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Unnao News: एक्सप्रेसवे पर बैरिकेडिंग, सुरक्षा जाली गायब
Tue, 20 Feb 2024 02:37 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उन्नाव
संवाद न्यूज एजेंसी, उन्नाव
Updated Tue, 20 Feb 2024 02:37 AM IST
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फोटो- 25
परिचय- एक्सप्रेसवे की हवाई पट्टी के पास क्षतिग्रस्त पोल और गायब लोहे की बैरीकेडिंग।
तीन किलोमीटर के दायरे में मवेशी एक्सप्रेसवे पर आसानी से पहुंच जाते हैं
संवाद न्यूज एजेंसी
उन्नाव (गंजमुरादाबाद)। लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर छुट्टा मवेशियों को जाने से रोकने के लिए लगाई गई बैरिकेडिंग टूट कर गायब हो चुकी है। हवाई पट्टी के पास लगी सेफ्टी ग्रिल भी गुम है। इससे छुट्टा मवेशी सड़क पर पहुंच जाते हैं और हादसों का सबब बनते हैं।
लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर सुरक्षित यातायात और मवेशियों को सड़क पर जाने से रोकने के लिए सीमेंट के पोल में लोहे के कंटीले तारों की बाड़ लगाई गई थी। यहां हवाई पट्टी के आसपास दोनों तरफ सुरक्षा जाली भी लगी थी। आसपास गांव के लोगों ने अपने आवागमन की सुविधा के लिए तार काट कर शार्टकट बना लिए हैं। साथ ही एक्सप्रेसवे के किनारे मवेशियों को चराने के लिए भी रास्ता बना लिया।
करीब तीन किलोमीटर के दायरे में मवेशी एक्सप्रेसवे पर आसानी से पहुंच जाते हैं। एक्सप्रेसवे की इस हवाई पट्टी से 400 मीटर की दूरी पर स्थित नसिरापुर गांव की गोशाला में संरक्षित मवेशी भी अक्सर एक्सप्रेसवे पर पहुंच जाते हैं और वाहन सवार चुटहिल होते हैं। एक्सप्रेसवे के सुरक्षा अधिकारी एके चंदेल ने बताया कि सर्वे किया जाएगा और जहां भी बैरिकेडिंग क्षतिग्रस्त है और सुरक्षा जाली टूट चुकी है, उसे दोबारा लगाया जाएगा।
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परिचय- एक्सप्रेसवे की हवाई पट्टी के पास क्षतिग्रस्त पोल और गायब लोहे की बैरीकेडिंग।
तीन किलोमीटर के दायरे में मवेशी एक्सप्रेसवे पर आसानी से पहुंच जाते हैं
संवाद न्यूज एजेंसी
उन्नाव (गंजमुरादाबाद)। लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर छुट्टा मवेशियों को जाने से रोकने के लिए लगाई गई बैरिकेडिंग टूट कर गायब हो चुकी है। हवाई पट्टी के पास लगी सेफ्टी ग्रिल भी गुम है। इससे छुट्टा मवेशी सड़क पर पहुंच जाते हैं और हादसों का सबब बनते हैं।
लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर सुरक्षित यातायात और मवेशियों को सड़क पर जाने से रोकने के लिए सीमेंट के पोल में लोहे के कंटीले तारों की बाड़ लगाई गई थी। यहां हवाई पट्टी के आसपास दोनों तरफ सुरक्षा जाली भी लगी थी। आसपास गांव के लोगों ने अपने आवागमन की सुविधा के लिए तार काट कर शार्टकट बना लिए हैं। साथ ही एक्सप्रेसवे के किनारे मवेशियों को चराने के लिए भी रास्ता बना लिया।
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करीब तीन किलोमीटर के दायरे में मवेशी एक्सप्रेसवे पर आसानी से पहुंच जाते हैं। एक्सप्रेसवे की इस हवाई पट्टी से 400 मीटर की दूरी पर स्थित नसिरापुर गांव की गोशाला में संरक्षित मवेशी भी अक्सर एक्सप्रेसवे पर पहुंच जाते हैं और वाहन सवार चुटहिल होते हैं। एक्सप्रेसवे के सुरक्षा अधिकारी एके चंदेल ने बताया कि सर्वे किया जाएगा और जहां भी बैरिकेडिंग क्षतिग्रस्त है और सुरक्षा जाली टूट चुकी है, उसे दोबारा लगाया जाएगा।
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