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हत्या कांड के आरोपी धरे गए
ब्यूरो अमर उजाला, उन्नाव
Updated Sat, 30 Apr 2016 12:26 AM IST
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पुलिस हिरासत में आरोपी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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दिल्ली में फल आढ़ती आजाद ने कोल्डस्टोरेज लगाने के बारे में अपने छोटे भाई विनोद से सलाह की। विनोद ने रकम ऐंठने के इरादे से मलिहाबाद क्षेत्र में अपने साले व दोस्त की मदद से खुद के अपहरण की साजिश रच डाली। रकम न मिलते देख अपनों ने ही उसे मार डाला। अपहरण व हत्याकांड के खुलासे के साथ पुलिस की लापरवाही उजागर हुई। आईजी जोन के आदेश पर एसओ औरास को निलंबित और सर्विलांस सेल प्रभारी को हटा दिया गया है।
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आईजी जोन ए सतीश गणेश ने बताया कि अपहरण की रिपोर्ट दर्ज करने में टालमटोल पर एसओ औरास विनोद यादव यादव को निलंबित और अपहर्ताओं का लोकेशन ट्रेस करने में नाकाम रहे सर्विलांस सेल प्रभारी साबेज खां को हटा दिया गया है। उधर, शुक्रवार पुलिस ने आरोपियों को मीडिया के सामने पेश किया तो सच सामने आ गया। आजाद ने विनोद के साले विजय को होली त्योहार से पहले दिल्ली बुलाया था। वहां उसने कारोबार में लाखों की कमाई होने की बात कह लखनऊ में कोल्ड स्टोरेज और तीन मकान खरीदने की बात उससे कही। आजाद की लाखों की कमाई पर विजय की नीयत खराब हो गई और उसने अपने गांव आकर बहनोई विनोद का अपहरण कर फिरौती वसूलने की कहानी साथियों के साथ मिलकर रच डाली।
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वारदात में शामिल मृतक विनोद के साला विजय अपने कारनामों को छिपाते नजर आया। पर उसके साथी छोटू, माधव, महबूब और सलमान ने सारा सच उगल दिया। छोटू ने बताया कि विजय उसके घर आया और बहनोई का अपहरण करने और फिरौती मांगने की साजिश रची। आरोपियों के अनुसार साजिश में खुद विनोद भी शामिल था। चार अप्रैल को वह योजना के तहत लखनऊ को निकला और महिलाबाद के मुगलखेड़ा में रहने वाले अपने साले विजय के साथी छोटू के पास पहुंचा। प्लानिंग के तहत छोटू ने अपने फूफा माधव के घर उसे रखा। और उसके भाई आजाद को फोन कर फिरौती मांगने लगा। 23 अप्रैल को उसने विनोद के बड़े भाई आजाद को फिरौती की रकम लेकर लखनऊ आने के लिए बुलाया। छोटू और उसके साथियों को इस बात की भनक लग चुकी थी कि आजाद फिरौती की कुछ रकम ही लेकर पुलिस के साथ चला है। पुलिस को साथ देकर कोई भी सामने नहीं आया। उसी रात घर लौटते आजाद की सड़क हादसे में मौत की सूचना सभी को मिली। विनोद का साला विजय घबरा गया। उसे लगा कि पुलिस विनोद तक पहुंच जाएगी। विनोद के सच बताने पर सभी फंस जाएंगे। इस डर से विजय ने साथियों से विनोद की हत्या कर देने की बात कही। जिस पर छोटू, ने माधव, महबूब, सलमान, वीरेंद्र, राजकुमार और रामसिंह की मदद से विनोद को पहले शराब पिलाया। जब वह नशे में हो गया तो पीछे से एक ने उसके सिर पर लोहे की राड से हमला कर बेहोश कर दिया। उसके बेहोश होते ही अंगौछे से गला दबाकर हत्या कर दी। वारदात में शामिल वीरेंद्र, राजकुमार और रामसिंह अभी भी फरार है। शेष आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
