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Unnao News: वसीयत के आधार पर दाखिल खारिज का प्रार्थनापत्र निरस्त कर वरासत का आदेश

Fri, 28 Feb 2025 10:49 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 28 Feb 2025 10:49 PM IST
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Cancellation of application for mutation on the basis of will and order for inheritance
पाटन। बीघापुर तहसीलदार न्यायालय ने पंजीकृत वसीयत के आधार पर करीब 26 बीघा भूमि के नामांतरण (दाखिल खारिज) से जुड़े प्रार्थनापत्र को निरस्त कर दिया। वहीं, वरासत के आधार पर दाखिल खारिज करने का आदेश दिया है। इसे लेकर चर्चा जोरों पर है। वहीं, तहसीलदार ने साक्ष्य के आधार पर फैसला बताया है।
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तहसील क्षेत्र के पाल्हेपुर व ऊंचगांव में करीब 26 बीघा कीमती भूमि है। पाल्हेपुर निवासी शिशिर त्रिवेदी ने बताया कि उनके चचेरे चाचा अश्वनी कुमार त्रिवेदी व पत्नी शशिबाला को कोई बच्चे नहीं थे। वर्ष 1985 में पिता संतोष त्रिवेदी का देहांत होने के बाद चचेरे चाचा अश्वनी कुमार ने ही उनका व बहन का पालन पोषण किया था और अभिभावक की जिम्मेदारी निभाई थी। शिशिर के अनुसार, 16 जून 2020 को चाची शशिबाला की मृत्यु के बाद चाचा अश्वनी ने पांच नवंबर 2020 को अपनी चल व अचल संपत्ति की पंजीकृत वसीयत उनकी (शिशिर की) पत्नी अनीता व बेटे प्रशांत के नाम कर दी थी।
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15 दिसंबर 2020 को चाचा का निधन होने के बाद 17 दिसंबर को उन्होंने वसीयत के आधार पर दाखिल खारिज करने के लिए तहसील में प्रार्थनापत्र दिया था। शिशिर के अनुसार, बैंक खाते में काफी रकम होने और पाल्हेपुर व ऊंचगांव में करीब 26 बीघा कीमती जमीन को हासिल करने के लिए दिवंगत अश्वनी कुमार के सगे भतीजे आनंद कुमार और नंद कुमार ने आपत्ति लगा दी। आरोप है कि वसीयत के गवाहों पर दबाव बनाने के लिए जालसाजी की एफआईआर दर्ज करा दी।
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चार साल बाद 21 फरवरी 2025 को तहसीलदार न्यायालय ने पंजीकृत वसीयत के आधार पर चल-अचल संपत्ति को दाखिल खारिज करने के प्रार्थनापत्र को निरस्त करते हुए वरासत को मान्यता देते हुए आनंद कुमार और नंद कुमार के पक्ष में फैसला सुनाया। तहसीलदार अरसला नाज ने बताया कि कोई भी मुकदमा बहस व साक्ष्यों के आधार पर निस्तारित किया जाता है। अगर कोई पक्ष असंतुष्ट है तो अपील कर सकता है।
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