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छठ पर्व मंगलवार को, गंदगी से पटे स्थल

Sun, 15 Nov 2015 12:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो उन्नाव।
अमर उजाला ब्यूरो उन्नाव। Updated Sun, 15 Nov 2015 12:21 AM IST
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auspicious chat festival falls on tuesday, no sanitation drive at ganga ghat

इस बार छठ पर्व 17 नवंबर को पड़ रहा है। पर्व के आने में अब सिर्फ दो दिन का समय शेष बचा है। बावजूद इसके शहर की एकमात्र नहर शेखपुर में अभी तक साफ-सफाई शुरू नहीं हो सकी है। चारों ओर नहर में गंदगी का अंबार लगा हुआ है। यही नहीं नहर में पानी तक नहीं है। श्रृद्धालुओं में इस बात को लेकर संशय के बादल मंडराने लगे हैं कि अब छठ पूजा कहां होगी।

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शहर में करीब आधा सैकड़ा परिवार हैं जिनमें हर साल धूमधाम से छठ पर्व मनाया जाता है। हर साल यह लोग छठ पर्व के दिन नहरों पर जाकर पूजा अर्चना करते हैं। भारी संख्या में महिलाएं परिवार समेत शेखपुर नहर पर इकट्ठा होती हैं और वहीं पर उगते और अस्त होते सूर्य देव को अर्घ देते हैं, लेकिन इस बार लोगों को गंदगी के बीच छठ पूजा करनी पड़ सकती है। क्योंकि त्योहार में सिर्फ दो दिन का समय शेष बचा है और अभी तक शेखपुर नहर की सफाई का काम शुरू नहीं हो सका है। हालत यह है कि नहर में पानी कम होने से गंदगी उतरा रही है। गंदे पानी में कूड़ा बजबजाने के साथ ही गंदे जानवर लोटते रहते हैं। नहर के किनारे सूखी सिल्ट के ढेर लगे हैं। इस बारे में नगर पालिका ईओ रोली गुप्ता ने बताया कि नहर किनारे बने घाट की सफाई के आदेश दे दिए गए हैं। छठ पूजा से पूर्व ही घाट की सफाई का काम करा दिया जाएगा।
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चार दिनों तक चलेगा सूर्य उपासना का पर्व
चार दिवसीय छठ पूजाृका शुभारंभ रविवार से हो रहा है। यह पर्व लगातार चार दिनों तक मनाने के बाद बुधवार को परायण किया जाएगा। इसमें पहले दिन नहाय-खाय में लोग स्नान के बाद अपने ईष्ट देव की पूजा करेंगे। दोपहर बाद अरवा चावल, घी और सेंधा नमक से बनी चने की दाल का सेवन किया जाएगा। सूर्यास्त से पहले नहर तालाब किनारे बड़ी छठ पूजा के लिए गुंबद व मंदिर आदि बनाए जाएंगे। दूसरे दिन छोटी छठ के दिन लोग दिनभर बिना नमक खाए उपवास रखेंगे। शाम को गन्ने के रस से बनी चावल-गुड़ की खीर और रोटी बनाकर कुल देवता की पूजा होगी। इसके बाद यह प्रसाद खाकर महिलाएं निर्जला व्रत शुरू करेंगी। सूर्यास्त के समय नहर या तालाब के किनारे घी का दीप जलाया जाएगा।
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बड़े विधि विधान से करते हैं ्पूजा
तीसरे दिन बड़ी छठ को डाला छठ, सांध्य घाट, सजिया घाट पूजा भी कहते हैं। व्रत रहने वाली महिलाएं सूर्यास्त के समय परिवार सहित नहर या तालाब आदि के किनारे बने गुंबद पर पूजा अर्चना करेंगी। मांग में सिंदूर भरने के बाद पश्चिम की ओर मुंह कर कमर तक पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ दी जाएगी। पूजा सामग्री से भरे सूप से पूजा अर्चना होगी। इसके बाद रात में घर के आंगन में चौक सजाकर छठ माता और सूर्य की आराधना की जाएगी। चौथे दिन व्रत परायण में महिलाएं तड़के सुबह घाटों पर पहुंचेंगी और पूजा करने के बाद नहर के पानी में उतरकर सूर्य को पहली किरण के साथ अर्घ दिया जाएगा। फिर लोग घर लौटकर शरबत से व्रत का पारण करेंगे। इसके बाद घर के बुजुर्गों के पैर छूकर छठ का प्रसाद लोगों में वितरित किया जाएगा।

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