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दरिंदगी की शिकार बच्ची के शव का 19 घंटे बाद अंतिम संस्कार
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उन्नाव के बिहार थानाक्षेत्र में बच्ची के घर पर लगी भीड़।
- फोटो : UNNAO
बीघापुर(उन्नाव)। बिहार थानाक्षेत्र में नौ साल की बच्ची को हैवानियत का शिकार बनाने के बाद हत्या की घटना में शव के अंतिम संस्कार को लेकर परिजनों व ग्रामीणों के आक्रोश से प्रशासन के पसीना-पसीना रहा। मृतका के पिता व भाई ने वारदात को अंजाम देने वाले को चिह्नित कर गिरफ्तारी व लापरवाही बरतने वाले पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग पूरी होने के बाद ही शव का अंतिम संस्कार करने की जिद पर अड़ गए। परिजनों ने मुख्यमंत्री को भी बुलाने की मांग रखी। हालांकि पूर्व विधायक, एमएलसी की मौजूदगी में डीएम व अन्य अधिकारियों ने हर संभव आर्थिक मदद देने और एसपी ने चौकी इंचार्ज सहित चार पुलिस कर्मियों को तत्काल लाइन हाजिर करते हुए बिहार एसओ को चौबीस घंटे में खुलासा करने का अल्टीमेटम देने की बात कही। तब परिजन शांत हुए और शव घर पहुंचने के 19 घंटे बाद दोपहर 1:30 बजे गांव के बाहर खेत में मिट्टी में दबाया गया।
बिहार थाना क्षेत्र के एक गांव में होली के दिन मंगलवार को घर से पिता व भाई के साथ फाग टोली में शामिल हुई (9) साल की बच्ची के साथ अज्ञात व्यक्ति ने दुष्कर्म, अप्राकृतिक कृत्य करने के बाद भेद खुलने के डर से उसका गला दबा दिया था। बच्ची गंभीर हालत में सुनसान स्थान पर मिली थी। गंभीर हालत में उसे कानपुर हैलट में भर्ती कराया गया था। जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। पुलिस ने पिता की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर तफ्तीश शुरू की थी। कानपुर में पोस्टमार्टम के बाद बुधवार रात 7 बजे शव को घर लाया गया था। प्रशासन ने रात में ही शव का अंतिम संस्कार कराने का प्रयास किया लेकिन मृतका के घर वालों व ग्रामीणों ने नृशंस घटना को अंजाम देने वाले की गिरफ्तारी न होने तक शव का अंतिम संस्कार न करने की बात कही। रात में एडीजी लखनऊ एसनए सावत और आईजी जोन एसके भगत भी पहुंचे और परिजनों को समझाया।
सुबह डीएम रवींद्र कुमार, एसपी विक्रांतवीर सहित अन्य प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों ने शव का अंतिम संस्कार कराने की तैयारी शुरू की। परिजनों द्वारा चिह्नित गांव के बाहर पैतृक जमीन में शव का अंतिम संस्कार करने के लिए गड्ढा भी खोदवा दिया गया। लेकिन मृतका के घरवाले अपनी मांग पर अड़े रहे। डीएम और एसपी ने मृतका के भाई, पिता व मां से कई चक्र में बातचीत की लेकिन मसला हल नहीं हुआ। इसके बाद दोपहर को डीएम सहित अन्य अधिकारी पूर्व विधायक कृपाशंकर सिंह के आवास पहुंचे और सपा एमएलसी सुनील साजन, सपा जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह सहित अन्य लोगों से बात की। इसके बाद मृतका के परिजनों को भी बुलाया गया। डीएम रवींद्र कुमार ने मुख्यमंत्री राहत कोष से पांच लाख रुपये देने के साथ ही रानी लक्ष्मीबाई योजना से भी मदद दिलाने का आश्वासन दिया। सपा एमएलसी ने पार्टी की तरफ से परिवार को दो लाख रुपये आर्थिक मदद देने की बात कही। इस दौरान अधिकारियों ने मृतका के परिजनों को कानूनी पहलू और अपनी अधिकार की सीमाएं भी बताईं।
