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इलाज कराने जाते अस्पताल, दूसरी बीमारियां लेकर लौटते
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पुरवा सीएचसी में ख्राब पड़ा वाटर कूलर।
- फोटो : UNNAO
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उन्नाव। स्वास्थ्य केंद्रों की पेयजल व्यवस्था बीमारी बांट रही है। मरीज का इलाज कराने जा रहे तीमारदार भी दूषित पानी पीकर बीमार हो जाते हैं। अस्पतालों में लगे हैंडपंप के पानी में फ्लोराइड बहुत है तो आरओ भी खराब पड़े हैं। अस्पतालों में रखी टंकियों की सफाई न होने से पानी के साथ कीड़े और काई निकलती हैं। पेयजल की खस्ताहाल व्यवस्था के चलते स्वास्थ्य केंद्रों में जाने वाले मरीज व तीमारदार इसी पानी से प्यास बुझाने को मजबूर हैं।
शुद्ध पेयजल न मिलने से लोगों में पेट की बीमारियों के साथ-साथ डायरिया, टाइफाइड व चर्म रोग जैसी बीमारियां फैलने का डर बना रहता है। स्वास्थ्य केंद्रों में भर्ती होने वाले मरीजों तीमारदारों व तैनात स्टाफ को इन बीमारियों से बचाने के लिए स्वास्थ्य केंद्रों में कई सालों पहले आरओ लगवाए गए थे। कुछ दिन तो वह चले लेकिन बाद में मशीन धड़ाम हो गई। अब स्थिति यह है कि कई स्वास्थ्य केेंद्रों में आरओ सिर्फ शोपीस बने हुए हैं।
हसनगंज सीएचसी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लगा आरओ चार साल से खराब है। पानी के लिए छत पर रखी टंकियों के ढक्कन टूटे हैं। सफाई न होने से पानी में गंदगी के साथ काई भी जमी हुई है। सीएचसी के बाहर लगा नल भी शोपीस बना है। सीएचसी प्रभारी पवन कुमार ने बताया कि सर्दी का मौसम है इसलिए बंद कर दिया गया है। जबकि हीककत यह है कि सालों से बंद पड़ा है। पुरवा व हिलौली ब्लॉक की सीएचसी में लगा आरओ कई सालों से खराब पड़ा है। पानी के लिए लगे हैंडपंप से फ्लोराइड युक्त पानी निकल रहा है। इसको यदि मरीज या तीमारदार पी लें तो उनकी हालत में सुधार की जगह वह अन्य बीमारियों की चपेट में आ जाएंगे। सिकंदरपुर सरोसी स्वास्थ्य केंद्र का आरओ प्लांट कई सालों से खराब है। नल से भी शुद्ध पानी नहीं निकल रहा है। ऐसे में मरीजों को दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं।
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स्वास्थ्य केंद्रों पर खराब पड़े आरओं की जानकारी हमें नहीं है। यदि आरओ खराब हैं तो लोकल स्तर पर सीएचसी प्रभारी को सही कराना चाहिए। टंकियों की साफ-सफाई की व्यवस्था भी उन्हीं की जिम्मेदारी है। फिर भी मैं इसे दिखवाता हूं। दूषित पानी मरीज व तीमारदार को मिलना गलत है। इसे सही कराया जाएगा।
-डॉ. कैप्टन आशुतोष कुमार
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शुद्ध पेयजल न मिलने से लोगों में पेट की बीमारियों के साथ-साथ डायरिया, टाइफाइड व चर्म रोग जैसी बीमारियां फैलने का डर बना रहता है। स्वास्थ्य केंद्रों में भर्ती होने वाले मरीजों तीमारदारों व तैनात स्टाफ को इन बीमारियों से बचाने के लिए स्वास्थ्य केंद्रों में कई सालों पहले आरओ लगवाए गए थे। कुछ दिन तो वह चले लेकिन बाद में मशीन धड़ाम हो गई। अब स्थिति यह है कि कई स्वास्थ्य केेंद्रों में आरओ सिर्फ शोपीस बने हुए हैं।
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हसनगंज सीएचसी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लगा आरओ चार साल से खराब है। पानी के लिए छत पर रखी टंकियों के ढक्कन टूटे हैं। सफाई न होने से पानी में गंदगी के साथ काई भी जमी हुई है। सीएचसी के बाहर लगा नल भी शोपीस बना है। सीएचसी प्रभारी पवन कुमार ने बताया कि सर्दी का मौसम है इसलिए बंद कर दिया गया है। जबकि हीककत यह है कि सालों से बंद पड़ा है। पुरवा व हिलौली ब्लॉक की सीएचसी में लगा आरओ कई सालों से खराब पड़ा है। पानी के लिए लगे हैंडपंप से फ्लोराइड युक्त पानी निकल रहा है। इसको यदि मरीज या तीमारदार पी लें तो उनकी हालत में सुधार की जगह वह अन्य बीमारियों की चपेट में आ जाएंगे। सिकंदरपुर सरोसी स्वास्थ्य केंद्र का आरओ प्लांट कई सालों से खराब है। नल से भी शुद्ध पानी नहीं निकल रहा है। ऐसे में मरीजों को दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं।
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स्वास्थ्य केंद्रों पर खराब पड़े आरओं की जानकारी हमें नहीं है। यदि आरओ खराब हैं तो लोकल स्तर पर सीएचसी प्रभारी को सही कराना चाहिए। टंकियों की साफ-सफाई की व्यवस्था भी उन्हीं की जिम्मेदारी है। फिर भी मैं इसे दिखवाता हूं। दूषित पानी मरीज व तीमारदार को मिलना गलत है। इसे सही कराया जाएगा।
-डॉ. कैप्टन आशुतोष कुमार