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Sultanpur News: ब्लॉक प्रमुख की कुर्सी की लड़ाई पर विराम
Thu, 12 Feb 2026 11:40 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Thu, 12 Feb 2026 11:40 PM IST
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सुल्तानपुर। करौंदीकला ब्लॉक प्रमुख की कुर्सी को लेकर करीब दो साल से चल रहे विवाद पर विराम लग गया है। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को निरस्त करते हुए डीएम की ओर से कराए गए परीक्षण पर अपनी मोहर लगा दी है। नया प्रत्यावेदन मिलने पर जिलाधिकारी कार्रवाई करेंगे।
प्रकरण की शुरुआत तब हुई थी, जब करौंदीकला ब्लॉक प्रमुख विनोद कुमार के खिलाफ 36 बीडीसी सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव लाने की मांग करते हुए तत्कालीन जिलाधिकारी को शपथपत्र सौंपे थे। कुल 48 सदस्यों में से 36 के सशपथ प्रार्थनापत्र मिलने के बाद जांच कराई गई। जिला पंचायतराज अधिकारी की जांच में एक सदस्य का वार्ड गलत पाया गया, जबकि 12 सदस्य शपथपत्र देने से मुकर गए थे। इसके चलते अविश्वास प्रस्ताव पर होने वाली खुली बैठक टाल दी गई थी। इस निर्णय को चुनौती देते हुए वार्ड संख्या 44 की बीडीसी सदस्य सुमन गौतम ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।
हाईकोर्ट ने सशपथ प्रार्थनापत्रों को सही मानते हुए बैठक कराने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ बीडीसी सदस्य जितेंद्र कुमार पांडेय सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पहले हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाई और चार फरवरी 2026 को जारी आदेश में डीएम की ओर से शपथपत्रों का कराए गए परीक्षण को सही करार दे दिया है।
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डीपीआरओ अभिषेक शुक्ला ने बताया कि अविश्वास के संबंध में नया प्रत्यावेदन मिलने पर जिलाधिकारी नए सिरे से उसे देखकर निस्तारित करेंगे। मुख्य विकास अधिकारी विनय कुमार सिंह ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश प्राप्त हो गया है। नया प्रत्यावेदन मिलने पर डीएम की ओर से उस पर निर्णय लिया जाएगा।
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प्रकरण की शुरुआत तब हुई थी, जब करौंदीकला ब्लॉक प्रमुख विनोद कुमार के खिलाफ 36 बीडीसी सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव लाने की मांग करते हुए तत्कालीन जिलाधिकारी को शपथपत्र सौंपे थे। कुल 48 सदस्यों में से 36 के सशपथ प्रार्थनापत्र मिलने के बाद जांच कराई गई। जिला पंचायतराज अधिकारी की जांच में एक सदस्य का वार्ड गलत पाया गया, जबकि 12 सदस्य शपथपत्र देने से मुकर गए थे। इसके चलते अविश्वास प्रस्ताव पर होने वाली खुली बैठक टाल दी गई थी। इस निर्णय को चुनौती देते हुए वार्ड संख्या 44 की बीडीसी सदस्य सुमन गौतम ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।
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हाईकोर्ट ने सशपथ प्रार्थनापत्रों को सही मानते हुए बैठक कराने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ बीडीसी सदस्य जितेंद्र कुमार पांडेय सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पहले हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाई और चार फरवरी 2026 को जारी आदेश में डीएम की ओर से शपथपत्रों का कराए गए परीक्षण को सही करार दे दिया है।
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डीपीआरओ अभिषेक शुक्ला ने बताया कि अविश्वास के संबंध में नया प्रत्यावेदन मिलने पर जिलाधिकारी नए सिरे से उसे देखकर निस्तारित करेंगे। मुख्य विकास अधिकारी विनय कुमार सिंह ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश प्राप्त हो गया है। नया प्रत्यावेदन मिलने पर डीएम की ओर से उस पर निर्णय लिया जाएगा।