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खेती किसानी से लेकर प्रधानी तक में आधी आबादी ने जमाई धाक
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ग्राम प्रधान संगीता वर्मा।
- फोटो : UNNAO
उन्नाव। किसी भी क्षेत्र में आधी आबादी पुरुषों से पीछे नहीं हैं। यह साबित किया है जनपद की महिलाओं ने। यह महिलाएं खेती किसानी भी कर रही हैं तो गांव की प्रधानी भी चला रही हैं। खेती में जहां रिकार्ड उत्पादन कर सम्मान हासिल किया है। वहीं, प्रधान बनकर गांव में विकास की ऐसी गंगा बहाई जिसे देश व प्रशासन ने उन्हें सम्मानित किया। इसके अलावा जरदोजी व ब्यूटीशियन में भी महिलाओं ने अपनी धाक जमाई है। ऐसी ही कुछ महिलाओं ने अपनी सफलता की कहानी अमर उजाला से साझा की।
स्वच्छता को आधार बना संगीता ने गांव में बनाया कूड़ाघर
गंजमुरादाबाद विकासखंड के ग्राम सहदानी की महिला ग्राम प्रधान संगीता वर्मा ने अपनी ग्राम पंचायत में स्वच्छता को आधार बनाकर रास्ते से अलग हटकर विकास कार्य किए हैं। उन्होंने गांव में एक कूड़ा घर बनवाया। जिससे गांव का सारा कूड़ा-कचरा उसी कूड़ा घर में एकत्र किया जाता है। गांव में कूड़े के ढेर नहीं दिखते हैं। यही नहीं गांव में किसी की मृत्यु हो जाने पर उसके अंतिम संस्कार के बाद महिलाओं के स्नान करने के लिए एक स्नानागार का निर्माण कराया। जिससे महिलाओं को खुले आसमान के नीचे स्नान व कपड़े नहीं बदलने होते हैं। यही नहीं उन्होंने शादी के समय कुंवारे की रस्म अदायगी के लिए एक सुंदर कुएं का निर्माण कराकर किसी अनहोनी को रोकने के लिए उसमें जाल डलवाया और उसके ऊपर छत का भी निर्माण कराया। ताकि गर्मी के मौसम में तेज धूप से बचा जा सके। इसके साथ ही उन्होंने गांव के उच्च प्राथमिक विद्यालय का टायल्स आदि लगवाकर सुंदरीकरण कराया। इन सभी सराहनीय कार्य के लिए पिछले वर्ष तत्कालीन जिलाधिकारी देवेंद्र कुमार पांडेय व सीडीओ प्रेमरंजन सिंह द्वारा उन्हें प्रशस्तिपत्र देकर सम्मानित किया गया था।
संकर धान का रिकार्ड उत्पादन कर जीता पुरस्कार
बांगरमऊ की ग्राम पंचायत आलमपुर रेतवा की रहने वाली केसाना पत्नी भोगे ने खेती किसानी में पुरुषों के वर्चस्व को तोड़ा है। उन्होंने खुद वैज्ञानिक विधि से खेती की और संकर धान की प्रति हेक्टेअर 87 क्विंटल की पैदावार की। इसकी जानकारी जब कृषि विभाग के अधिकारियों को हुई तो उन्होंने भी महिला की हिम्मत की दाद दी। इसके बाद पिछले साल किसान दिवस पर केसाना को सम्मानित किया। बकौल केसाना, महिलाएं किसी भी क्षेत्र में काम कर सकती हैं। इसके लिए महिलाओं को अपने अंदर आत्मविश्वास जगाना होगा। यही नहीं पुरुषों को भी महिलाओं के प्रति सोच बदलनी होगी। इस बार भी रबी सीजन में गेहूं की फसल बोई है। उम्मीद है गेहूं का अच्छा उत्पादन होगा। हालांकि इधर मौसम की मार से गेहूं के उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका केसाना जता रही हैं। उनके चार पुत्र हैं जो खेती में उसका सहयोग करते हैं। मौजूदा समय में लगभग 4 बीघा जमीन है। पति भी कृषक है।
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जरी जरदोजी ने दिलाई पहचान
