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धन नहीं लगन से होती है बेहतर परवरिश

Unnao Updated Wed, 02 May 2012 12:00 PM IST
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उन्नाव। मेहनत और ईमानदारी से भी परिवार की अच्छी परवरिश की जा सकती है। यह साबित कर दिखाया है शहर को दो मेहनतकशों ने। चाय की छोटी सी दुकान चलाने वाले अशोक ने अपने बेटे-बेटियों को पढ़ा लिखाया। वहीं पानी के बताशे का ठेला लगाने वाले लक्ष्मीशंकर शर्मा तो अपने एक लड़के को मुंबई से एमबीए करा रहे है।
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आवास विकास कालोनी में रहने वाले अशोक कुमार द्विवेदी चाय की दुकान चलाते हैं। उनके परिवार में पत्नी के अलावा एक लड़का व दो लड़कियंा हैं। महज एक बीघा खेती के मालिक अशोक को साल भर खाने के लिए अनाज भी खरीदना पड़ता है। इसके बावजूद उन्होंने सभी बच्चों को अच्छी तालीम दी है। बेटा अखिलेश कुमार द्विवेदी कानपुर में रहकर आईएएस की तैयारी कर रहा है। छोटी लड़की मोना द्विवेदी बीएड कर रही है। बड़ा दामाद कानपुर के एक कालेज में लेक्चरर है। इसी तरह पं. लक्ष्मीशंकर शर्मा कल्याणी देवी में किराए के मकान में रहते हैं। रायबरेली जिले के भोजपुर कस्बे के मूल निवासी शर्मा ओवरब्रिज के पास पानी के बताशे का ठेला लगाते हैं। उनके पास मात्र पांच बिसवा खेती है। बताशे के ठेले से होने वाली कमाई से उनका परिवार चलता है। शर्मा के परिवार में पत्नी के अलावा दो लड़के व दो लड़कियां हैं। बड़ा लड़का दीपक मुंबई में एमबीए की तैयारी कर रहा है। छोटा लड़का बसंत लाल इंटर में पढ़ रहा है। लक्ष्मीशंकर शर्मा साल मे आठ महीने शहर में बतासे का ठेला लगाते हैं और दो महीने प्रसिद्ध तकिया मेले में खजले की दुकान लगाते हैं।

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