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22.53 लाख की वित्तीय अनियमितता में ग्राम प्रधान सस्पेंड
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सुल्तानपुर। कूरेभार की महमूदपुर ग्राम पंचायत के प्रधान को जिला मजिस्ट्रेट ने 22.53 लाख की वित्तीय अनियमितता में बुधवार को सस्पेंड कर दिया। प्रधान पर पिछले कार्यकाल में वित्तीय अनियमितता का आरोप पाया गया है। डीएम ने प्रकरण में आरोपी पंचायत सचिव व तकनीकी सहायक के खिलाफ भी कार्रवाई का आदेश दिया है। निलंबित करने के साथ ही डीएम ने अंतिम जांच के लिए दो अधिकारियों की टीम गठित कर दी है।
पंचायत निर्वाचन के बाद मंगलवार को ग्राम प्रधान के खिलाफ पहली कार्रवाई शुरू हुई है। गांव निवासी प्रदीप मिश्र की शिकायत पर डीएम ने ग्राम पंचायत में कराए गए कार्यों की जांच कराई थी। जांच में मुस्लिम बाग से बस्ती तक इंटरलॉकिंग में पांच लाख 96 हजार, बाग से शोभनाथ के खेत तक इंटरलॉकिंग कार्य में पांच लाख 10 हजार व पाल के खेत से रामरती स्कूल तक इंटरलॉकिंग में छह लाख 20 हजार रुपये की वित्तीय अनियमितता मिली।
इसके साथ ही पौसलवा से गंगाराम के चक तक मिट्टी-खड़ंजा कार्य में एक लाख 21 हजार, पंचायत भवन की इंटरलॉकिंग में दो लाख सात हजार, विश्वनाथ पाल के खेत के समतलीकरण में 43 हजार, महेंद्र के खेत के समतलीकरण में करीब 72 हजार, राजेंद्र के खेत के समतलीकरण में 81 हजार की राशि का दुरुपयोग पाया गया। इस तरह कुल 22 लाख 53 हजार रुपये का दुरुपयोग किया जाना पाया गया है।
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पूर्व के कार्यकाल की जांच में प्रथम दृष्टया सरकारी राशि का दुरुपयोग पाए जाने पर डीएम रवीश गुप्ता ने बुधवार को ग्राम प्रधान जगन्नाथ यादव का वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिया। डीएम ने अंतिम जांच जिला प्रशिक्षण अधिकारी व एक्सईएन जलनिगम को सौंपी है। इसके साथ ही जिला पंचायतराज अधिकारी को जांच में आरोपी पाई गई सेक्रेटरी शगुफ्ता शबनम व डीसी मनरेगा को जांच में आरोपी मिले तकनीकी सहायक के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का आदेश दिया है।
ग्राम पंचायत में तीन सदस्यीय कमेटी गठित करने के लिए सहायक विकास अधिकारी पंचायत कूरेभार से ग्राम पंचायत सदस्यों की शैक्षिक योग्यता समेत पूरा विवरण मांगा है। जिला पंचायतराज अधिकारी आरके भारती ने बताया कि ये कार्य ग्राम प्रधान ने इसके पहले के कार्यकाल में कराए थे। मई में संपन्न पंचायत चुुनाव में जगन्नाथ यादव दोबारा प्रधान निर्वाचित होकर आए हैं, इसलिए उनके खिलाफ कार्रवाई की गई है।
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पंचायत निर्वाचन के बाद मंगलवार को ग्राम प्रधान के खिलाफ पहली कार्रवाई शुरू हुई है। गांव निवासी प्रदीप मिश्र की शिकायत पर डीएम ने ग्राम पंचायत में कराए गए कार्यों की जांच कराई थी। जांच में मुस्लिम बाग से बस्ती तक इंटरलॉकिंग में पांच लाख 96 हजार, बाग से शोभनाथ के खेत तक इंटरलॉकिंग कार्य में पांच लाख 10 हजार व पाल के खेत से रामरती स्कूल तक इंटरलॉकिंग में छह लाख 20 हजार रुपये की वित्तीय अनियमितता मिली।
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इसके साथ ही पौसलवा से गंगाराम के चक तक मिट्टी-खड़ंजा कार्य में एक लाख 21 हजार, पंचायत भवन की इंटरलॉकिंग में दो लाख सात हजार, विश्वनाथ पाल के खेत के समतलीकरण में 43 हजार, महेंद्र के खेत के समतलीकरण में करीब 72 हजार, राजेंद्र के खेत के समतलीकरण में 81 हजार की राशि का दुरुपयोग पाया गया। इस तरह कुल 22 लाख 53 हजार रुपये का दुरुपयोग किया जाना पाया गया है।
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पूर्व के कार्यकाल की जांच में प्रथम दृष्टया सरकारी राशि का दुरुपयोग पाए जाने पर डीएम रवीश गुप्ता ने बुधवार को ग्राम प्रधान जगन्नाथ यादव का वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिया। डीएम ने अंतिम जांच जिला प्रशिक्षण अधिकारी व एक्सईएन जलनिगम को सौंपी है। इसके साथ ही जिला पंचायतराज अधिकारी को जांच में आरोपी पाई गई सेक्रेटरी शगुफ्ता शबनम व डीसी मनरेगा को जांच में आरोपी मिले तकनीकी सहायक के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का आदेश दिया है।
ग्राम पंचायत में तीन सदस्यीय कमेटी गठित करने के लिए सहायक विकास अधिकारी पंचायत कूरेभार से ग्राम पंचायत सदस्यों की शैक्षिक योग्यता समेत पूरा विवरण मांगा है। जिला पंचायतराज अधिकारी आरके भारती ने बताया कि ये कार्य ग्राम प्रधान ने इसके पहले के कार्यकाल में कराए थे। मई में संपन्न पंचायत चुुनाव में जगन्नाथ यादव दोबारा प्रधान निर्वाचित होकर आए हैं, इसलिए उनके खिलाफ कार्रवाई की गई है।