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सुल्तानपुर ने जीती कोरोना से पहली जंग

Sun, 22 Mar 2020 09:06 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 22 Mar 2020 09:06 PM IST
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The silence of the city indicated the courage to fight against Corona
सुल्तानपुर। सूरज की पौ फूटने के साथ ही कोरोना से जंग की कवायद में आम जनता के योगदान के परीक्षा की घड़ी भी करीब आ पहुंची थी। देखना यह था कि शासन-प्रशासन के जनता कर्फ्यू की तैयारियों का नतीजा क्या होगा। समय के साथ घड़ी की सुइयां आखिर सात पर पहुंच गईं।
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बाहर न कोई हलचल थी, न ही रोजमर्रा की तरह गाड़ियों की आवाजाही की आवाज। प्रयागराज-अयोध्या हाईवे पर सन्नाटा पसरा था। सीधी सड़क पर दूर-दूर तक न कोई वाहन दिख रहा था न ही पैदल राहगीर। पयागीपुर चौराहे पर पुलिस, होमगार्ड और पीआरडी के करीब दस जवान रोजमर्रा की तरह ड्यूटी की औपचारिकता निभा रहे थे।
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प्रयागराज-अयोध्या और लखनऊ-वाराणसी हाईवे को क्रॉस करने वाले इस चौराहे का नजारा ऐसा था कि लग ही नहीं रहा था कि यहीं से हजारों वाहन गुजरते हैं और भीषण जाम लगता है। निर्माणाधीन हाईवे के नीचे रोज खड़े होने वाले टेंपो और ई-रिक्शा नदारद थे...न ही गोलाघाट, दरियापुर, दीवानी, बस अड्डा.. की आवाज लगाने वाले चालकों की आवाज थी।
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लगा कि समय गुजरने के साथ हो सकता है कि लोगों की कुछ आमद-रफ्त बढ़े लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। पूर्वाह्न 11 बजे दरियापुर फ्लाईओवर खाली था। दरियापुर तिराहे पर दो-एक लोग पैदल दिखाई दे, जिन्हें पुलिस ने रोका और घर में रहने की सलाह दी।
दरियापुर से पंचरास्ता तक भी यही नजारा था। इस रोड का सन्नाटा उधर से गुजरने वाली जिलाधिकारी सी. इंदुमती और पुलिस अधीक्षक शिवहरी मीणा के वाहनों की आवाजों से टूटा। इस बीच गभड़िया फ्लाईओवर खाली रहा। कुछ छुट्टा मवेशी ही वहां विचरण करते मिले। रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म खाली रहे। किसी-किसी बेंच पर दो-एक लोग बैठे मिले।
पूछने पर बताया कि इमरजेंसी में बाहर जाना है। करीब साढ़े 11 बजे डीएम-एसपी वहां पहुंचे। रेलवे स्टेशन पर तैनात एसडीएम और क्षेत्राधिकारी से स्थिति का जायजा लिया। पता चला कि कुछ ही देर में मुंबई से अयोध्या जाने वाली साकेत एक्सप्रेस स्टेशन पर पहुंचने वाली है।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि उस ट्रेन से उतरने वाले यात्रियों की जांच व सेनेटाइज करने के बाद गंतव्य तक पहुंचाने की व्यवस्था करें। उसके बाद अधिकारियों ने एक बस स्टेशन पर खड़ी करवा दी।
शहर के व्यस्ततम इलाके में शुमार चौक घंटाघर इलाका ऐसा लग रहा था कि मानों यहां के लोग पलायन कर गए हों लेकिन खिड़कियों से झांक रहे लोग और अपने घर की छत से पतंग उड़ा रहे युवक ने जनजीवन का आभास दिलाया। बाधमंडी, शाहगंज, डाकखाना चौराहा, दीवानी न्यायालय रोड पूरी तरह खाली रहा। रोडवेज स्टॉप वीरान नजर आया।

आमतौर पर शांत जिले में शुमार लोगों के लिए अपनी तरह का यह बिल्कुल नया अनुभव था। जनता कर्फ्यू ने युवाओं को इस बात का अहसास करा दिया कि कर्फ्यू ऐसा ही होता होगा। हालांकि दोनों में अंतर साफ है कि कर्फ्यू में शासन-प्रशासन घर से निकलने और आवाजाही को प्रतिबंधित करता है लेकिन यह स्वेच्छा का नतीजा था।
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