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सीएचसी के लेबर रूम में गंदगी भड़कीं एडी
ब्यूरो/अमर उजाला, उन्नाव
Updated Tue, 28 Jul 2015 11:55 PM IST
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नवाबगंज (उन्नाव)। लखनऊ मंडल की स्वास्थ्य एडी डॉ. मिथिलेश चतुर्वेदी को नवाबगंज सीएचसी में निरीक्षण के दौरान गंदगी मिलने मिली। लेबररूम में गंदगी और प्रसव कराने वाले औजारों का रख रखाव सही न होने पर भड़क गईं। इतना ही नहीं ग्यारह कर्मचारी भी अनुपस्थित मिले। जिसमें तीन कर्मचारी निरीक्षण के दौरान ही सीएचसी पहुंच गए।
सीएचसी में अव्यवस्था को देखते हुए एडी ने सीएचसी प्रभारी को फटकार लगाई। इतना ही नहीं अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों का एक दिन का वेतन काटा साथ ही देरी से आने वालों से स्पष्टीकरण भी मांगा है। निरीक्षण के बाद सीएमओ कार्यालय में एसीएमओ के साथ बैठक की और योजनाओं की समीक्षा की।
स्वास्थ्य एडी डॉ. मिथिलेश चतुर्वेदी सुबह नौ बजे नवाबगंज सीएचसी पहुंची। लेबर रूम गंदगी पड़ी हुई थी। लेबर रूम में ही प्रसव कराने के लिए रखे औजारों का रखरखाव ठीक नहीं था। औजार कूड़े की तरह पड़े थे। प्रसव करवाने की यह स्थिति देख उनका पारा चढ़ गया और सीएचसी प्रभारी डॉ. प्रदीप अग्रवाल को फटकार लगाई। जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत लाभार्थियों को दिए जा रहे भोजन व नाश्ते का वितरण भी समय से नहीं पाया। सीएचसी प्रभारी से एजेंसी संचालक के रूटीन वितरण की जानकारी ली। सीएमओ को फोन पर ही निर्देश दिए कि हरदोई की जो एजेंसी यहां नाश्ते का वितरण कराती है उसे चेतावनी पत्र जारी किया जाए।
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डॉक्टर व कर्मचारी मिलाकर ग्यारह रहे अनुपस्थित
लखनऊ मंडल की स्वास्थ्य एडी डॉ. मिथिलेश चतुर्वेदी को निरीक्षण के दौरान डॉ. निवेदिता द्विवेदी, डॉ. राजेश कुमार, डॉ. राजकुमार गौतम, डॉ. अंकिता रस्तोगी, डॉ. रविशेष, डॉ. जियाउलहक के अलावा एएनएम रंजना गुप्ता, एलटी प्रवीन कुमार, कर्मचारियों में सुबोध कुमार, अनूप व जगदीश अनुपस्थित मिले। लगभग पंद्रह मिनट बाद डॉ. सुबोध, डॉ. निवेदिता व डॉ. जियाउलहक सीएचसी पहुंच गए। इसमें अनुपस्थित रहने वाले डॉक्टरों व कर्मचारियों का एक दिन का वेतन काटने तथा देरी से आने वाले डॉक्टरों से स्पष्टीकरण मांगने के निर्देश जारी किए हैं।
मरीजों की कम भर्ती पर जताई नाराजगी
सीएमओ कार्यालय में एसीएमओ की बैठक में एडी स्वास्थ्य ने शासन की संचालित योजनाओं की जानकारी लेने के साथ ही बाह्य रोगियों व अंत:रोगियों का ब्यौरा देखा। इसमें जुलाई में अंत: रोगियों की भर्ती में जिला स्वास्थ्य केंद्रों में कमी पाई। वर्ष 2014 में जुलाई माह में अंत: रोगी विभाग में 5757 मरीजों को भर्ती किया गया था लेकिन इस वर्ष 5680 मरीजों की ही उन्हें संख्या मिली। इस पर उन्होंने नाराजगी जताई और संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए।
वर्जन
