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Unnao News: पांच साल बाद भी बर्न यूनिट का नहीं हो सका संचालन
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उन्नाव। जिला अस्पताल में दो करोड़ की लागत से बनी बर्न यूनिट में अब तक स्टाफ की तैनाती नहीं हो सकी है। यही वजह है कि अबतक इसका संचालन शुरू नहीं हो सका।
झुलसे मरीजों को मजबूरन कानपुर या लखनऊ रेफर किया जाता है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का दावा है कि स्टाफ की तैनाती के लिए कई बार मांगपत्र भेजा गया लेकिन हल नहीं निकला। दीपावली पर आतिशबाजी से झुलसने और जलने की घटनाएं बढ़ती हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में समस्या होगी।
जिला अस्पताल परिसर में पांच साल पहले दो करोड़ की लागत से बर्न यूनिट का निर्माण कराया गया था। निर्माण पूरा होने के बाद अस्पताल प्रशासन ने शासन को पत्र लिखकर स्टाफ की नियुक्ति की मांग की थी।
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बर्न यूनिट के लिए शासन ने एक प्लास्टिक सर्जरी के लिए सर्जन, दो जनरल सर्जन, तीन ईएमओ, छह स्टाफ नर्स, एक फिजियोथेरेपिस्ट, तीन ड्रेसर और छह एमटीडब्ल्यू के पद सृजित कर दिए, लेकिन अभी तक किसी की तैनाती नहीं हो सकी।
जिला अस्पताल में आने वाले आग से झुलसे मरीजों को जनरल वार्ड में ही भर्ती किया जा रहा है। हालत गंभीर होने पर उन्हें कानपुर या लखनऊ रेफर कर दिया जाता है। डॉक्टर के अनुसार 40 फीसदी से अधिक झुलसे मरीजों को रेफर करना मजबूरी है।
सीएमएस डॉ.आरए मिर्जा ने बताया कि बर्न यूनिट को चालू करने के लिए निदेशालय को पत्र भेजकर स्टाफ की मांग की गई है। बताया कि तैनाती शासन स्तर से ही होनी है।
स्टाफ की नियुक्ति न होने से बर्न यूनिट में ओपीडी चल रही है। अधिकारियों के अनुसार उपयोग न होने से भवन जर्जर हो जाएगा। इसलिए सर्जन नाक, कान और आंख के रोगियों को देखने के लिए बर्न यूनिट का इस्तेमाल कर रहे हैं।
आग से जले मरीजों को नियमानुसार एसीयुक्त कक्ष में भर्ती किया जाता है। ताकि उन्हें किसी प्रकार की दिक्कत न हो लेकिन जिला अस्पताल में बर्न यूनिट का संचालन न होने से ऐसे मरीजों को सामान्य वार्ड में ही भर्ती किया जाता है।
ऐसे में मरीजों को दिक्कत होती है। इसके अलावा संक्रमण का खतरा भी बना रहता है।
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झुलसे मरीजों को मजबूरन कानपुर या लखनऊ रेफर किया जाता है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का दावा है कि स्टाफ की तैनाती के लिए कई बार मांगपत्र भेजा गया लेकिन हल नहीं निकला। दीपावली पर आतिशबाजी से झुलसने और जलने की घटनाएं बढ़ती हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में समस्या होगी।
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जिला अस्पताल परिसर में पांच साल पहले दो करोड़ की लागत से बर्न यूनिट का निर्माण कराया गया था। निर्माण पूरा होने के बाद अस्पताल प्रशासन ने शासन को पत्र लिखकर स्टाफ की नियुक्ति की मांग की थी।
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बर्न यूनिट के लिए शासन ने एक प्लास्टिक सर्जरी के लिए सर्जन, दो जनरल सर्जन, तीन ईएमओ, छह स्टाफ नर्स, एक फिजियोथेरेपिस्ट, तीन ड्रेसर और छह एमटीडब्ल्यू के पद सृजित कर दिए, लेकिन अभी तक किसी की तैनाती नहीं हो सकी।
जिला अस्पताल में आने वाले आग से झुलसे मरीजों को जनरल वार्ड में ही भर्ती किया जा रहा है। हालत गंभीर होने पर उन्हें कानपुर या लखनऊ रेफर कर दिया जाता है। डॉक्टर के अनुसार 40 फीसदी से अधिक झुलसे मरीजों को रेफर करना मजबूरी है।
सीएमएस डॉ.आरए मिर्जा ने बताया कि बर्न यूनिट को चालू करने के लिए निदेशालय को पत्र भेजकर स्टाफ की मांग की गई है। बताया कि तैनाती शासन स्तर से ही होनी है।
स्टाफ की नियुक्ति न होने से बर्न यूनिट में ओपीडी चल रही है। अधिकारियों के अनुसार उपयोग न होने से भवन जर्जर हो जाएगा। इसलिए सर्जन नाक, कान और आंख के रोगियों को देखने के लिए बर्न यूनिट का इस्तेमाल कर रहे हैं।
आग से जले मरीजों को नियमानुसार एसीयुक्त कक्ष में भर्ती किया जाता है। ताकि उन्हें किसी प्रकार की दिक्कत न हो लेकिन जिला अस्पताल में बर्न यूनिट का संचालन न होने से ऐसे मरीजों को सामान्य वार्ड में ही भर्ती किया जाता है।
ऐसे में मरीजों को दिक्कत होती है। इसके अलावा संक्रमण का खतरा भी बना रहता है।