मियागंज गांव की रहने वाली सरोजनी की प्रतिभा का आज हर कोई कायल है। कभी एक-एक पैसे की मोहताज रही सरोजनी अब महिलाओं को रोजगार दे रही हैं। उन्होंने जबसे जरीजरदोजी का काम शुरू किया है तबसे उन्हें काफी आमदनी होने लगी है। उनका कहना है कि जरदोजी ने उसकी जिंदगी में खुशहाली के रंग भर दिए हैं। उसने 3500 रुपये से कारोबार शुरू किया था। वह अपने गांव-मोहल्ले की महिलाओं को जरदोजी का हस्तशिल्प सिखा रही हैं और उन्हें रोजगार भी दे रही हैं। उनके कढ़ाई किए कपड़े खूब पसंद किए जा रहे हैं। इसी कारण उन्हें दिल्ली, उड़ीसा समेत अन्य राज्यों में जाने का मौका मिल रहा है। सरोजनी मात्र आठवीं पास हैं। कम शिक्षित होने के बाद भी सरोजनी पढ़े-लिखे बेरोजगारों को आईना दिखा रही है। सरोजनी का कहना है कि यदि आपमें लगन और मेहनत का जज्बा है तो किसी भी काम को आप ऊंचाई पर पहुंचा सकते हैं। हालांकि उसका कहना है कि उसने अब उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए भी कवायद शुरू कर दी है।
खूबसूरती के गुर से हसीन हो रही महिलाओं की जिंदगी
मोहान कस्बे की रहने वाली और पेशे से अनुदेशक सहेर फातिमा हजारों महिलाओं को खूबसूरती के गुर सिखाकर उनकी जिंदगी हसीन बना रही है। फातिमा हजारों महिलाओं को ब्यूटीशियन की नि:शुल्क ट्रेनिंग देकर उन्हें आत्मनिर्भर बना चुकी हैं। अभी भी उसके यहां क्लास चल रही है और सैकड़ों युवतियां खूबसूरती के गुर सीख रही हैं। फातिमा रोजाना सुबह घर से 8.30 बजे निकलती हैं और शाम 4 बजे तक विद्यालय में बच्चों को आईटीआई में प्रशिक्षित करती हैं। इसके बाद अपने घर में ही एक दर्जन युवतियों को छह माह का ब्यूटीशियन कोर्स सिखाती हैं। वह गरीब व दिव्यांग महिलाओं व युवतियों को नि:शुल्क छह माह तक ब्यूटीशियन का कोर्स सिखाती हैं। फ ातिमा ने बताया कि वह 2007 से प्रशिक्षण देने का काम कर रही हैं। जो भी सिखाने का मैटेरियल होता है वह मैं स्वयं खरीद कर लाती हूं। उनका प्रयास होता है कि वह युवतियों को स्वावलंबी बना सकें। अब तक 1100 युवतियों व महिलाओं को प्रशिक्षण दे चुकी हैं। फातिमा के पास नई सराय, मोहान, न्योतनी, भोगला, धौरा, मटरिया, कोईया मदारपुर, मीरखेड़ा, खपरा मुस्लिम, बीबीपुर चिरयारी, हसनगंज, मेहंदीखेड़ा आदि गांव से युवतियां ब्यूटीशियन सीखने के लिए साइकिल से पार्लर आती हैं। फातिमा द्वारा प्रशिक्षण प्राप्त कई युवतियाें ने नगर पंचायत मोहान में ही अपना पार्लर खोल लिया है। नगर पंचायत मोहान में पार्लर खोलने वाली रेनू कनौजिया, अहमदपुर की रोशनी, मोहान की लक्ष्मी और शेखूपुर की पुष्पा के मुताबिक, कोर्स सीखने के बाद वह रोजाना 300-400 रुपये कमा लेती हैं।
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स्वच्छता को आधार बना संगीता ने गांव में बनाया कूड़ाघर
गंजमुरादाबाद विकासखंड के ग्राम सहदानी की महिला ग्राम प्रधान संगीता वर्मा ने अपनी ग्राम पंचायत में स्वच्छता को आधार बनाकर रास्ते से अलग हटकर विकास कार्य किए हैं। उन्होंने गांव में एक कूड़ा घर बनवाया। जिससे गांव का सारा कूड़ा-कचरा उसी कूड़ा घर में एकत्र किया जाता है। गांव में कूड़े के ढेर नहीं दिखते हैं। यही नहीं गांव में किसी की मृत्यु हो जाने पर उसके अंतिम संस्कार के बाद महिलाओं के स्नान करने के लिए एक स्नानागार का निर्माण कराया। जिससे महिलाओं को खुले आसमान के नीचे स्नान व कपड़े नहीं बदलने होते हैं। यही नहीं उन्होंने शादी के समय कुंवारे की रस्म अदायगी के लिए एक सुंदर कुएं का निर्माण कराकर किसी अनहोनी को रोकने के लिए उसमें जाल डलवाया और उसके ऊपर छत का भी निर्माण कराया। ताकि गर्मी के मौसम में तेज धूप से बचा जा सके। इसके साथ ही उन्होंने गांव के उच्च प्राथमिक विद्यालय का टायल्स आदि लगवाकर सुंदरीकरण कराया। इन सभी सराहनीय कार्य के लिए पिछले वर्ष तत्कालीन जिलाधिकारी देवेंद्र कुमार पांडेय व सीडीओ प्रेमरंजन सिंह द्वारा उन्हें प्रशस्तिपत्र देकर सम्मानित किया गया था।
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संकर धान का रिकार्ड उत्पादन कर जीता पुरस्कार
