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संक्रमितों के शव का अंतिम संस्कार कोविड नियमों से होगा

Fri, 14 May 2021 11:28 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 14 May 2021 11:28 PM IST
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उन्नाव। बक्सर घाट व गंगा की धारा के बीच रेत के टीले पर शव दफनाए जाने पर डीएम रवींद्र कुमार ने घाट का निरीक्षण किया। उन्होंने कोरोना संक्रमित मृतकों के शवों के अंतिम संस्कार की व्यवस्था अलग करने के आदेश दिए हैं। शव दफनाने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। गरीबों को अंतिम संस्कार के लिए मुफ्त में लकड़ी दी जाएगी।
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बीघापुर तहसील के बक्सर घाट में नदी के किनारे और नदी के बीच रेत के टीले पर सैकड़ों शवों को दफनाया गया था। कई शव खुले होने और जानवरों द्वारा खींच कर दूर तक फैलाने से संक्रमण का खतरा बढ़ गया था। खबर प्रकाशित होने के बाद उन्नाव और फतेहपुर के अफसरों ने इसका संज्ञान लिया था। प्रशासन ने शवों को दफनाने पर रोक लगा दी थी। शुक्रवार शाम को डीएम रवींद्र कुमार बक्सर घाट पहुंचे और गंगा के पुल से श्मशान घाट का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि यहां उन्नाव, फतेहपुर और रायबरेली जिले से शव लाए जाते हैं। कच्चा घाट होने से शव दफनाने की परंपरा काफी पुरानी है। बताया कि अब शव दफनाने पर रोक लगा दी गई है। गरीबों को अंतिम संस्कार के लिए लकड़ी का पैसा प्रशासन की ओर से दिया जाएगा। कोरोना संक्रमण से हुई मौतों में शव का अंतिम संस्कार अलग स्थान पर और कोविड नियमों का पालन करते हुए सुरक्षित तरीके से किया जाए। डीएम ने बताया कि एसडीएम की रिपोर्ट के अनुसार नदी के बीच जिस टीले पर शव दफनाए गए हैं, वह फतेहपुर जिले की सीमा मे हैं। फतेहपुर के जिलाधिकारी से भी वार्ता की गई थी। बिंदकी एसडीएम ने दफनाए गए शवों पर रेत डलवाकर बंद करा दिया है।
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भगवंतनगर विधानसभा क्षेत्र के विधायक व प्रदेश के विधानसभा अध्यक्ष हृदयनारायण दीक्षित ने कहा है कि बक्सर पर दाह संस्कार और शव दफनाने की परंपरा पुरानी है। शुक्रवार को जारी किए गए पत्र में उन्होंने बताया है कि बक्सर घाट के प्रकरण को मुख्यमंत्री ने गंभीरता से लिया है। जिला प्रशासन सक्रिय है। सुनिश्चित किया गया है कि कोई भी व्यक्ति गरीबी या अभाव के कारण शव को गंगा में प्रवाहित न करें। अंत्येष्टि का खर्च सरकार उठाएगी। कहा है कि कि बक्सर घाट में तीन जिलों उन्नाव, फतेहपुर और रायबरेली से शवों की अंत्येष्टि करने के लिए लोग आते हैं।
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