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साढ़े चार साल में भी आसान नहीं हुई सुल्तानपुर-वाराणसी की राह

Sun, 30 Aug 2020 09:48 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 30 Aug 2020 09:48 PM IST
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Sultanpur-Varanasi highway is incomplete even in four and a half years
सुल्तानपुर। प्रदेश की राजधानी लखनऊ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र को जोड़ने वाले लखनऊ-वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण का एक चौथाई कार्य साढ़े चार साल में भी पूरा नहीं हो सका है। हालत यह है कि करीब साल भर बाद शुरू हुए सुल्तानपुर-लखनऊ मार्ग पर डेढ़ साल से वाहन फर्राटा भर रहे हैं, जबकि सुल्तानपुर-वाराणसी मार्ग का कार्य प्रगति पर होने के बोर्ड जहां-तहां अब भी लगे हैं।
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लखनऊ-वाराणसी का आधा सफर मुश्किल भरा होने के कारण लोगों ने इस सीधे मार्ग पर आवाजाही से तौबा कर रखी है। आमतौर पर लोग ऐसे वैकल्पिक मार्गों का सहारा ले रहे हैं, जिसकी दूरी 40 से 50 किलोमीटर अधिक है।
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सुल्तानपुर शहर लखनऊ-वाराणसी के केंद्र में स्थित है। सुल्तानपुर शहर से लखनऊ और वाराणसी दोनों की लगभग समान दूरी है। सुल्तानपुर, अमेठी, जौनपुर के साथ ही सीमावर्ती अन्य जिले के लोगों को राजधानी लखनऊ से वाराणसी की बेहतर कनेक्टिविटी की मंशा से केंद्र सरकार ने लखनऊ-वाराणसी हाईवे (एनएच-56) के चौड़ीकरण को मंजूरी दी थी।
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इसके तहत एनएच-56 को फोरलेन किया जाना था। इस प्रोजेक्ट के तहत लखनऊ-सुल्तानपुर हाईवे के चौड़ीकरण का कार्य वर्ष 2016 के अंत में शुरू हुआ और अप्रैल 2019 में पूरा हो गया। तब से इस मार्ग पर वाहन फर्राटा भर रहे हैं। इस मार्ग ने सुल्तानपुर से लखनऊ का रास्ता सुगम बना दिया है।
पहले चार-पांच घंटे में पूरी होने वाली यात्रा में अब दो से ढाई घंटे का समय लग रहा है। इसकी तुलना में सुल्तानपुर-वाराणसी फोरलेन का कार्य कच्छप गति से ही चल रहा है। इस मार्ग के चौड़ीकरण के लिए वर्ष 2015 में टेंडर हुआ और जनवरी 2016 से इसका कार्य शुरू हो गया।
कार्य शुरू हुए करीब साढ़े चार वर्ष का समय बीत गया है लेकिन 1792 करोड़ की लागत से बनने वाले 139 किलोमीटर मार्ग का कार्य पूरा नहीं हो सका है। इस मार्ग पर जिले में हनुमानगंज, लंभुआ व चांदा में तीन बाईपास बनने हैं।
साथ ही पयागीपुर रेलवे क्रॉसिंग पर एक फ्लाईओवर निर्माणाधीन है। एनएचएआई के अधिकारियों के अनुसार सुल्तानपुर-वाराणसी फोरलेन का लगभग 70 फीसदी कार्य हो गया है। मार्च 2021 तक निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा।
सुुल्तानपुर-वाराणसी फोरलेन के निर्माण में भूमि के मुआवजे का विवाद बड़ी बाधा बना। मुआवजे के वितरण में बड़े अंतर की शिकायत पर जिला प्रशासन ने मामले की जांच कराई तो पता चला कि बाईपास पर मुआवजा राशि किसानों में अधिक वितरित कर दी गई है। इसके खुलासे के बाद जिला प्रशासन ने भू-स्वामियों को नोटिस जारी कर दी।
मुआवजे के विवाद के बाद किसानों ने बाईपास पर निर्माण कार्य रोक दिया। संबंधित कंपनी ने जब निर्माण शुरू कराने की कोशिश की उसे किसानों का बड़ा विरोध झेलना पड़ा। शासन के हस्तक्षेप के बाद आखिर जिलाधिकारी सी. इंदुमती को खुद बीच-बचाव कर विवाद सुलझाने की पहल करनी पड़ी।
24 मार्च से शुरू हुए लॉकडाउन का प्रतिकूल असर भी सुल्तानपुर-वाराणसी फोरलेन निर्माण कार्य पर पड़ा। लॉकडाउन के दौरान करीब डेढ़ महीने तक इस मार्ग पर निर्माण कार्य पूरी तरह बंद रहा। पयागीपुर रेलवे क्रॉसिंग पर निर्माणाधीन फ्लाईओवर का कार्य ठप करना पड़ा। अधिकतर मजदूर घर चले गए। लॉकडाउन के बाद जब कार्य शुरू हुआ तो सोशल व फिजिकल डिस्टेसिंग मेनटेन करने के लिए मजदूरों की संख्या घटानी पड़ी।

सुल्तानपुर-वाराणसी फोरलेन के उप परियोजना प्रबंधक जतिन लखमनी ने बताया कि भूमि विवाद की वजह से निर्माण कार्य में विलंब हुआ। प्रशासन की रिपोर्ट के मुताबिक भूमि विवाद का निस्तारण हो चुका है। मार्ग का निर्माण मार्च 2021 तक पूरा कर लिया जाएगा।
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