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परिवारीजनों ने कोरोना पॉजिटिव का शव लेने से किया इंकार
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सुल्तानपुर। जिले में कोरोना से हुई मौत के मामले में संवेदनहीनता की पराकाष्ठा देखने को मिली। पहले बेटे के पिता का शव लेने के इंकार के बाद तीन दिन तक शव मॉर्च्यूरी में पड़ा रहा। जब प्रशासन ने अंतिम संस्कार की पहल की तो हथियानाला स्थित श्मशान घाट पर डोम ने इंकार कर दिया। एसडीएम के समझाने के बाद किसी तरह शवदाह हो सका।
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक मुंबई से प्राइवेट कार से 18 जून को लौटे कादीपुर खुर्द निवासी एक प्रौढ़ की उसी दिन अचानक घर पर ही मौत हो गई थी। सूचना पर पहुंची स्वास्थ्य टीम ने मौत को संदिग्ध मानते हुए उसे अपने कब्जे में लेते हुए सैंपलिंग की थी।
21 जून को प्रौढ़ की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आने के बाद हड़कंप मच गया। प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग ने परिवारीजनों को अंतिम संस्कार के लिए शव को ले जाने की सूचना दी। सूचना के बाद बेटे ने शव को ले जाने के लिए दो दिनों तक प्रशासन को उलझाए रखा।
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अंत में सोमवार देर रात बेटे ने पिता का शव लेने से इंकार कर दिया। उसने स्वास्थ्य विभाग को लिखित सूचना देते हुए प्रशासन की देखरेख में शव का अंतिम संस्कार कराने का आग्रह किया। मंगलवार को प्रशासन ने शहर के गोमती नदी के किनारे हथियानाला स्थित शवदाह स्थल पर अंतिम संस्कार का निर्णय लेते हुए घाट के डोम को निर्देश दिया।
कोरोना पॉजिटिव मरीज के अंतिम संस्कार की सूचना से डोम के भी हाथ-पांव फूल गए। साथ ही मोहल्ले के लोगों ने भी विरोध जताना शुरू कर दिया। डोम के इंकार करने की सूचना पर पुलिस व स्वास्थ्य टीम के साथ पहुंचे एसडीएम सदर रामजी लाल ने डोम को समझा बुझाकर शव का अंतिम संस्कार करने के लिए राजी किया। डोम को स्वास्थ्य विभाग की ओर से किट उपलब्ध कराई गई। इसके बाद शाम को शव का अंतिम संस्कार कराया जा सका।
उपजिलाधिकारी सदर रामजी लाल ने बताया कि प्रौढ़ के परिवारीजनों ने सोमवार की रात स्वास्थ्य विभाग को लिखित सूचना देते हुए शव लेने से इंकार कर दिया। स्वास्थ्य विभाग से मंगलवार को सूचना मिलने पर तहसीलदार को भेजकर डोम को निर्देशित किया गया। डोम ने उन्हें मना कर दिया। इसके बाद स्वास्थ्य व पुलिस टीम के साथ पहुंचकर डोम को मैंने राजी किया। डोम को किट समेत अन्य उपकरण उपलब्ध कराकर शासन की गाइड लाइन के तहत शवदाह कराया गया।
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स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक मुंबई से प्राइवेट कार से 18 जून को लौटे कादीपुर खुर्द निवासी एक प्रौढ़ की उसी दिन अचानक घर पर ही मौत हो गई थी। सूचना पर पहुंची स्वास्थ्य टीम ने मौत को संदिग्ध मानते हुए उसे अपने कब्जे में लेते हुए सैंपलिंग की थी।
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21 जून को प्रौढ़ की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आने के बाद हड़कंप मच गया। प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग ने परिवारीजनों को अंतिम संस्कार के लिए शव को ले जाने की सूचना दी। सूचना के बाद बेटे ने शव को ले जाने के लिए दो दिनों तक प्रशासन को उलझाए रखा।
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अंत में सोमवार देर रात बेटे ने पिता का शव लेने से इंकार कर दिया। उसने स्वास्थ्य विभाग को लिखित सूचना देते हुए प्रशासन की देखरेख में शव का अंतिम संस्कार कराने का आग्रह किया। मंगलवार को प्रशासन ने शहर के गोमती नदी के किनारे हथियानाला स्थित शवदाह स्थल पर अंतिम संस्कार का निर्णय लेते हुए घाट के डोम को निर्देश दिया।
कोरोना पॉजिटिव मरीज के अंतिम संस्कार की सूचना से डोम के भी हाथ-पांव फूल गए। साथ ही मोहल्ले के लोगों ने भी विरोध जताना शुरू कर दिया। डोम के इंकार करने की सूचना पर पुलिस व स्वास्थ्य टीम के साथ पहुंचे एसडीएम सदर रामजी लाल ने डोम को समझा बुझाकर शव का अंतिम संस्कार करने के लिए राजी किया। डोम को स्वास्थ्य विभाग की ओर से किट उपलब्ध कराई गई। इसके बाद शाम को शव का अंतिम संस्कार कराया जा सका।
उपजिलाधिकारी सदर रामजी लाल ने बताया कि प्रौढ़ के परिवारीजनों ने सोमवार की रात स्वास्थ्य विभाग को लिखित सूचना देते हुए शव लेने से इंकार कर दिया। स्वास्थ्य विभाग से मंगलवार को सूचना मिलने पर तहसीलदार को भेजकर डोम को निर्देशित किया गया। डोम ने उन्हें मना कर दिया। इसके बाद स्वास्थ्य व पुलिस टीम के साथ पहुंचकर डोम को मैंने राजी किया। डोम को किट समेत अन्य उपकरण उपलब्ध कराकर शासन की गाइड लाइन के तहत शवदाह कराया गया।