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ओडीएफ घोषित होने में बजट का ब्रेक
Updated Wed, 23 Aug 2017 12:31 AM IST
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नवाबगंज। 31 अगस्त तक ब्लाक के खुले में शौच मुक्त होने पर संशय हैं। प्रशासन ब्लाक को हर हाल में ओडीएफ घोषित करने के लिए जोर लगाए है, वहीं ठीक इसके विपरीत पंचायतीराज विभाग की ओर से ग्राम पंचायतों के खातों में शौचालयों के निर्माण के लिए पैसा नहीं पहुंचा है। इसी कारण लेबर, मिस्त्री के साथ सामग्री नहीं मिल पा रही है।
नवाबगंज विकासखंड क्षेत्र को ओडीएफ घोषित करने के लिए यहां की 75 ग्राम पंचायतों में लगभग 21 हजार शौचालयों का निर्माण किया जाना है। इसमें अधिकांश गांवों में शौचालय निर्माण का काम पैसा न मिलने से अधर में लटक गया है।
कुछ गांवों में तो प्रधानों ने अपनी तरफ से निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष आधे शौचालयों का निर्माण पूरा करा दिया है लेकिन शेष के लिए पैसा न मिलने से अब ट्रेडर्स वालों ने उधार निर्माण सामग्री देने से मना कर दिया है। साथ ही बिना पैसे के लिए मिस्त्री व लेबरों ने भी काम करने से हाथ खड़े कर दिए हैं। ग्राम प्रधानों का आरोप है कि शासन को शत प्रतिशत शौचालय चाहिए। जिन शौचालयों का निर्माण किया जा चुका है।
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उनका भुगतान भी अभी तक नहीं किया गया है। प्रधानों ने बताया कि कई बार अधिकारियों से मिलकर इस बारे में बात की गई लेकिन आश्वासन की घुट्टी के सिवा कुछ नहीं मिला है। ब्लाक के सूत्रों की मानें तो ब्लाक को ओडीएफ घोषित किए जाने की अंतिम तिथि 31 अगस्त रखी गई है। अब जबकि निर्धारित तिथि को लगभग एक सप्ताह का समय शेष है। ऐसे में बिना पैसे के लिए शत प्रतिशत शौचालयों का निर्माण कार्य पूरा होने पर संशय हैं।
पांच प्रतिशत ही बन पाए शौचालय
ब्लाक सूत्रों की मानें तो 31 अगस्त तक विकासखंड को खुले में शौच मुक्त किए जाने के लिए लगभग 21 हजार शौचालयों का निर्माण कराया जाना है। जबकि मौजूदा स्थिति यह है कि अभी तक लगभग एक हजार के आसपास ही शौचालय बन पाए हैं। ऐसे में अगले कुछ दिनों में स्थितियां और ज्यादा खराब हो सकती हैं क्योंकि लक्ष्य के सापेक्ष शौचालय निर्माण के लिए पंचायतीराज विभाग पैसा जारी नहीं कर पा रहा है। मालूम हो कि प्रति शौचालय 12 हजार रुपये की धनराशि दी जा रही है। बीडीओ निर्मल कुमार द्विवेदी ने बताया कुछ गांवों को पैसा न मिलने की जानकारी हुई है।
तीन अन्य ब्लाकों का भी बुरा हाल
31 अगस्त तक नवाबगंज के साथ ही सिकंदरपुर करन, बीघापुर व असोहा को ओडीएफ घोषित किया जाना है। इन ब्लाकों में क्रमश 22000, 13000 व 16000 शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य दिया गया है। तीनों ब्लाकों में पैसा न मिलने से शौचालय निर्माण का काम तेजी नहीं पकड़ पा रहा है। ऐसे में निर्धारित समय में चार ब्लाकों का खुले में शौच मुक्त हो पाना नजर नहीं आ रहा है। शौचालय निर्माण के लिए इन ब्लाकों में दूसरे विकास खंडों के अधिकारियों की भी ड्यूटी लगा दी गई है। जिससे उनके मूल ब्लाकों में मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास समेत अन्य योजनाओं की प्रगति खराब होती जा रही है।
