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Unnao News: पत्रकार पर जानलेवा हमले के मुकदमे में एक आरोपी को हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत
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उन्नाव। गंगाघाट कोतवाली क्षेत्र में पांच साल पहले पत्रकार पर हुए जानलेवा हमले में शामिल एक आरोपी को हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिल गई है। जानलेवा हमले के मुकदमे में दिव्या अवस्थी सहित दस लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इस हमले के तीन दिन बाद ही गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
गंगाघाट कोतवाली क्षेत्र के ब्रह्मनगर झंडा चौराहा निवासी पत्रकार शुभममणि की 19 जून 2019 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हत्या से कुछ दिन पहले शुभममणि और उसके पिता पर मोबाइल शॉप पर जानलेवा हमला भी हुआ था। शुभममणि की तहरीर पर ही गंगाघाट कोतवाली में दिव्या अवस्थी, राघवेंद्र अवस्थी, मोनू खान, शाहनवाज, कौशल किशोर, कपिल, रानू शर्मा, विकास दीक्षित और अमित के खिलाफ जानलेवा हमला सहित कई अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था।
पुलिस ने विवेचना के दौरान पुनीत पांडे को भी आरोपी बनाते हुए न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की थी। इस घटना में पुनीत के अलावा अन्य सभी दोषियों को जमानत मिल चुकी थी। पुनीत अभी पुलिस की पकड़ से दूर था। चार्जशीट दाखिल होने के बाद पुनीत ने जमानत के लिए हाईकोर्ट की शरण ली थी। जहां पुनीत पांडे की ओर से अधिवक्ता धीरज अवस्थी ने पक्ष रखा।
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अधिवक्ता धीरज ने बताया कि पुनीत का नाम पुलिस ने विवेचना के दौरान मुकदमे में बढ़ाया था। जबकि वादी की तहरीर में उसका नाम नहीं था। घटनास्थल की सीसीटीवी फुटेज में भी पुनीत नहीं दिखाई दिया था। इन्हीं तथ्यों के आधार पर पुनीत पांडे की अपील पर हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत दे दी।
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गंगाघाट कोतवाली क्षेत्र के ब्रह्मनगर झंडा चौराहा निवासी पत्रकार शुभममणि की 19 जून 2019 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हत्या से कुछ दिन पहले शुभममणि और उसके पिता पर मोबाइल शॉप पर जानलेवा हमला भी हुआ था। शुभममणि की तहरीर पर ही गंगाघाट कोतवाली में दिव्या अवस्थी, राघवेंद्र अवस्थी, मोनू खान, शाहनवाज, कौशल किशोर, कपिल, रानू शर्मा, विकास दीक्षित और अमित के खिलाफ जानलेवा हमला सहित कई अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था।
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पुलिस ने विवेचना के दौरान पुनीत पांडे को भी आरोपी बनाते हुए न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की थी। इस घटना में पुनीत के अलावा अन्य सभी दोषियों को जमानत मिल चुकी थी। पुनीत अभी पुलिस की पकड़ से दूर था। चार्जशीट दाखिल होने के बाद पुनीत ने जमानत के लिए हाईकोर्ट की शरण ली थी। जहां पुनीत पांडे की ओर से अधिवक्ता धीरज अवस्थी ने पक्ष रखा।
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अधिवक्ता धीरज ने बताया कि पुनीत का नाम पुलिस ने विवेचना के दौरान मुकदमे में बढ़ाया था। जबकि वादी की तहरीर में उसका नाम नहीं था। घटनास्थल की सीसीटीवी फुटेज में भी पुनीत नहीं दिखाई दिया था। इन्हीं तथ्यों के आधार पर पुनीत पांडे की अपील पर हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत दे दी।