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आडिट टीम को सही नहीं मिला डीजल खर्च का ब्योरा
Unnao
Updated Thu, 10 May 2012 12:00 PM IST
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उन्नाव। रेलवे ओएचई व पीएसई कार्यालय में बुधवार को दोपहर लखनऊ से आई आडिट टीम ने गहन छानबीन की। आडिट टीम ने विभाग को कितना डीजल मिला और कितना खर्च हुआ आदि की जानकारी हासिल की। रजिस्टरों व खर्च के बिलों का मिलान किया। जानकारी मिली है कि आडिट के दौरान टीम के सदस्यों को डीजल से संबंधित आंकड़े दुरुस्त नहीं मिले। इसको लेकर संबंधित अफसरों से पूछताछ की गई। लखनऊ की टीम के धावा बोलने से यहां पूरे दिन हड़कंप मचा रहा।
बुधवार की दोपहर करीब 12 बजे स्थानीय रेलवे ओएचई व पीएसई कार्यालय में आडिट टीम पहुंची। सबसे पहले वरिष्ठ खंड अभियंता उस्मान अली के कक्ष में पहुंची और हर महीने मिलने वाले डीजल का रजिस्टर मंगाया। रजिस्टरों में दर्ज आंकड़ों की जांच पड़ताल की। डीजल कहां-कहां और कब खर्च किया गया इसको बिंदुवार चेक किया। सूत्रों के अनुसार स्टाक की जांच में डीजल ज्यादा मिला जबकि इसे बराबर मिलना चाहिए था। विभाग के अधिकारी डीजल खपत ज्यादा दिखाकर मुख्यालय से मंगाते हैं और कम खर्च करते हैं और काफी मात्रा में डीजल बचा लेते हैं। वहीं आडिट टीम ने ड्यूटी रजिस्टर भी देखा। कर्मचारियों को मिलने वाली वेतन पर्ची के अलावा खर्चों से संबंधित बिलों का भी बारीकी से मिलान किया। खामियां मिलने पर तुरंत उस बिल को लेकर अधिकारियों से पूछताछ की। हालांकि जब आडिट टीम के सदस्यों से जानकारी लेने की कोशिश की गई तो उन्होंने कुछ भी बताने से इंकार कर दिया। यहां तक की अपना नाम तक नहीं बताया। उधर, वरिष्ठ खंड अभियंता उस्मान अली से मामले की जानकारी लेने का प्रयास किया गया तो सामने बैठे टीम के सदस्यों ने इशारे से उन्हें कुछ भी बताने से मना कर दिया।
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बुधवार की दोपहर करीब 12 बजे स्थानीय रेलवे ओएचई व पीएसई कार्यालय में आडिट टीम पहुंची। सबसे पहले वरिष्ठ खंड अभियंता उस्मान अली के कक्ष में पहुंची और हर महीने मिलने वाले डीजल का रजिस्टर मंगाया। रजिस्टरों में दर्ज आंकड़ों की जांच पड़ताल की। डीजल कहां-कहां और कब खर्च किया गया इसको बिंदुवार चेक किया। सूत्रों के अनुसार स्टाक की जांच में डीजल ज्यादा मिला जबकि इसे बराबर मिलना चाहिए था। विभाग के अधिकारी डीजल खपत ज्यादा दिखाकर मुख्यालय से मंगाते हैं और कम खर्च करते हैं और काफी मात्रा में डीजल बचा लेते हैं। वहीं आडिट टीम ने ड्यूटी रजिस्टर भी देखा। कर्मचारियों को मिलने वाली वेतन पर्ची के अलावा खर्चों से संबंधित बिलों का भी बारीकी से मिलान किया। खामियां मिलने पर तुरंत उस बिल को लेकर अधिकारियों से पूछताछ की। हालांकि जब आडिट टीम के सदस्यों से जानकारी लेने की कोशिश की गई तो उन्होंने कुछ भी बताने से इंकार कर दिया। यहां तक की अपना नाम तक नहीं बताया। उधर, वरिष्ठ खंड अभियंता उस्मान अली से मामले की जानकारी लेने का प्रयास किया गया तो सामने बैठे टीम के सदस्यों ने इशारे से उन्हें कुछ भी बताने से मना कर दिया।
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