-पैसा न मिलने से अधर में लटका शौचालयों का निर्माण
-लेबर, मिस्त्री के साथ नहीं मिल पा रहा निर्माण सामग्री
अमर उजाला ब्यूरो
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नवाबगंज विकासखंड क्षेत्र को ओडीएफ घोषित करने के लिए यहां की 75 ग्राम पंचायतों में लगभग 21 हजार शौचालयों का निर्माण किया जाना है। इसमें अधिकांश गांवों में शौचालय निर्माण का काम पैसा न मिलने से अधर में लटक गया है।
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कुछ गांवों में तो प्रधानों ने अपनी तरफ से निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष आधे शौचालयों का निर्माण पूरा करा दिया है लेकिन शेष के लिए पैसा न मिलने से अब ट्रेडर्स वालों ने उधार निर्माण सामग्री देने से मना कर दिया है। साथ ही बिना पैसे के लिए मिस्त्री व लेबरों ने भी काम करने से हाथ खड़े कर दिए हैं। ग्राम प्रधानों का आरोप है कि शासन को शत प्रतिशत शौचालय चाहिए। जिन शौचालयों का निर्माण किया जा चुका है।
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उनका भुगतान भी अभी तक नहीं किया गया है। प्रधानों ने बताया कि कई बार अधिकारियों से मिलकर इस बारे में बात की गई लेकिन आश्वासन की घुट्टी के सिवा कुछ नहीं मिला है। ब्लाक के सूत्रों की मानें तो ब्लाक को ओडीएफ घोषित किए जाने की अंतिम तिथि 31 अगस्त रखी गई है। अब जबकि निर्धारित तिथि को लगभग एक सप्ताह का समय शेष है। ऐसे में बिना पैसे के लिए शत प्रतिशत शौचालयों का निर्माण कार्य पूरा होने पर संशय हैं।
पांच प्रतिशत ही बन पाए शौचालय
ब्लाक सूत्रों की मानें तो 31 अगस्त तक विकासखंड को खुले में शौच मुक्त किए जाने के लिए लगभग 21 हजार शौचालयों का निर्माण कराया जाना है। जबकि मौजूदा स्थिति यह है कि अभी तक लगभग एक हजार के आसपास ही शौचालय बन पाए हैं। ऐसे में अगले कुछ दिनों में स्थितियां और ज्यादा खराब हो सकती हैं क्योंकि लक्ष्य के सापेक्ष शौचालय निर्माण के लिए पंचायतीराज विभाग पैसा जारी नहीं कर पा रहा है। मालूम हो कि प्रति शौचालय 12 हजार रुपये की धनराशि दी जा रही है। बीडीओ निर्मल कुमार द्विवेदी ने बताया कुछ गांवों को पैसा न मिलने की जानकारी हुई है।
तीन अन्य ब्लाकों का भी बुरा हाल
31 अगस्त तक नवाबगंज के साथ ही सिकंदरपुर करन, बीघापुर व असोहा को ओडीएफ घोषित किया जाना है। इन ब्लाकों में क्रमश 22000, 13000 व 16000 शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य दिया गया है। तीनों ब्लाकों में पैसा न मिलने से शौचालय निर्माण का काम तेजी नहीं पकड़ पा रहा है। ऐसे में निर्धारित समय में चार ब्लाकों का खुले में शौच मुक्त हो पाना नजर नहीं आ रहा है। शौचालय निर्माण के लिए इन ब्लाकों में दूसरे विकास खंडों के अधिकारियों की भी ड्यूटी लगा दी गई है। जिससे उनके मूल ब्लाकों में मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास समेत अन्य योजनाओं की प्रगति खराब होती जा रही है।
-पैसा न मिलने से अधर में लटका शौचालयों का निर्माण
-लेबर, मिस्त्री के साथ नहीं मिल पा रहा निर्माण सामग्री
अमर उजाला ब्यूरो