस डॉ. आलोक पांडेय ने बताया कि इमरजेंसी में गंभीर मरीज ही आ रहे हैं। जितना संभव हो पा रहा है सभी का इलाज किया जा रहा है। ऑक्सीजन भी लोगों को लगातार उपलब्ध कराई जा रही है।
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जिले के अलग-अलग स्थानों के रामशंकर (45), उमर (50), राधेश्याम (50), नीरू सोनी (31), रमेश सोनकर (50), राजकिशोर तिवारी (49), राजपाल यादव (56) व नदीम खान (36) को बुखार के साथ सांस लेने में तकलीफ होने पर परिजनों ने जिला अस्पताल की इमरजेंसी में दो मई की रात में भर्ती कराया था। सभी को ऑक्सीजन लगाया गया था। देर रात सभी की हालत बिगड़ गई। डॉक्टरों ने रेफर करने की प्रक्रिया शुरू की। मरीजों के परिजन उन्हें इलाज के लिए कानपुर हैलट ले जाने की तैयारी कर रहे थे। रविवार रात 11 बजे से सोमवार सुबह 11 के बीच एक के बाद एक सभी आठ मरीजों की मौत हो गई। मालूम हो कि जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में एक महीने में 98 लोगों की मौत हो चुकी है। प्रभारी सीएमएस डॉ. आलोक पांडेय ने बताया कि इमरजेंसी में गंभीर मरीज ही आ रहे हैं। जितना संभव हो पा रहा है सभी का इलाज किया जा रहा है। ऑक्सीजन भी लोगों को लगातार उपलब्ध कराई जा रही है।
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