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अवैध पट्टे को चकबंदी विभाग ने किया खारिज
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उन्नाव। सदर तहसील की ग्रामसभा डीह में करीब 40 साल पहले अवैध तरीके से हुए पट्टे को खारिज कर दिया गया है। चकबंदी अधिकारी की जांच पर मामला सही मिलने पर कार्रवाई की गई है।
ग्राम सभा डीह निवासी पवन सिंह व ललऊखेड़ा निवासी बरातीलाल चौरसिया ने ग्राम सभा की ऊसर श्रेणी की करीब डेढ़ हेक्टेयर जमीन को 7 सितंबर 1975 को गांव के ही कृष्णपाल सिंह (पूर्व प्रधान व मौजूदा प्रधान के पति) के नाम पट्टा होना दिखाया गया था। पट्टे के समय जो जन्मतिथि दिखाई गई है उसमें उम्र 11 साल ही निकल रही है। इतनी कम उम्र में किसी को पट्टा नहीं किया जा सकता है।
मामले की गंभीरता को लेते हुए डीएम देवेंद्र कुमार पांडेय ने जांच चकबंदी अधिकारी आलोक सिंह को दी थी। ग्राम प्रधान के पति कृष्णपाल सिंह द्वारा इस अवैध पट्टे पर प्लाटिंग कराना भी पाया गया। चकबंदी अधिकारी आलोक सिंह ने बताया कि जो पट्टा दिखाया गया है वह तसहील में भी दर्ज नहीं है। जांच में अवैध मिलने पर उसे निरस्त कर दिया गया है। रिपोर्ट डीएम को भेजी है। कार्रवाई को लेकर कृष्णपाल सिंह ने बताया कि पट्टा नियमानुसार ही हुआ था। वह न्यायालय की शरण लेंगे।
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-डीह ग्राम प्रधान के पति के नाम 40 साल पहले हुआ था पट्टा
-ग्रामीणों ने आवंटन के समय उनकी उम्र कम होने की शिकायत की थी
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ग्राम सभा डीह निवासी पवन सिंह व ललऊखेड़ा निवासी बरातीलाल चौरसिया ने ग्राम सभा की ऊसर श्रेणी की करीब डेढ़ हेक्टेयर जमीन को 7 सितंबर 1975 को गांव के ही कृष्णपाल सिंह (पूर्व प्रधान व मौजूदा प्रधान के पति) के नाम पट्टा होना दिखाया गया था। पट्टे के समय जो जन्मतिथि दिखाई गई है उसमें उम्र 11 साल ही निकल रही है। इतनी कम उम्र में किसी को पट्टा नहीं किया जा सकता है।
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मामले की गंभीरता को लेते हुए डीएम देवेंद्र कुमार पांडेय ने जांच चकबंदी अधिकारी आलोक सिंह को दी थी। ग्राम प्रधान के पति कृष्णपाल सिंह द्वारा इस अवैध पट्टे पर प्लाटिंग कराना भी पाया गया। चकबंदी अधिकारी आलोक सिंह ने बताया कि जो पट्टा दिखाया गया है वह तसहील में भी दर्ज नहीं है। जांच में अवैध मिलने पर उसे निरस्त कर दिया गया है। रिपोर्ट डीएम को भेजी है। कार्रवाई को लेकर कृष्णपाल सिंह ने बताया कि पट्टा नियमानुसार ही हुआ था। वह न्यायालय की शरण लेंगे।
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-डीह ग्राम प्रधान के पति के नाम 40 साल पहले हुआ था पट्टा
-ग्रामीणों ने आवंटन के समय उनकी उम्र कम होने की शिकायत की थी