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Unnao News: ‘स्वर्गवासी’ का सहखातेदार बन निकाले 14 लाख... पुलिस जांच में डकार गई हकीकत

Sun, 25 May 2025 12:32 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, उन्नाव
संवाद न्यूज एजेंसी, उन्नाव Updated Sun, 25 May 2025 12:32 AM IST
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Became co-owner of a deceased person and withdrew 14 lakhs... Truth was revealed during police investigation
पाटन। चाचा की मौत के दो साल बाद भतीजी ने उनकी सहखातेदार बनकर खाते से 14 लाख रुपये निकाल लिए। मजे की बात यह है कि मर चुके व्यक्ति के सहखाते के फार्म और चेक पर हस्ताक्षर भी दिखा दिए गए और विवेचक को जांच में यह कुछ भी नजर नहीं आया। उसने फाइनल रिपोर्ट लगाकर इस धोखाधड़ी के खेल को सही बता दिया। अब वादी ने एसपी से दोबारा जांच की मांग की है।
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बिहार थानाक्षेत्र के पाल्हेपुर निवासी नंद कुमार त्रिवेदी ने 20 अप्रैल 2024 को गांव की अनीता पर अपने सगे चाचा के बैंक खाते में कूटरचित कागजातों के सहारे सहखातेदार बनने और 14 लाख रुपये निकालने का आरोप लगाया था। तहरीर के आधार पर बिहार थाना पुलिस ने धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में उसी तारीख को रिपोर्ट दर्ज की थी। विवेचना बिहार थाने के एसआई रजनीकांत पांडेय ने की और फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी। अब एसपी को दिए प्रार्थनापत्र में नंद कुमार त्रिवेदी ने आरोप लगाया है कि विवेचक ने मामले में चार्जशीट लगाने की विधिक राय के विपरीत फाइनल रिपोर्ट लगाई। विवेचक ने अपनी रिपोर्ट में विधिक राय के विपरीत आरोपी अनीता से मृतक अश्वनी कुमार त्रिवेदी से सगा रिश्ता सिद्ध किया।
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जन्मतिथि में अंतर और स्कूली साक्ष्य होने के बावजूद बैंक प्रबंधक द्वारा दी गई सक्सेज रिपोर्ट को आधार बताकर धन निकासी को सही सिद्ध किया। वादी ने बताया कि अश्वनी कुमार की 15 दिसंबर 2020 को मृत्यु होने हो गई थी। इसके बावजूद विवेचक ने पांच सितंबर 2022 को मृतक अश्वनी कुमार त्रिवेदी और अनीता त्रिवेदी द्वारा दो गवाहों की उपस्थिति में ज्वाइंट अकाउंट फार्म भरवाया जाना दर्शाया है। नंद कुमार त्रिवेदी ने एसपी को आठ बिंदुओं पर साक्ष्य उपलब्ध करवाते हुए विवेचक द्वारा सभी साक्ष्यों की अनदेखी कर फाइनल रिपोर्ट में आरोपी को लाभ देने का आरोप लगाया।
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वादी ने फिर से विवेचना कराए जाने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। थाना प्रभारी राहुल सिंह ने बताया कि बैंक द्वारा उपलब्ध कराई जानकारी व साक्ष्यों के आधार पर विवेचक द्वारा फाइनल रिपोर्ट लगाई गई है। यह अंतिम रिपोर्ट नहीं होती है, जिससे मुकदमा स्पंज हो जाए। यदि न्यायालय से या उच्चाधिकारियों द्वारा पुनः विवेचना का आदेश मिलेगा तो नए सिरे से विवेचना कराई जाएगी। मामले में तहसीलदार न्यायालय से आरोपी अनीता व पति शिशिर के पक्ष में की गई वसीयत की पहले ही खारिज किया जा चुका है।
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