बांगरमऊ की ग्राम पंचायत आलमपुर रेतवा की रहने वाली केसाना पत्नी भोगे ने खेती किसानी में पुरुषों के वर्चस्व को तोड़ा है। उन्होंने खुद वैज्ञानिक विधि से खेती की और संकर धान की प्रति हेक्टेअर 87 क्विंटल की पैदावार की। इसकी जानकारी जब कृषि विभाग के अधिकारियों को हुई तो उन्होंने भी महिला की हिम्मत की दाद दी। इसके बाद पिछले साल किसान दिवस पर केसाना को सम्मानित किया। बकौल केसाना, महिलाएं किसी भी क्षेत्र में काम कर सकती हैं। इसके लिए महिलाओं को अपने अंदर आत्मविश्वास जगाना होगा। यही नहीं पुरुषों को भी महिलाओं के प्रति सोच बदलनी होगी। इस बार भी रबी सीजन में गेहूं की फसल बोई है। उम्मीद है गेहूं का अच्छा उत्पादन होगा। हालांकि इधर मौसम की मार से गेहूं के उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका केसाना जता रही हैं। उनके चार पुत्र हैं जो खेती में उसका सहयोग करते हैं। मौजूदा समय में लगभग 4 बीघा जमीन है। पति भी कृषक है।
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जरी जरदोजी ने दिलाई पहचान
मियागंज गांव की रहने वाली सरोजनी की प्रतिभा का आज हर कोई कायल है। कभी एक-एक पैसे की मोहताज रही सरोजनी अब महिलाओं को रोजगार दे रही हैं। उन्होंने जबसे जरीजरदोजी का काम शुरू किया है तबसे उन्हें काफी आमदनी होने लगी है। उनका कहना है कि जरदोजी ने उसकी जिंदगी में खुशहाली के रंग भर दिए हैं। उसने 3500 रुपये से कारोबार शुरू किया था। वह अपने गांव-मोहल्ले की महिलाओं को जरदोजी का हस्तशिल्प सिखा रही हैं और उन्हें रोजगार भी दे रही हैं। उनके कढ़ाई किए कपड़े खूब पसंद किए जा रहे हैं। इसी कारण उन्हें दिल्ली, उड़ीसा समेत अन्य राज्यों में जाने का मौका मिल रहा है। सरोजनी मात्र आठवीं पास हैं। कम शिक्षित होने के बाद भी सरोजनी पढ़े-लिखे बेरोजगारों को आईना दिखा रही है। सरोजनी का कहना है कि यदि आपमें लगन और मेहनत का जज्बा है तो किसी भी काम को आप ऊंचाई पर पहुंचा सकते हैं। हालांकि उसका कहना है कि उसने अब उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए भी कवायद शुरू कर दी है।
खूबसूरती के गुर से हसीन हो रही महिलाओं की जिंदगी
मोहान कस्बे की रहने वाली और पेशे से अनुदेशक सहेर फातिमा हजारों महिलाओं को खूबसूरती के गुर सिखाकर उनकी जिंदगी हसीन बना रही है। फातिमा हजारों महिलाओं को ब्यूटीशियन की नि:शुल्क ट्रेनिंग देकर उन्हें आत्मनिर्भर बना चुकी हैं। अभी भी उसके यहां क्लास चल रही है और सैकड़ों युवतियां खूबसूरती के गुर सीख रही हैं। फातिमा रोजाना सुबह घर से 8.30 बजे निकलती हैं और शाम 4 बजे तक विद्यालय में बच्चों को आईटीआई में प्रशिक्षित करती हैं। इसके बाद अपने घर में ही एक दर्जन युवतियों को छह माह का ब्यूटीशियन कोर्स सिखाती हैं। वह गरीब व दिव्यांग महिलाओं व युवतियों को नि:शुल्क छह माह तक ब्यूटीशियन का कोर्स सिखाती हैं। फ ातिमा ने बताया कि वह 2007 से प्रशिक्षण देने का काम कर रही हैं। जो भी सिखाने का मैटेरियल होता है वह मैं स्वयं खरीद कर लाती हूं। उनका प्रयास होता है कि वह युवतियों को स्वावलंबी बना सकें। अब तक 1100 युवतियों व महिलाओं को प्रशिक्षण दे चुकी हैं। फातिमा के पास नई सराय, मोहान, न्योतनी, भोगला, धौरा, मटरिया, कोईया मदारपुर, मीरखेड़ा, खपरा मुस्लिम, बीबीपुर चिरयारी, हसनगंज, मेहंदीखेड़ा आदि गांव से युवतियां ब्यूटीशियन सीखने के लिए साइकिल से पार्लर आती हैं। फातिमा द्वारा प्रशिक्षण प्राप्त कई युवतियाें ने नगर पंचायत मोहान में ही अपना पार्लर खोल लिया है। नगर पंचायत मोहान में पार्लर खोलने वाली रेनू कनौजिया, अहमदपुर की रोशनी, मोहान की लक्ष्मी और शेखूपुर की पुष्पा के मुताबिक, कोर्स सीखने के बाद वह रोजाना 300-400 रुपये कमा लेती हैं।