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लगातार दूसरी जीत दर्ज करने वाली पहली महिला बनीं ऊषा सिंह
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सुल्तानपुर। जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में शनिवार को जीत दर्ज कर ऊषा सिंह लगातार दूसरी बार अध्यक्ष बनने वाली पहली महिला बन गई हैं। अध्यक्ष के चुनाव में अभी तक कोई महिला लगातार दो बार जिला पंचायत अध्यक्ष नहीं बन सकी हैं।
जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर ऊषा सिंह पहली बार सपा प्रत्याशी के तौर पर 14 जनवरी 2016 में निर्वाचित हुईं थीं। उस समय प्रदेश में सपा की सरकार थी। वर्ष 2017 में भाजपा के सत्ता में आने पर ऊषा सिंह ने पाला बदल लिया।
भाजपा की शरण में पहुंच जाने पर वे उपचुनाव में भी विजयी हो गईं। इस बार वे भाजपा प्रत्याशी के तौर पर डीडीसी का चुनाव लड़ा था। महिला के लिए सीट आरक्षित होने पर पार्टी ने उन्हें फिर अध्यक्ष पद के प्रत्याशी के रूप में उतारा। प्रतिष्ठापूर्ण चुनाव में कांटे की टक्कर में ऊषा सिंह दोबारा जीत दर्ज करने में सफल हुई हैं।
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जिला पंचायत के चुनावी इतिहास में अभी तक कोई महिला अंतराल पर भी दोबारा अध्यक्ष नहीं बन सकी है। आजादी के पहले वर्ष 1932 में जिला पंचायत परिषद के गठन के बाद पहले अध्यक्ष 24 सितंबर 1932 को एसपी शाही हुए थे। वर्ष 1937 से 1948 तक लगातार करीब 11 वर्ष तक बाबू गनपत सहाय एडवोकेट अध्यक्ष रहे।
वर्ष 1948 में पं. देवकलीदीन शर्मा अध्यक्ष निर्वाचित हुए तो वे लगातार फरवरी 1969 तक करीब 21 वर्ष अध्यक्ष रहे। अभी तक पं. देवकलीदीन का सबसे लंबा कार्यकाल रहा। हालांकि तब जिला परिषद हुआ करता था और प्रमुख लोग वोट किया करते थे।
इसके बाद काफी दिनों तक आईएएस अधिकारियों के पास प्रभार रहा। वर्ष 1974 से 1977 तक राजकिशोर सिंह अध्यक्ष रहे। इसके बाद चुनाव हुए तो वर्ष 1989 से 1995 तक गिरिराज सिंह अध्यक्ष रहे। पहली बार वर्ष 1995 में जानकी पाल महिला अध्यक्ष के रूप में चुनी गईं।
इसके बाद अमीता सिंह, राजकिशोर सिंह, गीता सरोज, सीताराम वर्मा व पृथ्वीपाल अध्यक्ष रहे। 14 जनवरी 2016 को ऊषा सिंह के हाथों में जिला पंचायत अध्यक्ष की सत्ता आई तो इस बार चुनाव में बाजी मारकर उन्होंने अपनी सत्ता कायम रखी।
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जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर ऊषा सिंह पहली बार सपा प्रत्याशी के तौर पर 14 जनवरी 2016 में निर्वाचित हुईं थीं। उस समय प्रदेश में सपा की सरकार थी। वर्ष 2017 में भाजपा के सत्ता में आने पर ऊषा सिंह ने पाला बदल लिया।
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भाजपा की शरण में पहुंच जाने पर वे उपचुनाव में भी विजयी हो गईं। इस बार वे भाजपा प्रत्याशी के तौर पर डीडीसी का चुनाव लड़ा था। महिला के लिए सीट आरक्षित होने पर पार्टी ने उन्हें फिर अध्यक्ष पद के प्रत्याशी के रूप में उतारा। प्रतिष्ठापूर्ण चुनाव में कांटे की टक्कर में ऊषा सिंह दोबारा जीत दर्ज करने में सफल हुई हैं।
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जिला पंचायत के चुनावी इतिहास में अभी तक कोई महिला अंतराल पर भी दोबारा अध्यक्ष नहीं बन सकी है। आजादी के पहले वर्ष 1932 में जिला पंचायत परिषद के गठन के बाद पहले अध्यक्ष 24 सितंबर 1932 को एसपी शाही हुए थे। वर्ष 1937 से 1948 तक लगातार करीब 11 वर्ष तक बाबू गनपत सहाय एडवोकेट अध्यक्ष रहे।
वर्ष 1948 में पं. देवकलीदीन शर्मा अध्यक्ष निर्वाचित हुए तो वे लगातार फरवरी 1969 तक करीब 21 वर्ष अध्यक्ष रहे। अभी तक पं. देवकलीदीन का सबसे लंबा कार्यकाल रहा। हालांकि तब जिला परिषद हुआ करता था और प्रमुख लोग वोट किया करते थे।
इसके बाद काफी दिनों तक आईएएस अधिकारियों के पास प्रभार रहा। वर्ष 1974 से 1977 तक राजकिशोर सिंह अध्यक्ष रहे। इसके बाद चुनाव हुए तो वर्ष 1989 से 1995 तक गिरिराज सिंह अध्यक्ष रहे। पहली बार वर्ष 1995 में जानकी पाल महिला अध्यक्ष के रूप में चुनी गईं।
इसके बाद अमीता सिंह, राजकिशोर सिंह, गीता सरोज, सीताराम वर्मा व पृथ्वीपाल अध्यक्ष रहे। 14 जनवरी 2016 को ऊषा सिंह के हाथों में जिला पंचायत अध्यक्ष की सत्ता आई तो इस बार चुनाव में बाजी मारकर उन्होंने अपनी सत्ता कायम रखी।