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प्राथमिक शिक्षा बनी प्रयोगशाला

Mon, 24 Nov 2014 05:30 AM IST
Unnao
Unnao Updated Mon, 24 Nov 2014 05:30 AM IST
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उन्नाव। सरकार बदलने के साथ ही प्राथमिक शिक्षा में भी बदलाव कर दिया जाता है। इतना ही नहीं किताबों में बदलाव के साथ-साथ विद्यालय के निर्माण कार्य जैसे मामलों में भी बदलाव हो जाता है। इनका पालन न करने पर टीचरों का निलंबन कर दिया जाता है। ऐसी दशा में वह नियमों का पालन करने में लगभग पूरा समय गुजार देते हैं। इससे न तो वह विद्यालय की गुणवत्ता सुधर पाती है और न ही बच्चों की पढ़ाई अच्छी हो पाती है।
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परिषदीय विद्यालयों में हर पांच साल में कुछ न कुछ बदलाव कर दिया जाता है। बच्चाें की ड्रेस बदलने के साथ ही पुस्तकें व निर्माण कार्य में भी कुछ न कुछ बदलाव हो जाता है। इससे टीचर पूरे वर्ष इसी में उलझा रहता है। यदि कोई कमी पाई जाती है तो प्रधान टीचर व इंचार्ज टीचर का निलंबन कर दिया जाता है। इससे बच्चों की पढ़ाई पर टीचरों का ध्यान आकर्षित ही नहीं हो पाता।
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टीचरों ने बताया कि बसपा शासनकाल में बच्चों की ड्रेस सिलेटी पैंट व आसमानी शर्ट थी। सपा सरकार आते ही खाकी ड्रेस कर दी गई। इतना ही नहीं पैसा भी कम कर दिए गए साथ ही गुणवत्ता भी मांगी जाती है। इसके अलावा टीचरों से निर्माण कार्य भी कराया जाता। बसपा शासनकाल में विद्यालय का निर्माण कार्य ग्राम प्रधान व भवन प्रभारी की जिम्मेदारी में होता था सपा शासनकाल में प्रबंध समिति की जिम्मे कर दिया गया है। मानक के अनुसार सरकार निर्माण कार्य के लिए बजट भी नहीं देती। मजबूरन टीचर को अपनी जेब से निर्माण कराना पड़ रहा है न कराने की दशा में टीचरों का निलंबन कर दिया जाता है। ऐसे में वह बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान देगा या फिर निर्माण कार्य कराएगा। बसपा शासनकाल में गणित की दो पुस्तकें चलती थीं। सपा सरकार में गणित की एक पुस्तक कर देने के साथ ही कोर्स भी बदल दिया गया। इतना ही नहीं हर वर्ष परीक्षा मई में कराई जाती थी लेकिन इस वर्ष मार्च के अंत तक कराने की बात कही जा रही है। ऐसे में कोर्स कैसे पूरा होगा।
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जब तक टीचरों को एमडीएम व निर्माण कार्य से मुक्त नहीं किया जाएगा तब तक पढ़ाई की गुणवत्ता में सुधार नहीं हो सकता। उनका कहना था कि कई ऐसे विद्यालय हैं जहां छात्रों की संख्या सौ या उससे अधिक है वहां बच्चों को गुणवत्ता युक्त एमडीएम खिलाने में ही लगभग डेढ़ घंटे लग जाते हैं। इसलिए टीचर पढ़ाई से अधिक एमडीएम पर ध्यान देता है। - बृजेश पांडेय, उप्र प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष


यदि अच्छी पढ़ाई करानी है तो पहले की तरह टीचर को स्वच्छंद कर उससे सिर्फ पढ़ाई करवानी चाहिए। कई कार्यों को कराने के बाद टीचर पढ़ाई पर ध्यान कैसे दे सकता है। वह भी तब जब जरा सी कमी पाए जाने पर उसका निलंबन कर दिया जाता हो। - विनय त्रिपाठी, उप्र जूनियर हाईस्कूल पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ के संयुक्त मंत्री
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