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उन्नाव-बालामऊ रेलमार्ग पर अक्तूबर में दौड़ेंगे इलेक्ट्रिक इंजन
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उन्नाव-बालामऊ रेलमार्ग पर काशीराम कालोनी के पास डाली जाती ओएचई लाइन।
- फोटो : UNNAO
उन्नाव। उन्नाव-बालामऊ रेलमार्ग पर अक्तूबर महीने से इलेक्ट्रिक इंजन दौड़ने लगेंगे। रेलवे तीन महीने में ओएचई लाइन का काम पूरा कराएगा। इसकी जिम्मेदारी मुरादाबाद मंडल को दी गई है। इलेक्ट्रिक इंजन की ट्रेेनों का संचालन होने से ट्रेनों की रफ्तार बढ़कर 110 किलोमीटर प्रति घंटा हो जाएगी।
उन्नाव-बालामऊ रेलमार्ग पर ओएचई लाइन डालने का काम तेजी से चल रहा है। 119 किलोमीटर रेलमार्ग की इस दूरी का काम रेलवे को तीन महीने में पूरा करना है। इसके लिए सेक्शन इंजीनियर इलेक्ट्रिक एसके सिंह के नेतृत्व में चार टीमें काम कर रही हैं। रेलवे अभी तक चार किलोमीटर ही काम करा पाया है। सेक्शन इंजीनियर के मुताबिक ओएचई न होने से अभी तक कानपुर से उन्नाव के रास्ते मुरादाबाद जाने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। सफर को आसान और कम समय में यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए ओएचई लाइन काम कराया जा रहा है।
इस रेलमार्ग पर अभी तक डीजल इंजन की गाड़ियों का संचालन होता है। इससे ट्रेेनों की रफ्तार भी 80 किलोमीटर प्रति घंटा रहती है। इससे यात्रियों को पहुंचने में भी परेशानी उठानी पड़ती है और समय भी करीब पांच घंटे का लगता है। लेकिन इलेक्ट्रिक इंजन चलने से यह सफर तीन घंटे का हो जाएगा।
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उन्नाव-बालामऊ रेलमार्ग पर ओएचई लाइन डालने का काम तेजी से चल रहा है। 119 किलोमीटर रेलमार्ग की इस दूरी का काम रेलवे को तीन महीने में पूरा करना है। इसके लिए सेक्शन इंजीनियर इलेक्ट्रिक एसके सिंह के नेतृत्व में चार टीमें काम कर रही हैं। रेलवे अभी तक चार किलोमीटर ही काम करा पाया है। सेक्शन इंजीनियर के मुताबिक ओएचई न होने से अभी तक कानपुर से उन्नाव के रास्ते मुरादाबाद जाने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। सफर को आसान और कम समय में यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए ओएचई लाइन काम कराया जा रहा है।
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इस रेलमार्ग पर अभी तक डीजल इंजन की गाड़ियों का संचालन होता है। इससे ट्रेेनों की रफ्तार भी 80 किलोमीटर प्रति घंटा रहती है। इससे यात्रियों को पहुंचने में भी परेशानी उठानी पड़ती है और समय भी करीब पांच घंटे का लगता है। लेकिन इलेक्ट्रिक इंजन चलने से यह सफर तीन घंटे का हो जाएगा।
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