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एसपी विक्रांतवीर ने पाटन चौकी इंचार्ज हुकुम सिंह व हेड कांस्टेबल जफर आलम और कांस्टेबल नारेंद्र कुमार व दीपक चौधरी को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया है। वहीं, चौबीस घंटे में खुलासा न होने पर बिहार एसओ पर कार्रवाई करने की बात कही। इसके बाद परिजन शव का अंतिम संस्कार करने को तैयार हुए। दोपहर 1:30 बजे कड़ी सुरक्षा में शव का अंतिम संस्कार किया गया। 19 घंटे बाद शव का अंतिम संस्कार होने के बाद अफसरों ने राहत की सांस ली।
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बिहार थाना क्षेत्र के एक गांव में होली के दिन मंगलवार को घर से पिता व भाई के साथ फाग टोली में शामिल हुई (9) साल की बच्ची के साथ अज्ञात व्यक्ति ने दुष्कर्म, अप्राकृतिक कृत्य करने के बाद भेद खुलने के डर से उसका गला दबा दिया था। बच्ची गंभीर हालत में सुनसान स्थान पर मिली थी। गंभीर हालत में उसे कानपुर हैलट में भर्ती कराया गया था। जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। पुलिस ने पिता की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर तफ्तीश शुरू की थी। कानपुर में पोस्टमार्टम के बाद बुधवार रात 7 बजे शव को घर लाया गया था। प्रशासन ने रात में ही शव का अंतिम संस्कार कराने का प्रयास किया लेकिन मृतका के घर वालों व ग्रामीणों ने नृशंस घटना को अंजाम देने वाले की गिरफ्तारी न होने तक शव का अंतिम संस्कार न करने की बात कही। रात में एडीजी लखनऊ एसनए सावत और आईजी जोन एसके भगत भी पहुंचे और परिजनों को समझाया।
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सुबह डीएम रवींद्र कुमार, एसपी विक्रांतवीर सहित अन्य प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों ने शव का अंतिम संस्कार कराने की तैयारी शुरू की। परिजनों द्वारा चिह्नित गांव के बाहर पैतृक जमीन में शव का अंतिम संस्कार करने के लिए गड्ढा भी खोदवा दिया गया। लेकिन मृतका के घरवाले अपनी मांग पर अड़े रहे। डीएम और एसपी ने मृतका के भाई, पिता व मां से कई चक्र में बातचीत की लेकिन मसला हल नहीं हुआ। इसके बाद दोपहर को डीएम सहित अन्य अधिकारी पूर्व विधायक कृपाशंकर सिंह के आवास पहुंचे और सपा एमएलसी सुनील साजन, सपा जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह सहित अन्य लोगों से बात की। इसके बाद मृतका के परिजनों को भी बुलाया गया। डीएम रवींद्र कुमार ने मुख्यमंत्री राहत कोष से पांच लाख रुपये देने के साथ ही रानी लक्ष्मीबाई योजना से भी मदद दिलाने का आश्वासन दिया। सपा एमएलसी ने पार्टी की तरफ से परिवार को दो लाख रुपये आर्थिक मदद देने की बात कही। इस दौरान अधिकारियों ने मृतका के परिजनों को कानूनी पहलू और अपनी अधिकार की सीमाएं भी बताईं।
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एसपी विक्रांतवीर ने पाटन चौकी इंचार्ज हुकुम सिंह व हेड कांस्टेबल जफर आलम और कांस्टेबल नारेंद्र कुमार व दीपक चौधरी को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया है। वहीं, चौबीस घंटे में खुलासा न होने पर बिहार एसओ पर कार्रवाई करने की बात कही। इसके बाद परिजन शव का अंतिम संस्कार करने को तैयार हुए। दोपहर 1:30 बजे कड़ी सुरक्षा में शव का अंतिम संस्कार किया गया। 19 घंटे बाद शव का अंतिम संस्कार होने के बाद अफसरों ने राहत की सांस ली।