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Unnao News: जिला महिला अस्पताल में लगाए 15 फायर सिलिंडर
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उन्नाव। शासन की सख्ती के बाद जिला महिला अस्पताल के एसएनसीयू में कार्बन डाइऑक्साइड वाले दो और फायर इंस्टीग्यूशर (सिलिंडर) लगाए गए हैं। अब यहां कुल चार सिलिंडर हो गए हैं। वहीं, महिला अस्पताल में कार्बन डाइऑक्साइड वाले 15 नए सिलिंडर लगाए गए हैं। अब यहां कुल 33 फायर इंस्टीग्यूशर हो गए हैं। अग्निशमन अधिकारी ने पुरुष अस्पताल में भी इतने ही सिलिंडर की आवश्यकता बताई है। वहीं, सीएमस ने कार्यदायी संस्था को फायर फाइटिंग सिस्टम का काम जल्द पूरा करने के लिए कहा है।
जिला महिला और पुरुष अस्पताल में रोजाना 2000 मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं। वहीं, एसएनसीयू में 12 बेड पर केवल दो फायर इंस्टीग्यूशर लगे थे। इसके अलावा किसी भी वार्ड में फायर फाइटिंग सिस्टम का काम पूरा नहीं हुआ है। आग लगने पर केवल फायर इंस्टीग्यूशर की सहारा हैं। इस पर अमर उजाला ने 20 नवंबर के अंक में पड़ताल करते हुए प्रमुखता खबर प्रकाशित की। इसके बाद सीएमओ ने जिला महिला, पुरुष अस्पताल और 113 निजी नर्सिंग होम में फायर ऑडिट के लिए एफएसओ को पत्र लिखा।
बुधवार को जिला महिला अस्पताल का कार्बन डाइऑक्साइज गैस वाले 15 नए फायर इंस्टीग्यूशर लगवाए गए हैं। इसमें एसएनसीयू में दो और सभी वार्ड में दो-दो सिलिंडर और लगाए गए हैं। यहां अब कुल 33 सिलिंडर उपलब्ध हैं।
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कार्बन डाइऑक्साइड वाले सिलिंडर ज्यादा कारगर
अग्निशमन अधिकारी शिवराम यादव ने बताया कि अभी तक जिला महिला अस्पताल में जो भी फायर इंस्टीग्यूशर लगे थे उनमें ज्यादातर पाउडर केमिकल वाले हैं। इसके प्रयोग में निकलने वाला पाउडर घटना वाले स्थान के आसपास की ऑक्सीजन को खत्म कर देता है और आग बुझ जाती है। इनके प्रयोग से धुंध छा जाता है, इससे देखने में भी दिक्कत होती है। जबकि कार्बन डाइऑक्साइड गैस वाले सिलिंडर में केवल गैस होने से यह आग को तत्काल बुझा देती है।
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बोले जिम्मेदार
जिला महिला और पुरुष अस्पताल के अलावा 113 निजी नर्सिंग होम में फायर ऑडिट के लिए एफएसओ को पत्र लिख गया है। उनकी रिपोर्ट के आधार पर सुधार के लिए जो भी जरूरी होंगे कदम उठाए जाएंगे।
- डॉ. सत्यप्रकाश, सीएमओ
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अस्पताल में फायर इंस्टीग्यूशर भी बढ़ाए गए हैं। वहीं, निर्माण एजेंसी को फायर फाइटिंग का काम जल्द पूरा करने को फिर पत्र भेजा गया है, साथ ही निदेशालय को भी रिपोर्ट भेजी गई है।
- डॉ. फौजिया अंजुम, सीएमएस, महिला जिला अस्पताल
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जिला महिला और पुरुष अस्पताल में रोजाना 2000 मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं। वहीं, एसएनसीयू में 12 बेड पर केवल दो फायर इंस्टीग्यूशर लगे थे। इसके अलावा किसी भी वार्ड में फायर फाइटिंग सिस्टम का काम पूरा नहीं हुआ है। आग लगने पर केवल फायर इंस्टीग्यूशर की सहारा हैं। इस पर अमर उजाला ने 20 नवंबर के अंक में पड़ताल करते हुए प्रमुखता खबर प्रकाशित की। इसके बाद सीएमओ ने जिला महिला, पुरुष अस्पताल और 113 निजी नर्सिंग होम में फायर ऑडिट के लिए एफएसओ को पत्र लिखा।
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बुधवार को जिला महिला अस्पताल का कार्बन डाइऑक्साइज गैस वाले 15 नए फायर इंस्टीग्यूशर लगवाए गए हैं। इसमें एसएनसीयू में दो और सभी वार्ड में दो-दो सिलिंडर और लगाए गए हैं। यहां अब कुल 33 सिलिंडर उपलब्ध हैं।
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कार्बन डाइऑक्साइड वाले सिलिंडर ज्यादा कारगर
अग्निशमन अधिकारी शिवराम यादव ने बताया कि अभी तक जिला महिला अस्पताल में जो भी फायर इंस्टीग्यूशर लगे थे उनमें ज्यादातर पाउडर केमिकल वाले हैं। इसके प्रयोग में निकलने वाला पाउडर घटना वाले स्थान के आसपास की ऑक्सीजन को खत्म कर देता है और आग बुझ जाती है। इनके प्रयोग से धुंध छा जाता है, इससे देखने में भी दिक्कत होती है। जबकि कार्बन डाइऑक्साइड गैस वाले सिलिंडर में केवल गैस होने से यह आग को तत्काल बुझा देती है।
बोले जिम्मेदार
जिला महिला और पुरुष अस्पताल के अलावा 113 निजी नर्सिंग होम में फायर ऑडिट के लिए एफएसओ को पत्र लिख गया है। उनकी रिपोर्ट के आधार पर सुधार के लिए जो भी जरूरी होंगे कदम उठाए जाएंगे।
- डॉ. सत्यप्रकाश, सीएमओ
अस्पताल में फायर इंस्टीग्यूशर भी बढ़ाए गए हैं। वहीं, निर्माण एजेंसी को फायर फाइटिंग का काम जल्द पूरा करने को फिर पत्र भेजा गया है, साथ ही निदेशालय को भी रिपोर्ट भेजी गई है।
- डॉ. फौजिया अंजुम, सीएमएस, महिला जिला अस्पताल