जननी सुरक्षा के तहत मिलने वाली धनराशि में भी कमी पाई गई है। पैसा खाते में जाने लगा है। कई प्रसूताओं के खाते खुले नहीं पाए गए। इसलिए सीएमओ डॉ. गीता यादव को निर्देश दिए गए हैं कि वह आशाओं को निर्देश दें कि गर्भवती के तीन माह बीतते ही उसे खाता खुलवाने के लिए प्रेरित किया जाए, ताकि प्रसव से पहले उसका खाता खुल सके और धनराशि उसके खाते में पहुंचे। - डॉ. मिथिलेश, एडी स्वास्थ्य
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सीएचसी में अव्यवस्था को देखते हुए एडी ने सीएचसी प्रभारी को फटकार लगाई। इतना ही नहीं अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों का एक दिन का वेतन काटा साथ ही देरी से आने वालों से स्पष्टीकरण भी मांगा है। निरीक्षण के बाद सीएमओ कार्यालय में एसीएमओ के साथ बैठक की और योजनाओं की समीक्षा की।
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स्वास्थ्य एडी डॉ. मिथिलेश चतुर्वेदी सुबह नौ बजे नवाबगंज सीएचसी पहुंची। लेबर रूम गंदगी पड़ी हुई थी। लेबर रूम में ही प्रसव कराने के लिए रखे औजारों का रखरखाव ठीक नहीं था। औजार कूड़े की तरह पड़े थे। प्रसव करवाने की यह स्थिति देख उनका पारा चढ़ गया और सीएचसी प्रभारी डॉ. प्रदीप अग्रवाल को फटकार लगाई। जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत लाभार्थियों को दिए जा रहे भोजन व नाश्ते का वितरण भी समय से नहीं पाया। सीएचसी प्रभारी से एजेंसी संचालक के रूटीन वितरण की जानकारी ली। सीएमओ को फोन पर ही निर्देश दिए कि हरदोई की जो एजेंसी यहां नाश्ते का वितरण कराती है उसे चेतावनी पत्र जारी किया जाए।
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डॉक्टर व कर्मचारी मिलाकर ग्यारह रहे अनुपस्थित
लखनऊ मंडल की स्वास्थ्य एडी डॉ. मिथिलेश चतुर्वेदी को निरीक्षण के दौरान डॉ. निवेदिता द्विवेदी, डॉ. राजेश कुमार, डॉ. राजकुमार गौतम, डॉ. अंकिता रस्तोगी, डॉ. रविशेष, डॉ. जियाउलहक के अलावा एएनएम रंजना गुप्ता, एलटी प्रवीन कुमार, कर्मचारियों में सुबोध कुमार, अनूप व जगदीश अनुपस्थित मिले। लगभग पंद्रह मिनट बाद डॉ. सुबोध, डॉ. निवेदिता व डॉ. जियाउलहक सीएचसी पहुंच गए। इसमें अनुपस्थित रहने वाले डॉक्टरों व कर्मचारियों का एक दिन का वेतन काटने तथा देरी से आने वाले डॉक्टरों से स्पष्टीकरण मांगने के निर्देश जारी किए हैं।
मरीजों की कम भर्ती पर जताई नाराजगी
सीएमओ कार्यालय में एसीएमओ की बैठक में एडी स्वास्थ्य ने शासन की संचालित योजनाओं की जानकारी लेने के साथ ही बाह्य रोगियों व अंत:रोगियों का ब्यौरा देखा। इसमें जुलाई में अंत: रोगियों की भर्ती में जिला स्वास्थ्य केंद्रों में कमी पाई। वर्ष 2014 में जुलाई माह में अंत: रोगी विभाग में 5757 मरीजों को भर्ती किया गया था लेकिन इस वर्ष 5680 मरीजों की ही उन्हें संख्या मिली। इस पर उन्होंने नाराजगी जताई और संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए।
वर्जन
जननी सुरक्षा के तहत मिलने वाली धनराशि में भी कमी पाई गई है। पैसा खाते में जाने लगा है। कई प्रसूताओं के खाते खुले नहीं पाए गए। इसलिए सीएमओ डॉ. गीता यादव को निर्देश दिए गए हैं कि वह आशाओं को निर्देश दें कि गर्भवती के तीन माह बीतते ही उसे खाता खुलवाने के लिए प्रेरित किया जाए, ताकि प्रसव से पहले उसका खाता खुल सके और धनराशि उसके खाते में पहुंचे। - डॉ. मिथिलेश, एडी स्वास्थ्य