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एक देसी गाय से 30 एकड़ होती जीरो बजट की खेती : डॉ. सीके त्रिपाठी
Sat, 19 Jul 2025 12:20 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Sat, 19 Jul 2025 12:20 AM IST
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कृषि उत्पादन मंडी समिति अमहट में आयोजित किसान गोष्ठी को संबोधित करते कृषि वैज्ञानिक डॉ. सीके
सुल्तानपुर। कृषि उत्पादन मंडी समिति, अमहट में शुक्रवार को जीरो बजट प्राकृतिक खेती पर किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में कृषि वैज्ञानिक ने प्राकृतिक खेती करने के लिए किसानों को प्रेरित किया।
कमला नेहरू कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ. सीके त्रिपाठी ने कहा कि जीरो बजट की प्राकृतिक खेती देसी गाय के गोबर और गोमूत्र पर आधारित है। एक देसी गाय के गोबर और गोमूत्र से एक किसान 30 एकड़ भूमि में जीरो बजट खेती कर सकता है। देसी प्रजाति के गोवंश के गोबर और उसके मूत्र से जीवामृत, घनजीवामृत व जामन बीजामृत बनाया जाता है। जीवामृत का महीने में एक या फिर दो बार खेत में छिड़काव किया जा सकता है। बीजामृत का इस्तेमाल बीजों को उपचारित करने में किया जाता है।
इस विधि से खेती करने वाले किसान को बाजार से किसी प्रकार की खाद और कीटनाशक रसायन खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती है। मंडी सचिव रवींद्र कुमार वर्मा ने किसानों को उनके उत्पाद बेचने के बारे जानकारी दी। इस मौके पर प्रगतिशील किसान राम नारायण उपाध्याय व कई लोग मौजूद रहे।
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कमला नेहरू कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ. सीके त्रिपाठी ने कहा कि जीरो बजट की प्राकृतिक खेती देसी गाय के गोबर और गोमूत्र पर आधारित है। एक देसी गाय के गोबर और गोमूत्र से एक किसान 30 एकड़ भूमि में जीरो बजट खेती कर सकता है। देसी प्रजाति के गोवंश के गोबर और उसके मूत्र से जीवामृत, घनजीवामृत व जामन बीजामृत बनाया जाता है। जीवामृत का महीने में एक या फिर दो बार खेत में छिड़काव किया जा सकता है। बीजामृत का इस्तेमाल बीजों को उपचारित करने में किया जाता है।
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इस विधि से खेती करने वाले किसान को बाजार से किसी प्रकार की खाद और कीटनाशक रसायन खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती है। मंडी सचिव रवींद्र कुमार वर्मा ने किसानों को उनके उत्पाद बेचने के बारे जानकारी दी। इस मौके पर प्रगतिशील किसान राम नारायण उपाध्याय व कई लोग मौजूद रहे।
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