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कॉल डिटेल से खुले राज
विनोद ने चार अप्रैल को घर से निकलने पर कई बार अपने साले विजय और दोस्त छोटू पासी को कॉल की। छोटू ने उसे अपने रिश्तेदार माधव प्रसाद के घर का पता बताया। इससे पहले माधव प्रसाद को बताया कि कारोबार के सिलसिले में आ रहा विनोद कुछ दिन उनके घर मेहमानी करेगा। तीसरे दिन छोटू ने आजाद को कॉल करके फिरौती मांगी। कॉल डिटेल खंगालने से पता चला कि फिरौती मांगने में इस्तेमाल नंबर पर चार अप्रैल को विनोद ने कई कॉल की थी और शाम को दोनों का लोकेशन रहीमाबाद क्षेत्र में एक साथ था। इतना ही नहीं फिरौती मांगने में इस्तेमाल सिमकार्ड को विनोद के मोबाइल में लगाया गया था। इस तरह कॉल डिटेल से साफ हो रहा था कि अपहरणकर्ता से विनोद का संबंध है और उसकी मर्जी से फिरौती मांगी जा रही है। उसी इलाके में विनोद की ससुराल होने की वजह से पुलिस ने उसके साले का नंबर भी सर्विलांस पर लिया।
सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के बहाने मार डाला
आईजी जोन ने बताया कि एक पैर से नि:शक्त छोटू पासी ने फिरौती की कॉल, रकम लेने व अन्य भागदौड़ के लिए अपने राजकुमार, रामसिंह, महबूब व राज उर्फ सलमान को बुला लिया था। उसने 23 अप्रैल को आजाद को फिरौती की रकम लेकर दुबग्गा बुलाया। चाय के होटल पर खुद मौजूद रहकर नजर रखे था। पुलिस देखकर आजाद से संपर्क नहीं किया। लौटते समय सड़क हादसे में आजाद की मौत के अगले दिन फिर फोन किया। कॉल रिसीव करने वाले व्यक्ति ने उसे बुरी तरह फटकार लगाई और कहा कि एक भाई को गंवा दिया है, अब उसे देख लेगा। इससे रकम मिलने की उम्मीद खत्म हो गई। छोटू ने विजय व अन्य साथियों से सलाह की। तय हुआ कि पुलिस के हाथ लगने पर विनोद अपने अपहरण की कहानी सुनाकर फंसा देगा। इस पर राजकुमार, राम सिंह व सलमान उसे सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के बहाने सोमवार रात यादव खेड़ा में डींगुरपाल के बाग में ले गए। विनोद साथियों के इरादे से बेखबर था। बाग में बदमाशों ने उसे पीटकर मार डाला और पेड़ से शव लटकाकर फरार हो गए।
पहले भी भाई ने मोटी रकम देकर छुड़ाया था
पड़ताल में पता चला कि कुछ साल पहले विनोद ने दिल्ली के एक होटल में कई दिन ऐशोआराम की। लाख रुपये से अधिक का बिल न चुका पाने पर प्रबंधन ने उसे बंधक बनाकर कानूनी कार्रवाई की तैयारी की। इस पर विनोद ने अपने बड़े भाई आजाद से बात कराई और आजाद ने बिल चुकता करके उसे छुड़ाया था। उसने विनोद को सख्त हिदायत देकर उन्नाव भेज दिया था।
कब्र की निगहबानी में लगी पुलिस
विनोद को दफनाए जाने के बाद भी पुलिस की मुश्किलें कम नहीं हुई। शुक्रवार को पुलिस और पीएसी विनोद की कब्र की पूरे दिन निगहबानी करती दिखी। सीओ बांगरमॅऊ आरपी सिंह दोपहर बाद तक मृतक के दरवाजे बैठे रहे। गांव में पुलिस की तैनाती होने से सन्नाटा पसरा रहा। लोगों की माने तो पुलिस को इस बात का डर है कि कहीं परिजन दोबारा कब्र खोदकर हंगामा न करने लगे।